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कम्प्यूटर विज्ञान व्याख्याता भर्ती : आईटी विभाग से आरपीएससी ने मार्गदर्शन मांगा

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:20 AM IST

ड्रॉप आउट बच्चों के लिए अलग से कंडेंस कोर्स

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उदयपुर | राज्यमें अब स्कूल ड्राप अाउट और नेवर स्कूल श्रेणी के बड़े बच्चों के लिए शिक्षा विभाग अलग कोर्स तैयार करवा रहा है। पीछे की कक्षाओं का ज्ञान करवाने के लिए राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी) को कंडेंस कोर्स नाम से पाठ्यक्रम तैयार करवाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका काम अगले माह में शुरू होगा जो जनवरी तक पूरा हो जाएगा।



उदाहरण के तौर परी किताब में शब्द पहचान से लेकर आगे की कक्षाओं का संक्षिप्त कोर्स शामिल किया जाएगा। जुलाई तक सभी विद्यालयों में पुस्तकें जाएगी। पाठ्यपुस्तक लेखन के काम में 30 लेखकों का दल काम में जुटेगा जिसमें सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, कॅालेज स्कूल के शिक्षक सहित अन्य होंगे।

5वीं में लिया प्रवेश तो 1-4 कक्षा तक पढ़ेगा एक साथ

सूत्रों का कहना है कि 10 वर्ष का काेई बच्चा है जिसको पांचवीं कक्षा में प्रवेश दिया है। उसे कक्षा 1-4 तक में जो भी पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है उसका सारांश दिया जाएगा। जैसे अंग्रेजी की पुस्तक में ए,बी, सी, डी (वर्णमाला) भी पढ़ाई जाएगी और पांचवीं कक्षा के स्तर अनुसार पैसेज भी पढ़ाए जाएगे। इसमें कक्षा 2 से 7 तक ही पुस्तकें बनाई जाएगी जिसमें हिंदी, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की पुस्तकें होगी लेकिन संस्कृत की पुस्तकें नहीं लिखी जाएगी। साथ ही बच्चे को प्रवेश कक्षा 2 से 7 तक दिया जाएगा, आठवीं बोर्ड होने के कारण सीधा प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इस कोर्स को पढ़ाने के लिए अध्यापकों का प्रशिक्षण भी करवाया जाएगा।

जिले में 1538 ड्राप आउट बच्चे

निदेशालय द्वारा प्रत्येक वर्ष ड्राप आउट बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए शिक्षा विभाग को लक्ष्य दिया जाता है। उसी लक्ष्य के अनुसार उन बच्चों को विद्यालय में प्रवेश देना होता है। उदयपुर जिले में वर्ष 2015-16 में 2815 का लक्ष्य था जिसमें से 1277 प्रवेश हुए और 1538 ड्राप आउट (जिन्होंने विद्यालय में प्रवेश होने के बाद छोड़ दिया) की श्रेणी में। वहीं 2014-15 में लक्ष्य 1321, प्रवेश 462 ड्राप आउट 859 रहे हैं। 2013-14 में 1284 का लक्ष्य, 550 प्रवेश और 734 ड्राप आउट की श्रेणी में हैं।

नेवर स्कूल श्रेणी के बच्चों के लिए 2004 बाद सर्वे नहीं

जाे बच्चे कभी विद्यालय नहीं गए उनकी गणना के लिए चाइल्ड ब्रेकिंग सिस्टम द्वारा की जाती है लेकिन इसका अंतिम सर्वे वर्ष 2004 में किया गया था। इसके बाद अब तक नहीं किया गया। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि जिले में सैकड़ों बच्चे होंगे जो कभी विद्यालय नहीं गए हैं।

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Web Title: कम्प्यूटर विज्ञान व्याख्याता भर्ती : आईटी विभाग से आरपीएससी ने मार्गदर्शन मांगा
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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