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चिंतन शिविर: मंच पर दिखा सिर्फ राहुल का चेहरा!

पंकज कुमार पाण्डेय | Jan 19, 2013, 02:53 IST

  • जयपुर.बदलाव की बुनियाद रखने के लिए कांग्रेस का चिंतन शिविर शुक्रवार को जयपुर में मिले-जुले संदेश के साथ शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बिड़ला सभागार में आए तो हल्की-फुल्की तालियों की थाप पर कांग्रेस के युवा व बुजुर्ग नेता खड़े हुए। ठीक पीछे सोनिया गांधी को देखकर थाप बढ़ी। इसके तुरंत बाद राहुल गांधी आए तो तालियों की थपथपाहट गूंज में तब्दील हो गई। शायद यही जेनरेशन शिफ्ट की आहट है, जो सभागार में मौजूद लोगों को समझने व पढ़ने को सही मायने में मिली।
    एजेंडे पर बोलते हुए चिंतन शिविर की कोऑर्डिनेटर अंबिका सोनी ने इसी बदलाव का मर्म कुछ यूं समझाया- यह शिविर पिछले पचमढ़ी और शिमला चिंतन से अलग है। यहां पहली बार युवा कांग्रेस के चुने हुए युवा प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इसका श्रेय राहुल गांधी को जाता है (राहुल का नाम लेते ही मंच पर बैठे प्रधानमंत्री सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं ने ताली बजाकर हामी भरी)।
    गौरतलब है कि पहले दो चिंतन शिविरों में एआईसीसी मीटिंग नहीं हुई, इस बार हो रही है। एआईसीसी बैठक में पार्टी अपने फैसलों पर मुहर लगवाती है। ऐसे में सवाल हो रहा है कि क्या कोई बड़ा फैसला होना है ? मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बाबत पूछने पर कि क्या राहुल गांधी के बारे में कोई घोषणा होगी, जवाब दिया- थोड़ा इंतजार कीजिए।
    हालांकि पार्टी के बुजुर्ग नेता मुरली देवड़ा ने किसी घोषणा को लेकर संशय जताया। भास्कर से उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई संशय नहीं है। वे पार्टी का एजेंडा सेट कर रहे हैं, लेकिन यहां कोई घोषणा होगी कहना मुश्किल है। हां पार्टी में अगले दो दिन उनको नेतृत्व सौंपने की मांग तेज होने वाली है।
    युवा सांसद अशोक तंवर, राजीव सातव, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह सहित दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद सहित तमाम वरिष्ठ नेता जिसने भी मुंह खोला, उनकी जुबान पर जेनरेशन शिफ्ट की बात स्वाभाविक तौर पर उभरी।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, युवाओं नेताओं पर चिंतन में क्या>>>
    भास्कर टीम
    कांग्रेस के चिंतन शिविर की हर खबर से पाठकों को रूबरू कराने के लिए भास्कर के ग्यारह संवाददाताओं और सात फोटो पत्रकारों ने चप्पे-चप्पे पर मोर्चा संभाला, ताकि सियासी योजनाएं और भविष्य में उनसे पड़ने वाले असर को आप तक विश्लेषण के साथ पहुंचाया जा सके।
    संवाददाता: त्रिभुवन, गिरिराज अग्रवाल, ललित शर्मा, बाबूलाल शर्मा, गोवर्धन चौधरी, श्रवण राठौड़, मदन कलाल, आलोक खंडेलवाल, राजेंद्र गौतम, प्रणीता भारद्वाज और किरण सैनी।
    फोटो जर्नलिस्ट: योगेन्द्र गुप्ता, राजेश कुमावत, अनिल शर्मा, निरंजन चौहान, महेन्द्र शर्मा, राजकुमार शर्मा, मनोज श्रेष्ठ।

  • मंच पर पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं के फोटो लगे थे - दाहिनी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, बाईं ओर ऊपर प्रधानमंत्री तो उनके ठीक नीचे राहुल गांधी।
    एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी की अगुवा नेता हैं, प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया हैं। राहुल गांधी इन दोनों से नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार हैं। मंच पर लगे फोटो का शायद यही संदेश है।
  • युवाओं को कमजोर राज्यों का जिम्मा देने की मांग
