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दूसरा विश्वयुद्ध का दौर, राजस्थान की इस विशाल झील पर उतरते थे एयरक्राफ्ट!

अरविन्द सिंह मेवाड़ | Dec 19, 2012, 02:35 IST

  • पढ़िए, राजस्थान के विकास की कहानी, पूर्व राजघराने के वंशज की जुबानी।
    मुझे याद है। दूसरे विश्वयुद्ध का दौर था। राजसमंद या राजसमुद्र झील में रॉयल एयरफोर्स के सी एयरक्राफ्ट उतरा करते थे। झील विशाल थी। इसीलिए उसे राजसमुद्र कहते थे। और अब देखिए। मार्बल स्लरी और अतिक्रमण ने अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हाल सिर्फ राजसमंद का नहीं, पूरे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का है। बेढंगे विकास ने यह स्थिति पैदा की।
    राजस्थान के विकास पर क्या बोले राजघराने के वंशज, जानिये आगे की स्लाइड्स में>>>
  • दुनिया भर में राजस्थान की पहचान इसकी संस्कृति, परंपराओं और विरासत की वजह से है। राजे-रजवाड़े इसके पोषक हुआ करते थे। पर अब क्या हो रहा है? न वो नृत्य-संगीत रहा और न खानपान। शादियां डिस्को पार्टी बनती जा रही हैं और परंपराएं खत्म। हमारी अब भी यही कोशिश है कि अपनी संस्कृति और विरासत को इतिहास का हिस्सा न बनने दें। लेकिन सच यह भी है कि हमारी सुनता कौन है?

  • दुनिया में मशहूर हुआ राजस्थान
    राजे-रजवाड़ों के बारे में लोग वैसा ही सोचते हैं, जैसा फिल्मों में दिखाया गया। राजघराने का मतलब अजीबोगरीब लाइफ स्टाइल। एक ऐसा शख्स जो महलों में रहता है। जिसे आम लोगों या उनकी दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं। इस राज्य के नेता और ब्यूरोकेट्र्स तक ऐसा ही सोचते हैं। इसके पीछे वजह शायद यह भी है कि हम माफिया की जेब में नहीं बैठते। कुछ लोगों के एजेंडों को पूरा नहीं करते। जरा गौर करिए कि हमने किया क्या है? सिटी पैलेस की वजह से उदयपुर की ब्रांडिंग है।
  • लेक पैलेस बनने के बाद से बड़े होटल समूह आने शुरू हुए। यह हमारी कोशिश थी कि ब्रिटेन की महारानी, ईरान के शाह और मिसेज कैनेडी जैसी हस्तियां उदयपुर आईं। जेम्स बांड सीरीज की ऑक्टोपसी फिल्म यहां बनीं, जिन्होंने सारी दुनिया में उदयपुर, राजस्थान और भारत को मशहूर किया।

  • लिविंग हेरिटेज को दे रहे हैं बढ़ावा
    मेवाड़ और उदयपुर हमेशा सांस्कृतिक विरासत और टूरिज्म को बढ़ावा देने के मामले में राजस्थान को नई दिशा देता रहा है। यूनेस्को जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अन्य प्रबुद्ध के साथ जुड़कर हम लिविंग हेरिटेज को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। लिविंग हेरिटेज यानी जिंदा विरासत। ऐसी संस्कृति जिसमें लोग विरासत सहेजने की प्रवृत्ति को आत्मसात कर लेते हैं।
  • बात चाहे जैसलमेर की हो, जयपुर की या उदयपुर की। भूगोल और जलवायु अलग हो सकते हैं, पर समस्याएं एक जैसी। सरकार को नीति बनाने की जरूरत है। इसमें हमारे अनुभवों का फायदा लिया जाना चाहिए।
    यह जानना चाहिए कि आजादी के वक्त 45 हजार की आबादी वाले उदयपुर में क्यों अब तक एक बाल्टी अतिरिक्त पानी नहीं मुहैया कराया गया? क्यों ऐसी कालोनियां बना दी गईं, जिन्हें डूबने से बचाने के लिए उदयसागर के फैलाव और गहराई को काफी ज्यादा कम कर दिया गया? क्या विकास की यही परिभाषा है?
  • कदम उठाने की जरूरत
    मैंने स्पेन के बार्सिलोना में देखा है। प्राचीन शहर है, लेकिन विकास से जुड़े विभाग लिविंग हेरिटेज पर कुशलता से काम कर रहे हैं। विरासत संरक्षण और विकास साथ-साथ हो रहे हैं। वैज्ञानिक तौर-तरीकों और भविष्य की सोच के साथ। यह काम तभी हो सकता है, जब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से व्यवस्थाएं चलें। नियोजित विकास के लिए कदम उठाने जरूरी हैं। अनियोजित विकास को अब न तो हमारे शहर ढोने की स्थिति में हैं और न यहां की सांस्कृतिक विरासत।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: The second round of the World War, Rajasthan aircraft were descending on the huge lake!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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