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शिव ने किया तांडव, विष्णु ने घुमाया चक्र और टुकड़े -टुकड़े हो गया सती का शरीर!

Gagan Gurjar | Feb 18, 2013, 00:49 IST

  • राजस्थान का धर्म और आस्था से बहुत ही गहरा नाता है|यहां कदम-कदम पर देवी-देवताओं के प्राचीन मंदिर या चबूतरे बखूबी देखे जा सकते हैं, साथ ही उन स्थानों पर आस्था के पुजारियों का जमावड़ा देखा जाना भी आम बात है|इसी आस्था का परिणाम ही है कि तीर्थ नगरी पुष्कर और ख्वाजा साहब की दरगाह वाला अजमेर पूरी दुनिया में अपनी एक अमिट छाप बनाए हुए हैं|विश्व प्रसिद्ध इन स्थानों के अतिरिक्त और भी कई ऐसे स्थल हैं जो स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लिए भी धार्मिक दृष्टी से खासा महत्त्व रखते हैं|dainikbhaskar.com अपने पाठकों के लिए लाया है एक सीरीज, जो राजस्थान के ऐसे ही धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी साझा करेगा|'धर्म यात्रा' नाम की इस सीरिज की आज की इस विशेष कड़ी मेंपेश है एक ऐसे स्थल की कहानी जहां 'शक्ति' के शीश की पूजा होती है।
    पढ़िए, आखिर क्यों यहां पूजा जाता है 'शक्ति' का शीश...
    राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को समेटे राजस्थान पर्यटन के साथ-साथ कई प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है।यहां प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक स्थान है सुंधामाता का मंदिर।श्रृद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र यह मंदिर जालोर जिले में जिला मुख्यालय से 105 किमी दूर रानीवाड़ा तहसील में मालवाडा और जसवंतपुरा के बीच स्थित है। नवरात्री में इस मंदिर में देश-भर के श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहता है।अरावली की पहाड़ियों में धरातल से 1220 मी की ऊंचाई पर एक प्राचीन गुफा में माँ शक्ति अघ्टेश्वरी देवी के रूप में विराजमान हैं।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, आखिर क्यों विष्णु को करने पड़े सती के शरीर के टुकड़े>>>
  • माता का मंदिर सुंधा पहाड़ पर स्थित होने के कारण देवी को सुंधामाता के नाम से जाना जाता है।माता के इस मंदिर में सिर्फ देवी के सिर की ही पूजा की जाती है।इस कारण चामुंडा माता के इस धाम को अघ्टेश्वरी देवी के नाम से जाना जाता है।इस सम्बन्ध में एक कथा प्रचलित है।

  • कथा के अनुसार एक समय दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया और उसमे अपने दामाद अर्थात भगवान शंकर को इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,जब माता सती को इस बात की खबर लगी तो वे आगबबुला हो गईं और दक्ष प्रजापति द्वारा किये जा रहे उस यज्ञ की वेदी में कूदकर आत्मदाह कर लिया।

  • वृतांत का पता चलते ही भगवान शिव भी यज्ञ शाला में पहुंच गए और माता सती के जले हुए शरीर को उठाकर तांडव नृत्य करने लगे।

  • भगवान शिव को तांडव करते देख देवता घबरा गए और भगवान विष्णु से जाकर आग्रह किया कि वे शिव के क्रोध को शांत करें अन्यथा महाविनाश हो जाएगा।

  • तब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। कहा जाता है कि जिस-जिस स्थान पर माता के शरीर के अंग गिरे,वहां-वहां उनके शक्ति पीठ स्थापित हो गए।सुंधा पहाड़ पर माता सती का सिर गिरा था जिस कारण यहां अघ्टेश्वरी देवी का शक्तिपीठ स्थापित हुआ।

  • सुंधा माता के ठीक सामने ही एक प्राचीन शिव लिंग भी स्थापित है जिसे भूरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।इस प्रकार यहां आने वाले भक्तों को शक्ति के साथ-साथ शिव कृपा का फल भी प्राप्त होता है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: twisted pieces - pieces of Sati's body!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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