    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के लिए भले ही कसीदे पढ़े गए लेकिन चिंतन समूहों में नेता सरकार की नीतियों पर बरसे। हालांकि समूहों के चिंतन का केंद्र बिंदु युवा ही रहे। संगठन व सरकार में तीस फीसदी युवाओं को जगह देने का मसला भी चिंतन बैठक की चर्चा में शामिल है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पांचों समूहों की बैठक में हिस्सा लिया।
  • शहरी युवाओं की उपेक्षा क्यों?:
    ए के एंटनी की अध्यक्षता में बने भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों पर बने समूह मे संजय निरुपम,अजय माकन ने शहरी युवाओं की उपेक्षा का मसला उठाया। बाद में गुजरात के तुषार चौधरी ने भी इसे गुजरात में हुई हार से जोड़ा। इन नेताओं का कहना था कि नौ साल की यूपीए सरकार में शहरी युवाओं का कोई ख्याल नहीं रखा गया। कुछ डेलीगेट्स ने कहा कि शहरी युवाओं पर ध्यान न देने की वजह से हाल के आंदोलन हुए हैं।
  • 35 साल तक के युवाओं को दें कमजोर राज्यों का जिम्मा :
    वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस कमजोर है वहां का जिम्मा 35 साल से कम उम्र के युवाओं को देना चाहिए, जिससे इन्हें पार्टी को मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय मिले । मार्च तक पार्टी में ब्लॉक से लेकर शीर्ष स्तर तक बड़े बदलाव को पूरा करने कर लेने की वकालत की गई।
    पार्टी मैनेजरों को न दें चुनाव की कमान:
    संगठनात्मक मजूबती के लिए बने समूह के चिंतन में कहा गया कि चुनाव लड़ने और पार्टी रणनीतिकारों की मशीनरी अलग होना चाहिए। जो लोग पार्टी का कामकाज देखते हैं उन्हें चुनावी सियासत से दूर रहने की सलाह भी सामने आई।
    गठबंधन पर मिली जुली राय
    बिहार से आए नेताओं ने गठबंधन की मुखालफत की।राहुल गांधी की टीम के कुछ युवा सदस्यों ने भी कहा कि गठबंधन से पार्टी की ग्रोथ पर असर पड़ता है।
    हालांकि ज्यादातर सदस्यों ने गठबंधन की सियासत को अपरिहार्य बताया। भारत और दुनिया के संबंधों पर चिंतन समूह में पाकिस्तान को लेकर चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि पाकिस्तान के मामले में कई मौकों पर राजनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा बल एक दिशा में नहीं नजर आए। सदस्यों ने कहा कि यह चिंता का विषय है और सरकार और सेना को एक भाषा में बोलना चाहिए।
  • सोनिया - पीएम यहां पर बोले
    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिला सशक्तिकरण पर बने समूह में बोलते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान देने की शिक्षा घर से शुरू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की जागरूकता होनी चाहिए कि मां घर में अपने बच्चों को घर व आसपास की महिलाओं का सम्मान करने की शिक्षा दें। महिला व बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध पर सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। ज्यादातर डेलीगेट्स इसी राय के थे।
    पड़ोसी से शांति जरूरी
    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के मसले पर बोलते हुए कहा कि भारत ने एक सभ्य देश की तरह व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि एक शांत पड़ोसी देश के विकास व आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है।
  • 5 समूहों में चिंतन
    उद्घाटन सत्र के बाद कांग्रेस नेताओं को पांच समूहों में बांटा गया। पांच वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में चिंतन के लिए पांच समूह बनाए गए हैं।
    ग्रुप एक : भावी राजनीतिक चुनौतियां, अध्यक्ष : ए.के. एंटनी, चिंतन की जगह : बिड़ला ऑडिटोरियम का हॉल वन
    ग्रुप दो : उभरती सामाजिक आर्थिक चुनौतियां : अध्यक्ष : दिग्विजय सिंह, चिंतन की जगह : हॉल नंबर दो
    ग्रुप तीन : महिला सशक्तिकरण : अध्यक्ष : डॉ. गिरिजा व्यास, जगह : हॉल नंबर 3, द्वितीय तल
    ग्रुप चार : भारत और विश्व : अध्यक्ष : आनंद शर्मा, जगह : भूतल में हॉल नंबर 5
