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जयललिता को लेकर चिंता

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:25 AM IST

जयललिता को लेकर चिंता
जयललिता को लेकर चिंता

जयललिताके स्वास्थ्य की हालत को लेकर रहस्य बरकरार है। हुआ क्या है? अब क्या स्थिति है? हर चीज रहस्य के घेरे में है। भर्ती होने के पहले ही दिन राज्यपाल उनका हाल जानने अस्पताल गए। केन्द्र के दो मंत्री भी हो आए हैं। द्रमुक वाले परेशान हैं कि अब कैसी हालत है। अन्नाद्रमुक वाले परेशान हैं कि द्रमुक वाले इतने परेशान क्यों हैं। सूत्रों का कहना है कि जयललिता को एआरडीएस- माने श्वसन प्रणाली की गंभीर समस्या है। और 60 से ज्यादा की उम्र, मधुमेह और रक्तचाप ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

किसानमित्र वरुण गांधी

लोगकहते हैं वरुण फीरोज़ गांधी को पक्का यकीन है कि देश के सबसे .. .. .. बस वो ही हैं। लेकिन उनकी पार्टी को भी (लगभग) पक्का यकीन है कि सबसे .. नहीं तो, कम से बाकी युवा नेताओं में से सबसे .. .. .. बस वो ही हैं। पार्टी वरुण को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहती। उधर वरुण गांधी अपनी जमीन अपने आप तैयार करने में लगे हैं। कमजोर, गरीबी-बेकारी का सामना कर रहे, भूमिहीन, सीमान्त किसान - वरुण इन सबकी जी खोलकर मदद करते हैं। यूपी के 20 जिलों में वरुण गांधी गरीब किसानों की सीधे पैसे देकर मदद करते हैं। संसद से मिलने वाला उनका सारा वेतन इसी पर खर्च होता है।

दलितवोट, पंडित विमर्श

यूपीमें कांग्रेस चाहती क्या है? अपना फायदा या बीजेपी का नुकसान? राहुल गांधी की अब तक की कोशिशों का सबब है कि वो यूपी में कांग्रेस की कीमत पर मायावती के लिए जमीन तैयार करने में लगे हैं। माने किसी तरह बीजेपी हारे। लेकिन कांग्रेस इस सेवा के बदले पुरस्कार भी चाहती है। पुरस्कार माने बीएसपी से गठबंधन और ठीक-ठाक बढ़िया हाल वाली सीटें। एक कांग्रेसी पंडिज्जी एक बीएसपी वाले पंडिज्जी से बातचीत कर रहे हैं। अंतिम फैसला बहनजी ही करेंगी।

गुस्साहैं बड़ी बहनजी

अबबात बड़ी बहनजी, माने दीदी माने ममता बनर्जी की। दीदी के पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव होते थे संजोय मित्रा। दीदी से बनी नहीं, तो केन्द्र सरकार की सेवा में गए और नितिन गडकरी के सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव बन गए। अब दीदी के रिश्ते नितिन गडकरी से भी बिगड़ने शुरू हो गए। दीदी ने केन्द्र सरकार से पश्चिम बंगाल में दो नए बंदरगाह बनाने की मांग की। मंत्रालय ने जवाब दिया कि दो की जरूरत नहीं है, एक बनेगा। दीदी को लगता है कि यह सब संजोय मित्रा का किया कराया है।

जावहारसरकार का इस्तीफा

प्रसारभारती के सीईओ जावहार सरकार ने इस्तीफा दे दिया है। अब उपराष्ट्रपति के विदेश से लौटने पर, 4 नवम्बर को वे पदमुक्त हो जाएंगे। कहा जाता है कि उनका प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश के साथ भारी विवाद हो गया था। और इस बात को लेकर संघ से लेकर अरुण जेटली और वेंकैया नायडू तक सभी नाराज थे। जावहार सरकार ने राष्ट्रपति से मिलकर हस्तक्षेप करने की गुहार की, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। बड़ी बैठकों में इस्तीफे की धमकी देना सरकार का शगल था। आजिज आकर उनसे कह दिया गया कि आपको तो किसी ने रुकने को कहा है और किसी ने जाने को कहा है। कांग्रेस राज में जब मनीष तिवारी मंत्री होते थे, तब भी जावहार सरकार का भारी विवाद हुआ था।

