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...और इंसानी कोशिशों से टल गया कुदरत का कहर!

Bhaskar News | Dec 11, 2012, 05:25 AM IST

जोधपुर.रेलवे के एक की-मैन ट्रेन के सामने तेजी से दौड़ रहे थे। उन्हें रणकपुर एक्सप्रेस में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने की फिक्र थी। वे जानते थे कि यदि टूटी पटरी के ऊपर से ट्रेन निकली तो बड़ा हादसा हो सकता है। वे हाथ में लाल झंडी लहराने लगे। की-मैन को ट्रेन के सामने आता देख लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए।
ट्रेन टूटी हुई पटरी से कुछ कदम पहले रुक गई। यात्रियों को जब पता लगा कि पटरी टूटी हुई थी और की-मैन ने उनकी जान बचा ली तो उन्होंने राहत की सांस ली। हुआ यूं कि बांद्रा-बीकानेर एक्सप्रेस पाली से जोधपुर आ रही थी। लूणी-केरला सेक्शन में खांडी हॉल्ट स्टेशन के पास पटरी चार इंच टूटी थी।
की-मैन दुर्गाराम मेघवाल व गैंग नंबर एक के की-मैन गोपीराम पेट्रोलिंग कर रहे थे। उन्होंने टूटी पटरी देखी। सामने से ट्रेन आती दिखाई दी। दुर्गाराम उलटे पांव लाल झंडी लेकर ट्रेन के सामने दौड़े। उनका एक ही मकसद था कि किसी तरह ट्रेन टूटी हुई पटरी से पहले रुक जाए।
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Web Title: ... and human efforts averted Fury of nature!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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