    ग्रुप पांच : संगठन की ताकत : अध्यक्ष : गुलाम नबी आजाद, जगह : द्वितीय तल पर हॉल नंबर 4
  • राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग
    जयपुर में चल रहे कांग्रेस के चिंतन शिविर में अगले आम चुनाव के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठी।
    वहीं कुछ पार्टी नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। शुक्रवार को लगभग तीन घंटे तक पांच कमेटियों में अलग-अलग विचार-विमर्श हुआ। बैठकों में प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह भी शिरकत कर रहे थे।
    गठबंधन की जरूरत :
    राजनीतिक मामलों पर गठित समिति में गठबंधन की जरूरत पर जोर दिया गया। यह बात भी सामने आई कि शिमला डिक्लेरेशन गठबंधन की जरूरत पर था तो जयपुर डिक्लेरेशन गठबंधन के उचित मैनेजमेंट पर होगा।
    पश्चिम बंगाल से सांसद दीपादास मुंशी ने साफ तौर पर गठबंधन की उपयोगिता को ही नकार दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन को खत्म कर कांग्रेस को खुद चुनाव में आगे आना चाहिए। फिर भले ही पार्टी की हार ही क्यों न हो। दूसरी तरफ कमलनाथ, जयराम रमेश जैसे पुराने कांग्रेसियों का मत था कि गठबंधन जरूरी है और इसके मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
    यूथ कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने राज्य विशेष के आधार पर गठबंधन की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन कांग्रेस की शर्तो पर हो। कमलनाथ और अजय माकन ने कहा कि शहरों में रहने वाले गरीबी रेखा के नीचे रहन वाली आबादी के लिए सरकार को विशेष योजनाएं बनानी चाहिए। साथ ही सदस्यों ने कांग्रेस की सांप्रदायिकता की नीति को और स्पष्ट करने की मांग की।
    राहुल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
    पार्टी संगठन को लेकर बनी समिति के सामने दिल्ली के सांसद जयप्रकाश अग्रवाल और यूपी से सांसद राज बब्बर ने खासतौर से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश कर चुनाव लड़ने की बात कही। युथ कांग्रेस के लोगों ने ब्लॉक स्तर पर ज्यादा से ज्यादा सहभागिता करने की बात कही। केंद्रीय मंत्री और समिति के सदस्य हरीश रावत ने कहा कि हमें जातिगत मतदाता पर फोकस करना पड़ेगा। खासतौर से जो जातियां कांग्रेस को छोड़कर चली गई हैं उन्हें वापस लाने की मुहिम छेड़नी पड़ेगी। यह बात भी कही गई कि कांग्रेस को अपनी संस्कृति से समझौता नहीं करना चाहिए।
    किसानों पर ध्यान
    सामाजिक आर्थिक समिति में उस समय गरमाहट दिखी जब सीडब्ल्यूसी के आमंत्रित सदस्य सैम पित्रोदा की कई महत्वपूर्ण विकास संबंधी बातों पर टोकते हुए केरल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्निथला ने कहा कि डीजल को डिरेगुलेट करने की पॉलिसी पर विचार करना भी गलत है। उन्होंने कहा कि किसानों के विषय में जितनी बातें कही जाती हैं उनमें से 50 प्रतिशत भी पूरी नहीं होतीं। केंद्रीय मंत्री वयालार रवि ने किसानों और खासतौर से गरीबों के हितों का ध्यान में रखकर ही योजनाओं को हरी झंडी देने पर जोर दिया।
  • पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती लेकिन युद्ध नहीं
    आनंद शर्मा की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय मसलों पर गठित समिति में पाकिस्तान का मुद्दा छाया रहा। मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और शशि थरूर ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसका समर्थन यूथ कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी किया। डा कर्ण सिंह ने पाकिस्तान के साथ व्यक्ति से व्यक्ति बातचीत और सांस्कृतिक संबंधों के आदान-प्रदान को जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने भी पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश देने की मांग की। कोई भी सदस्य युद्ध के पक्ष में नहीं था।
