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अपने को तंदरुस्त रखने के लिए लोग अपना रहा हैं यह संजीवनी!

पूजा शर्मा | Feb 15, 2013, 03:53 AM IST

डॉक्टर्स की डिक्शनरी में लाइफस्टाइल से जुड़ी डिजीज बढ़ रही हैं। शहर के सेहत विशेषज्ञों की राय है कि सुबह की 30 मिनट की वॉक आपके जीवन को अद्भुत ढंग से बदलती है। ऐसे में सुबह को संजीवनी के रूप में अपनाने वालों की संख्या भी बढ़ रही है
जयपुर.सॉफ्टवेयर इंजीनियर अखिलेश कुमार 15 से 18 घंटे कंप्यूटर स्क्रीन पर बिताते हैं। जब लगातार थकान, पीठदर्द जैसी शिकायतें होने लगीं तो डॉक्टर ने अखिलेश को मॉर्निग वॉक शुरू करने की हिदायत दी। पिछले साल की पहली तारीख को उन्होंने इस नई गतिविधि को अपनी जीवनशैली में शामिल किया।
अखिलेश कहते हैं, 'मेरी रुटीन ऐसी है कि मैंने सुबह के सूरज को वर्षों से नहीं देखा था। पहली तारीख को सुबह हल्के अंधेरे में पार्क पहुंचा तो वर्षों बाद सूरज की किरणों को धीरे-धीरे निकलते देखा। इस समय क्लोरोफिल पत्तियों का रंग बदल रहा था। मैंने जी भर के ऑक्सीजन को अपने भीतर उतारा। ऐसा लगा जैसे शरीर की हरेक तंत्रिका को ऊर्जा की खुराक मिली थी, मानो आलस की परत हटाकर शरीर ताजगी के पूल में डुबकी लगा रहा हो।'
फूलाकस, कांडोला, ओपी, करसंती, कर्ण फ्लावर, हजारा और खासमौस जैसे सीजनल फूल और घास पर जमी ओस की बूंदें मौसम के एहसास को जिंदा कर रही थीं। वहीं, पेड़ों के झुरमुट में पक्षियों की सिंफनी शरीर में एंडॉर्फिन का स्तर बढ़ा रही थी। उस दिन लगा ऑफिस के प्रोजेक्ट्स, आईपैड की धुनें, चैटिंग और लेटनाइट पार्टियां सबकुछ फीकी हैं। उस सुबह ने मुझे हरेक दिन इस अनुभव की खुराक बढ़ाने की प्रेरणा दी। दो महीने में असर दिखने लगा, मेरा रुटीन सही हुआ और फिटनेस भी।
सुबह की चहलकदमी कइयों के लिए सामान्य रुटीन हो सकती है, लेकिन असल में यह जिंदगी से जुड़ी है और हरेक के लिए अलग मायने रखती है।
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Web Title: People are going to fit your own elixir!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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