पाकिस्तानके खिलाफ वैश्विक अभियान

नामहै विजय चौथाईवाले। अमेरिका प्रशिक्षित वैज्ञानिक और फिलहाल बीजेपी के विदेश प्रकोष्ठ के प्रमुख। प्रधानमंत्री के और अमित शाह के विश्वस्त। सफलता का भारी-भरकम रिकॉर्ड। बात यह है कि अब चौथाईवाले के नेतृत्व में ओवरसीज फ्रैंड्स ऑफ बीजेपी मोदी सिद्धांत के अनुरूप चलते हुए, दुनियाभर में पाकिस्तान की पोल खोलने का अभियान छेड़ने जा रही है। पहला कार्यक्रम 21 नवम्बर को सिंगापुर में होगा, फिर ईयू के मुख्यालय ब्रुसेल्स में, फिर लंदन में.. और फिर पूरा लंबा कार्यक्रम तैयार है।

असलीवाले प्रशांत किशोर

अंदरकी बात। बिहार विधानसभा चुनाव में नीतिश कुमार की जीत को भले ही प्रशांत किशोर से जोड़कर देखा जाता हो, लेकिन इस जीत के एक अहम सूत्रधार थे आरसीपी सिंह। आरसीपी सिंह बिहार के रहने वाले यूपी कैडर के आईएएस थे, इस्तीफा देकर राजनीति में आए थे। लालू से गठबंधन, साइकिल बांटना और शिक्षा पर जोर देना, शराबबंदी का वादा करना आदि उन्हीं के आइडिए थे। फिलहाल राज्यसभा में हैं और नीतीश कुमार को पीएम बनाने की उधेड़बुन में लगे हैं।

अकेलीबैटिंग

बीसीसीआईपर न्यायपालिका की मार पड़ी हुई है, लेकिन अनुराग ठाकुर यह लड़ाई अकेले लड़ रहे हैं। अरुण जेटली और अमित शाह दोनों क्रिकेट मामलों में जरा भी रुचि नहीं ले रहे हैं। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री ने उनसे क्रिकेट की राजनीति से दूर रहने के लिए कहा है।

खबरोंकी खेती का मंत्रालय

खेतीमंत्रालय चर्चा में आता रहता है। कई कारणों से। बहरहाल मंत्रालय के तहत आने वाले आईसीएआर के क्रॉप साइंस के उप महानिदेशक और पंजीकरण समिति के अध्यक्ष डॉ. जे. एस. संधू अति सक्रिय हैं। एक बार उन्होंने शनिवार को बैठक बुला ली और बाकी सदस्यों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इंदौर की एक कंपनी के पक्ष में फैसला जारी कर दिया। इस मामले में एक और महकमे की भी सक्रिय भूमिका रही है। यह महकमा सत्ता के अंदर का लेकिन सरकार से बाहर का है।

जैसे-तैसेखिंची गाड़ी

बिमस्टेककी बैठक में थोड़ी परेशानी की स्थिति पैदा हुई। दरअसल जितने वीवीआईपी यहां एक साथ थे, उतनी तो बड़ी वाली कारें भी गोवा में नहीं थीं। आनन-फानन में दिल्ली-मुंबई से कारें मंगवाई गईं।

कर्नाटकाएक्सप्रेस!

सीबीआईके अगले निदेशक के लिए चयन समिति का पसंदीदा नाम हो सकता है आर. के. दत्ता। दत्ता 1981 के कर्नाटक कैडर के आईपीएस हैं। अब चयन समिति में प्रधानमंत्री के अलावा एक तो लोकसभा में विपक्ष के नेता होते हैं, और दूसरे भारत के प्रधान न्यायाधीश। मल्लिकार्जुन खडगे खुद कर्नाटक के हैं। और जहां तक प्रधान न्यायाधीश का सवाल है, जस्टिस टी.एस. ठाकुर और अगले प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जे. एस. केहर भी कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। आर. के. दत्ता की कार्यशैली उनके लिए जानी-पहचानी सी है।

कॉलम ऑन | डॉ.भारत अग्रवाल

पॉवरगैलरी

bharat@dbcorp.in

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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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