    सभी की राय थी कि युद्ध समाधान नहीं करेगा। समिति में चीन की ओर से म्यांमार के रास्ते हथियारों की कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग भी उठी। यूथ कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने अरुणाचल पर चीन को सख्त संदेश देने की मांग की। केंद्रीय मंत्री रहमान खान ने कहा कि काले धन की सीमा पार से आवाजाही भी एक चुनौतीपूर्ण मुद्दा है। इस पर सरकार को सख्त होना पड़ेगा।
    सोनिया गांधी से कई महिला प्रतिनिधि मिलीं। उन्होंने महिलाओं के विषय में और खासतौर से यौन उत्पीड़न के खिलाफ सुझाव दिए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने महिलाओं में जागरूकता के लिए पार्टी की ओर से कार्यक्रम तय करने की मांग की। शनिवार को सोनिया गांधी तमाम समिति में हो रही चर्चा में शामिल होंगी।
    कार्यसमिति के सामने आए सुझावों पर शनिवार को फिर चर्चा होगी। शनिवार को समितियां अपनी सिफारिशें कांग्रेस कार्यसमिति को सौंपेंगी। अंतिम फैसला लेने के बाद रविवार को कांग्रेस महाधिवेशन में इन सिफारिशों पर मुहर लगाई जाएगी।
  • समस्याएं दूर होंगी शिविर से
    देश की वर्तमान स्थितियों में कांग्रेस को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसे में कांग्रेस के आंतरिक मामलों और राज्यों में आ रही समस्याओं को शिविर में उठाया जाएगा। साथ ही विदेश नीति भी महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है।
    - राज बब्बर, सांसद, फिरोजाबाद
  • संगठन मजबूत होगा
    मुख्य रूप से संगठनात्मक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। राजनीतिक दल का चिंतन है इसलिए चुनाव भी महत्वपूर्ण होंगे। चुनौतियों और महिला सुरक्षा पर बातचीत इस शिविर में अहम मुद्दे रहेंगे। इसका फायदा संगठन को मजबूत करने में मिल सकेगा।
    - दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद, रोहतक
  • महंगाई के लिए राज्य भी जिम्मेदार : राशिद अल्वी
    देश में आम जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के लिए केंद्र सरकार ही नहीं राज्य सरकारें भी जिम्मेदार हैं। राज्य सरकारों को जमाखोरों को खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। यह कहना है कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राशिद अल्वा का। कांग्रेस के चिंतन शिविर में भाग लेने के लिए आए राशिद अल्वा ने भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि देश के लोगों को दुनिया की आर्थिक स्थिति को समझना होगा।
    अमेरिका, ग्रीक, यूरोप, दुबई और विकसित और विकासशील देशों में आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इनके मुकाबले भारत बेहतर स्थिति में है। महंगाई को लेकर कांग्रेस चिंतित है। पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर अल्वी ने कहा कि यह सब अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करता है।
    कीमतों को लेकर भाजपा सहित अन्य विपक्ष हल्ला मचाता है, जबकि भाजपा को याद होगा, उनकी सरकार ने 18 बार कीमतें बढ़ाई थी। विपक्ष को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।
    विचार भेद मजबूत होता संगठन :
    एक सवाल के जवाब में राशिद अल्वी ने कहा कि प्रदेश में अगर किन्ही नेताओं में मतभेद है तो उसे मतभेद के स्थान पर विचार भेद के रूप में देखना चाहिए। विचार भेद से संगठन में मजबूती आती है, सरकार को ताकत मिलती है। वैसे जहां सत्ता होती है, वहां विचार भेद स्वाभाविक है।
    राहुल को जिम्मेदारी देंगे :
    उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर के दौरान राहुल गांधी को बड़ी जिम्मेदारी देने पर भी चर्चा हो सकती है। राहुल देश के युवा नेता हैं और वे एक दिन प्रधानमंत्री अवश्य बनेंगे। देश उनकी तरफ देख रहा है।
