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चिकित्सा विभाग के पास नहीं जांच के साधन, खुद ही जांच कर खाएं मिठाई

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:30 AM IST

चिकित्सा विभाग के पास नहीं जांच के साधन, खुद ही जांच कर खाएं मिठाई
दीपावलीका त्योहारी सीजन शुरू होने व्राला है। खासतौर पर मिलावटी अभी से सक्रिय हो गए हैं। लेकिन मजे कि बात यह है कि मिलावटियों पर अंकुश लगाने वाले चिकित्सा विभाग के खाद्य सुरक्षा विभाग के पास हाथों-हाथ मिठाई की जांच के लिए कोई साधन नहीं है। ऐसे में उपभोक्ता को ही जागरूक होना होगा। इसके लिए भास्कर ने कुछ एक्सपर्ट से जानकारी जुटाकर पाया कि किस प्रकार प्रारंभिक रूप से किस चीज में आसानी से फर्क किया जा सकता है कि असली है या नकली।

जिले के चिकित्सा विभाग के खाद्य सुरक्षा दल की हालत दयनीय है। यहां पर चल प्रयोगशाला भी बंद है। मिलावटियों पर अंकुश लगाने के लिए केवल दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एक गाड़ी एवं एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। जिले में यह टीम केवल सैंपल लेने का काम कर रही है। इन सैंपलों की रिपोर्ट दीपावली बाद ही आएगी। इसलिए उपभोक्ताओं को खुद को ही सतर्क होना होगा।

ऐसे बनाते हैं सिंथेटिक दूघ

नामछापने की शर्त पर एक सिंथैटिक मावा बनाने वाले ने बताया कि सिंथैटिक मावा बनाने के लिए दो विधियों का प्रयोग किया जाता है। पहली विधि है कि दूध का घटिया क्वालिटी का पाउडर में चिकनाई के लिए रिफाइंड या डालडा मिलाया जाता है। जिससे चिकनाई सके और उसके बाद उसे गाढ़ा करने के लिए अरारोट मिलाया जाता है। वहीं दूसरी विधि में पहले सिंथैटिक दूध तैयार किया जाता है। उसके बाद उसका मावा बनाते हैं। दूध से पूरा घी निकालकर उसमें चिकनाई के लिए रिफाइंड मिलाया जाता है। सीएलआर के लिए यूरिया मिलाया जाता है। सभी का पमरी तरह से मिक्सिंग करने के लिए सेंपू का प्रयोग किया जाता है। जांच में घी आए इसके लिए कई तरह के कैमिकल भी मिलाए जाते हैं। ऐसे दूध को यदि यदि डेयरी पैमाने में जांच करने पर घी और सीएलआर पूरी आती हैं। यह दूध तरह से सिंथैटिक होता है।

जानिए किसमें क्या मिलता, ऐसे कर सकते हैं जांच

मिठाइयां: खोयेमें पानी मिलाकर उबालें। इसमें आयोडीन की 5.7 बूंदें डालें। मिठाई का रंग नीला हो जाए तो समझ लीजिए मिलावट है।

दूध: समतलसाफ सतह पर दूध की बूंद टपकाएं। शुद्ध दूध सीधी पंक्ति की तरह बहेगा। मिलावटी दूध पानी की तरह बहेगा।

घी: हाइड्रोक्लोरिकएसिड 10 सीसी और एक चम्मच चीनी मिलाएं। मिश्रण में 10 सीसी घी मिलाकर हिलाएं। मिलावट होगी तो मिश्रण लाल हो जाएगा।

चीनी: चीनीकी कुछ मात्रा लेकर कांच के साफ गिलास में पानी लेकर घोल लें। कुछ समय के लिए उसे स्थिर रहने दें। इसके बाद गिलास की तली में चॉक बैठ जाएगी।

इन तरीकों से भी कर सकते है असली-नकली में फर्क

}मिठाई को हाथ में लेने पर उसका रंग हाथ पर लग रहा है तो इसका मतलब है कि मिठाई नकली है।

} मिलावटी मावे को हाथ पर रगड़ें। ऐसा करने पर अगर उसमें चिकनाहट नहीं मिलती है तो वह नकली है।

} मिठाई पर लगाए जाने वाला चांदी का वर्क अगर हाथ पर रंग छोड़ता है तो इसका अर्थ है कि वो नकली है।

पिछले साल लिए 80 नमूने भी फेल

खाद्यनिरीक्षक ने बताया कि गत वर्ष दल ने 250 सैंपल लिए थे। रिपोर्ट के अनुसार 80 सैंपल फेल हुए हैं। जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।



^गुरुवार से मिलावट के खिलाफ विभाग की ओर से अभियान शुरू किया जाएगा। जिसमें सैंपल लिए जाएंगे। यह सही है कि हाथों-हाथ असली एवं नकली में फर्क करने के लिए कोई साधन नहीं है। सैंपल ही लिए जाते हैं। जिन्हें लैब में भेजा जाएगा। इसके बाद ही रिपोर्ट मिलेगी। महेषशर्मा, खाद्य निरीक्षक

धौलपुर. एक दुकान में रखा मावा।

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Web Title: चिकित्सा विभाग के पास नहीं जांच के साधन, खुद ही जांच कर खाएं मिठाई
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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