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प्रदेश के 10 जिलों के 30 गांवों में हर घर की बेटी के नाम खाता

Bhaskar News Network | Mar 08, 2017, 05:00 IST

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प्रदेश के 10 जिलों के 30 गांवों में हर घर की बेटी के नाम खाता

मनीष व्यास. बीकानेर| राज्यके 10 जिलों के 30 गांवों में ऐसा कोई घर नहीं बचा, जहां 10 साल तक की बेटी का खाता नहीं हो। यहां पर डेढ़ लाख बेटियों के खाते खुलसुखद पहलू ये है कि ये महिलाओं के इनिशिएटिव के कारण खुले। इसका परिणाम आने वाले सालों में बेटियों के समृद्ध होकर सफल महिला बनने के तौर पर आएगा। इसके पीछे बेटियों सपने पूरे करने की सोच है। और इसके पीछे तीन अहम किरदार है। पश्चिम राजस्थान क्षेत्र के डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव, जिनके मन में बेटियों के खाते खोलने की प्रधानमंत्री की सुकन्या योजना को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का ख्याल आया।



उनकी प|ी आकांक्षा यादव, जिन्होंने सरकारी योजना की तरह नहीं एक मिशन के तौर पर ऐसे गांवों को शत-प्रतिशत जोड़ने का आइडिया दिया जिनमें बेटियों के नाम खाते नहीं हैं। तीसरा किरदार हजारों मां है, जिनकी सजगता से बेटियों के खाते खुले। ये सब संभव हुआ बीकानेर के साधासर जैतपुर, जोधपुर के शिकारपुरा, पाली के बांसिया, नोवी, बाड़ा, रोजाला खुर्द, गंगानगर के खोथावाली, बिजयनगर, बिशनपुरा, नागौर के भेड़, बेरवा, पदमपुरा, जाखेड़ा कडु, सिरोही के मोरली आबूरोड के 30 गांवों में। यहां का कोई घर ऐसा नहीं बचा, जिनमें बेटियों के खाते नहीं। खाते में एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम एक हजार और अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक जमा किये जा सकते हैं। वर्तमान में ब्याज दर 8.5 प्रतिशत हैं और जमा धनराशि में आयकर छूट का भी प्रावधान है। उच्चतर शिक्षा और विवाह आदि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसमें से 50 फीसदी राशि बालिका के 18 वर्ष पूरा होने पर निकाली जा सकती है।

थ्री स्टेप में समझिए, कैसे पीएम के विजन को महिलाओं ने साकार किया, 30 गांव ऐसे बना दिए जहां हर बेटी का खाता



1. दो बेटियों के पिता की सोच, पीएम के विजन को नेक्स्ट लेवल पर ले गए

पीएम नरेंद्र मोदी ने करीब ढाई साल पूर्व हरियाणा से बेटियों के लिए खाते खोलने की सुकन्या योजना का आगाज किया था। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने इस योजना को अपने लेवल पर आगे बढ़ाने की सोची। उनके खुद अक्षिता और अपूर्वा दो बेटियां है। दोनों के खाते खुलवाकर उन्होंने सुकन्या योजना का आगाज किया और यहीं से उनके मन में पीएम के विजन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का आइडिया आया। वे हर बेटी काे जोड़ने की सोचने लगे।

2. प|ी ने दिया इनिशिएटिव लेकर ऐसे गांव को समृद्ध बनाओ, जहां बेटियों के खाते नहीं

यादव की प|ी चर्चित महिला ब्लॉगर आकांक्षा यादव ने जब सुकन्या योजना के बारे में सुना तो पति से बात की। कहा कि सरकारी योजना तो करानी है, अपने स्तर पर इनिशिएटिव लेकर ऐसी बेटियों के खाते खुलवाओ, जिनके खाते ही नहीं। बेटी अक्षिता, जो कि भारत की सबसे उम्र की राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता भी है ने पिता से हर बालिका को जोड़ने की बात कही। इस पर यादव ने सुकन्या समृद्धि ग्राम योजना पहली बार शुरू की, जिसे बाद में देश कुछ शहरों ने भी अपनाया।

3. 85 फीसदी खाते खोलने में बेटियों की मां की सजगता, ताकि भविष्य में अच्छी महिला बने

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि सुकन्या समृद्धि ग्राम के तहत महिलाओं ने खूब सजगता दिखाई। प्रदेश के 30 गांवों में 1.5 लाख बेटियों के अकाउंट खुले, इनमें 90 फीसदी खाते में महिलाओं का योगदान रहा। जहां महिला सरपंच हैं, उन्होंने भी सहयोग किया। इतना ही नहीं, कई ऐसे मामले आए जब अपनी बचत के पैसे से बेटी के लिए मां ने खाता खोला। परिवार से विरोध सहना करना पड़ा तो भी किया। आकांक्षा यादव का कहना है कि नवरात्रा में कन्याओं को खाना खिलाने के साथ ही उनके खातों के बारे में सोचे तो कोई बेटी ऐसी नहीं रहेगी जिसका खाता नहीं होगा।

बीकानेर में 11 हजार, पाली में सबसे ज्यादा 22 हजार बेटियों के खाते खुले



जिला गांव अकाउंट

बाड़मेर 1 6543

बीकानेर 2 11307

चूरू 2 8866

झुंझुनूं 6 3264

जोधपुर 1 14221

नागौर 5 13258

पाली 4 22090

सिरोही 2 27464

सीकर 2 16359

गंगानगर 5 16938

कुल 30 150674





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