    चिंतन शिविर में मंथन :
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के लगातार शासन के साढ़े आठ साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान क्या खोया क्या पाया और हमारी पार्टी कहां खड़ी है, इसके बारे में मंथन किया जाएगा। साथ ही इस साल विधानसभाओं के चुनावों को लेकर भी चर्चा की जाएगी। देश को कैसे आगे ले जाया जाए, विकास के और क्या आयाम हो सकते हैं, इनके बारे तय किया जाएगा। हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते हैं और कांग्रेस उसके लिए हमेशा तैयार रहती है।
    राजस्थान में बेहतर काम हुआ :
    अल्वी ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और आगे भी यह सरकार बनेगी। इस सरकार ने बेहतर काम किया है। राज्य सरकार से स्तर पर शुरू की गई निशुल्क दवा योजना, पशुओं के लिए निशुल्क दवा योजना, गरीबों को दो रुपए किलों गेहूं और आदिवासियों की बच्चियों की शिक्षा के लिए शुरू की गई योजनाएं सराहनीय हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में अच्छा काम किया है।
  • दुराचारी बच्चों को सजा नहीं, सुधारने की जरूरत
    केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने साफ तौर पर कहा है कि किशोर बच्चों के मामले में आयु सीमा 18 साल से कम नहीं की जाएगी। दुराचार के मामलों में 18 साल से कम आयु के बच्चों के भी लिप्त पाए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को सजा देने की नहीं बल्कि सुधारने की जरूरत है।
    देश में बच्चों की आबादी 44 प्रतिशत है। जबकि इस तरह के मामलों में 0.1 प्रतिशत बच्चे ही लिप्त होते हैं। वे यहां शुक्रवार को कांग्रेस के चिंतन शिविर में शामिल होने आई थीं। उन्होंने कहा कि शिविर में इस बात पर विचार करेंगे कि महिलाओं, बुजुर्गो और युवाओं को हम किस तरह से सक्षम बनाएं।
    महंगाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का जितना वेतन बढ़ा है, उससे उनमें खुशी है। देश को तरक्की करनी है तो कुछ महंगाई बढ़ेगी ही। लोग सहयोग भी करते हैं। आजादी के बाद से हमारे हालात सुधरते जा रहे हैं।
    किशोर लड़कों को सक्षम बनाने के लिए भी योजना: कृष्णा तीरथ ने कहा कि किशोर बच्चियों को सक्षम बनाने के लिए देश में उनके मंत्रालय ने राजीव गांधी के नाम से सबला योजना लागू की है। उसका फायदा भी हो रहा है। अब वे किशोर लड़कों के लिए भी सशक्तीकरण योजना लागू करने जा रही हैं।
    किशोरों का माइंडसैट बदलने की जरूरत: रेप केसेज में कम उम्र के किशोरों की लिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें उनकी मानसिकता को बदलने की जरूरत है। किशोर बच्चों की आयु सीमा तो 18 साल ही रहेगी। बलात्कारियों को फांसी देने के सवाल पर कहा कि दिल्ली के मामले को छोड़ दें, बाकी मामलों में ऐसे अपराधियों को सुधारने की जरूरत है। इस काम में मनोचिकित्सक, एनजीओ आदि का सहयोग लिया जा रहा है।
  • कांग्रेस को चुनौती देने वाले लोकतंत्र के लिए खतरा
    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि जो ताकतें देश में कांग्रेस को चुनौती दे रही हैं, हम मानते हैं कि वे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। चाहे वे जातिवादी ताकतें हों या क्षेत्र वादी। यह चिंतन शिविर 2014 को लोकसभा चुनाव के लिए युद्ध पूर्व होने वाली रणनीति के समान है।
    यहां चिंतन शिविर में आए बहुगुणा ने कहा कि चिंतन शिविर में केंद्र और राज्यों के नेता कई मुद्दों पर विचार करेंगे। जैसे देश और राज्य के सामने मुद्दे क्या हैं? क्या समस्याएं हैं? देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है, महंगाई का मुद्दा है। राजनीति कहां जा रही है। सरकार की उपलब्धियों और कमजोरियों आदि पर मंथन किया जाएगा। राहुल गांधी को पीएम के रूप में प्रोजेक्ट करने के सवाल पर बहुगुणा ने कहा कि वे अभी से ही पार्टी में अग्रिम पंक्ति के नेता हैं।
