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जानिए, कैसे पाकिस्तान में तिरंगे के लिए जान पर खेल गया एक जांबाज!

Gagan Gurjar | Jan 25, 2013, 00:04 IST

  • 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस यानी हमारे संविधान का जन्म दिवस। 63 साल पहले 1950 में ठीक इसी दिन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी देकर हमारे राष्ट्र ध्वज तिरंगे को फहराया था और भारतीय गणतंत्र की घोषणा की थी। इससे पहले 15 अगस्त 1947 हमारा देश आजाद तो हो गया था लेकिन हमारा कोई संविधान न होने के कारण सही मायनों में आजादी नहीं मिल पाई थी।
    इसके लिए भारतीय महापुरुषों ने 894 दिन की कड़ी मेहनत के बाद स्वतंत्र भारत का संविधान बनाया और 26 जनवरी 1950 को भारतीय जनता के सामने उसकी घोषणा की।तब से हर साल 26 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, तिरंगे और एक जांबाज की अमर कहानी...
  • वैसे तो स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस हर भारतीय के लिए समान रूप से अहमियत रखता है और हर दिल में तिरंगे के सम्मान की भावना हिलोरें लेते देखी जा सकती हैं। हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दिन देश के हर कोने में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाता है, लेकिन राजस्थान के गुलाबी नगर में एक परिवार से तिरंगे का रिश्ता ही कुछ खास है।कुछ अलग है इस परिवार और तिरंगे की कहानी और कुछ अलग है इस परिवार के लिए तिरंगा फहराने का महत्त्व।

  • जयपुर में रहने वाला यह परिवार अटल परिवार के नाम से जाना जाता है, इस परिवार में है एक खास तिरंगा झंडा।वैसे तो इस तिरंगे में भी लाल, हरे और सफेद रंग की तीन पट्टियां और बीच में अशोक चक्र है, फिर भी यह तिरंगा अपने आपमें कुछ खास महत्व रखता है।

    (फोटो में जयकुमार अटल की पोती देविका तनखा और पुत्र अजय कुमार अटल)

  • इस तिरंगे से जुड़ी है बहादुरी की एक कहानी।यह कहानी जयकुमार अटल और तिरंगे की।यह कहानी है वीरता की एक मिसाल की और यह कहानी है सच्ची देशभक्ति की।

    फोटो में जयकुमार अटल (दायें )

  • बात 1971 की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था।उस समय जयपुर के जय कुमार अटल पकिस्तान में भारत के हाई कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।यह सभी जानते हैं कि इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा था।

  • अपनी हार से पाकिस्तान पूरी तरह बौखला उठा और उसी बौखलाहट में कुछ पाकिस्तानियों ने वहां तिरंगे को जलाने का प्रयास किया।जब जय कुमार अटल ने यह देखा तो अपनी वीरता का परिचय देते हुए उन्होंने तिरंगा उन पाकिस्तानियों से छीन लिया और उसे लेकर भारत आ गए।

  • तिरंगा लेकर जब वे भारत पहुंचे तो सर्व प्रथम उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से मुलाक़ात की और तिरंगा उन्हें सौंपना चाहा लेकिन श्रीमती गांधी ने तिरंगा लेने से इनकार कर दिया और तिरंगा जय कुमार को अपने साथ ले जाने को कहा।

  • श्रीमती गांधी ने तिरंगा जयकुमार को वापस करते हुए कहा कि इस तिरंगे की लाज आपने बचाई है, इसलिए आज से यह तिरंगा आपके परिवार के पास ही सुरक्षित रहेगा, साथ ही हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर आपके परिवार में ही इसे फहराया जाएगा।
    फोटो में जयकुमार अटल (दायें )
  • तब से जयपुर के अटल परिवार में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस दोनों ही एक त्यौहार की तरह मनाये जाते हैं जिसमें परिवार के सभी सदस्य चाहे वे जयपुर से बाहर ही क्यों न बसते हों, एक साथ इस तिरंगे को फहराते हैं।

    (फोटो में जयकुमार अटल के पुत्र अजय कुमार अटल)

  • यहां तक कि जय कुमार अटल की पोती देविका तनखा जो US में रहती हैं, वे भी इस खास पर्व पर जयपुर पहुंच जाती है।
    (फोटो में जकुमार अटल की पुत्र वधु नंदनी अटल)
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Learn how to death to play a brave tricolor in Pakistan!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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