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90% विजुअल डिसेबिलिटी के बाद भी हौसलों के दम पर किया साबित

किरन कुमारी किंडो | Mar 09, 2017, 06:02 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
90% विजुअल डिसेबिलिटी के बाद भी हौसलों के दम पर किया साबित
जयपुर.औरों की तरह ठीक से देख नहीं सकती, मगर काबिलियत और हौसलों को कायम कर जयपुर की परिधि वर्मा सपने पूरे करने चली हैं। मेकुलर डीजनरेशन व 90 पर्सेंट विजुअली चैलेंज्ड होने के बावजूद उनका इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट लखनऊ से कैम्पस प्लेसमेंट हुआ।
10% विजन, 90% डेडीकेशन
सिर्फ 10 पर्सेंट ही देख सकने के बावजूद अपनी काबिलियत और मेहनत के बलबूते प्लसमेंट में खुद को साबित किया। मेकुलर डीजनरेशन ऐसी रेयर डिजीज है जो 7 लाख लोगों में किसी एक को होती है। वे कहती हैं, मेरे केस में ये बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जिसका कोई इलाज भी नहीं है। बीबीए के बाद एमबीए करना चाहती थी, पहले प्रयास में ही कैट क्लियर किया। प्लेसमेंट के इंटरव्यू में पैनल ने जब मुझसे इस डिसेबिलिटी की वजह से परफॉर्मेंस पर असर का रिस्क जाहिर किया तो मैंने उन्हें समझाया कि अब तक सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी की मदद से इंफॉर्मेशन एक्सेस करती आई हूं।डॉक्यूमेंटेशन करने में मुश्किल इसलिए नहीं आएगी क्योंकि डेडिकेटेड व टेक्नोफ्रेंडली हूं और एक्सपीरियंस्ड भी।इतने स्टूडेंट्स में इंटर्नशिप के दौरान ही प्री प्लेसमेंट ऑफर मिल गया था।आईआईएम - लखनऊ के प्रोफेसर हिमांशु राय कहते हैं, रीडर्स व स्क्राइब(लेखक) के जरिए अपनी पढ़ाई पूरी की। अपने बैच में 19 साल की यंगेस्ट स्टूडेंट थीं, जब उनका एडमिशन आईआईएम- लखनऊ में हुआ।
अंडर-18 स्टेट लेवल फुटबॉल चैम्पियनशिप विनर

फिफ्थ क्लास में पहली बार मुझे देखने में दिक्कत आने लगी थी। वक्त के साथ मेरी परफॉर्मेंस खराब होती गई। इन सबके बावजूद मैंने और परिवार ने कभी हार नहीं मानी। दसवीं क्लास में अंडर-18 स्टेट लेवल फुटबॉल चैम्पियनशिप जीती। ग्रेजुएशन के दौरान कॉलेज बैंड की कई एक्टिविटीज का हिस्सा बनीं। कॉलेज एक्टिविटी में गिटार बजाती रहीं। विजुअली इम्पेयर्ड होने के बावजूद कई प्रोफेशनल शोज और कॉन्सर्ट का हिस्सा बनी। मैंने मास कम्यूनिकेशन वीडियो प्रोडक्शन में डिप्लोमा कोर्स भी किया। इंटर्नशिप के दौरान खुद की काबिलियत पर विश्वास करना सीखा। ग्रेजुएशन के दौरान पहली बार घर से दूर रहीं। ग्रेजुएशन के दौरान हॉस्टल लाइफ को अलग तरीके से जीना सिखाया। राजस्थान सरकार की ओर से 2015 में वुमन ऑफ दि इयर अवॉर्ड दिया गया। 4 सितंबर 2015 को उन्हें डॉटर्स डे पर ‘नोबल लॉरियट कैलाश सत्यार्थी’ अवॉर्ड मिला।
हां, मैं डिसएबल्ड हूं, मैकूलर डीजनरेशन व 90 पर्सेंट से ज्यादा विजुअल इम्पेयरमेंट से ग्रस्त हूं। बावजूद इसके माइक्रो फाइनेंस बैंक में बतौर कस्टमर रिलेशनशिप एक्जीक्यूटिव प्लेसमेंट हुआ। अपने पेरेंट्स की इकलौती हूं, उन्होंने मुझे कभी किसी स्पेशल इंस्टीट्यूट में पढ़ने नहीं भेजा। मेरा एडमिशन नॉर्मल बच्चों के साथ करवाया। -परिधि, वर्मा
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Web Title: visually impaired, it is proven to be done on the grounds of freshness
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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