    वे आगे आकर लीड कर रहे हैं अब हम सभी चाहते हैं कि वे फ्रंट पर आकर नेतृत्व करें। सभी चाहते हैं कि कांग्रेस 2014 का लोकसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़े। एक अन्य सवाल के जवाब में बहुगुणा ने कहा कि पहले हुए चिंतन शिविरों और इस चिंतन शिविर के बीच काफी कुछ बदलाव आया है। इस दौरान देश की इकोनॉमिक पालिसी बदली हैं, गठबंधन का नया कॉन्सेप्ट आया है।
    देश की परिस्थितियां बदली हैं। बाहर से आतंकवाद है और अंदर से नक्सलवाद की समस्या है। इन सभी पर मंथन होगा। गठबंधन सरकार के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो चाहेगी कि जनता उसे स्पष्ट बहुमत दे और वह देश को अच्छा शासन दे। यदि गठबंधन सरकार बनती भी है तो कांग्रेस ने अपनी नीतियों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
  • पार्टी में गुटबाजी को दूर करना चाहिए : वीरभद्र
    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्रसिंह ने स्वीकार किया कि कई राज्यों में पार्टी के अंदर गुटबाजी है। जो पार्टी के लिए ठीक नहीं है, इसे दूर किया जाना चाहिए। चिंतन शिविर में भी इस पर विचार होगा।
    कांग्रेस के चिंतन शिविर में शामिल होने आए वीरभद्रसिंह ने गठबंधन से कांग्रेस को नुकसान होने के सवाल पर कहा कि मैं नहीं समझता कि गठबंधन पार्टी के लिए ठीक नहीं रहा हो, क्योंकि गठबंधन की वजह से ही दो बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी है। गठबंधन की वजह से अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। उन्होंेने कहा कि चिंतन शिविर में महंगाई, भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
  • सिंधिया ने राजस्थान के बिजली प्रबंधन को सराहा
    केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को यहां राजस्थान के बिजली प्रबंधन को सराहा। उन्होंने कहा कि संकट के बावजूद राजस्थान में बिजली की स्थिति बहुत अच्छी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में नए बिजली संयंत्रों और कोल ब्लॉक्स आवंटन को लेकर उनकी यहां के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी कई बार चर्चा हुई है। इस संबंध में गहलोत उनसे मिले थे। उनके आग्रह पर हमने कोल ब्लॉक्स आवंटन के लिए संबंधित मंत्रालय को पत्र भी लिखा है।
    हम चाहते हैं कि राजस्थान में नए बिजली संयंत्र लगें और यह प्रदेश आगे बढ़े। चिंतन शिविर को लेकर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं, हम चाहते हैं कि वे आगे भी हमें लीड करें। शिविर में आम आदमी को राहत पहुंचाने पर चिंतन होगा।
    युवाओं को भी अब अपनी भागीदारी निभानी है, इसी की दिशा और दशा तय होगी।
  • राज्य की नीति बनाने में मदद मिलेगी
    'मुख्यमंत्री राज्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। संगठन की नीतियां राज्य की नीति बनाने में सहायक होती हैं। ऐसे में चिंतन शिविर में जो संगठन की नीतियां बनेंगी, उन्हें हम अपने राज्यों में जाकर लागू करेंगे, ताकि जनता को फायदा मिल सके।'
    - पृथ्वीराज चव्हाण, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
  • चुनौतियों पर मंथन
    'देश के सामने कई चुनौतियां हैं, चाहे वह पाकिस्तान का मामला हो या अन्य। कई प्रकार की समस्याएं हैं। इन समस्याओं-चुनौतियों पर बातचीत के लिए ही यह कांग्रेस ने चिंतन शिविर रखा है। मुद्दों को कैसे सुलझाया जाए, यही शिविर में हो रहा है।'
    - मुरली देवड़ा, पूर्व केंद्रीय मंत्री
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Rahul's face appeared on the stage only
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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