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ऐतिहासिक झील समेत कई पर्यटक स्थल फिर भी प्रचार के अभाव में 12 किमी दूर से ही लौट जाते हैं 2 लाख पर्यटक

Bhaskar News Network | Mar 21, 2017, 05:50 IST

ऐतिहासिक झील समेत कई पर्यटक स्थल फिर भी प्रचार के अभाव में 12 किमी दूर से ही लौट जाते हैं 2 लाख पर्यटक
कैसे बढ़ें पर्यटक

शहरको छूकर गुजरने वाले दोनों फोरलेन पर संकेतक बोर्ड तक नहीं

नाथद्वारासे सिर्फ 12 किमी दूर जिला मुख्यालय पर ऐतिहासिक राजसमंद झील, नौ चौकी पाल सहित पुष्टिमार्गीय मत की तीसरी पीठ का द्वारकाधीश मंदिर होने के बावजूद पर्यटकों को आकर्षित करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण नाथद्वारा और कुंभलगढ़ दुर्ग पर आकर भी हजारों पर्यटक वहीं से निकल जाते हैं। पर्यटन विभाग और नगर परिषद के स्तर पर भी पर्यटकों को बढ़ाने पर काम नहीं किया जा रहा है।

गोमती-उदयपुर और राजसमंद-भीलवाड़ा फोरलेन राजसमंद शहर को छूते हुए निकल रहे हैं, लेकिन फोरलेन पर कहीं भी राजसमंद की ऐतिहासिक झील, द्वारकाधीश मंदिर सहित दूसरे पर्यटक स्थलों का संकेतक बोर्ड तक नहीं है। ऐसे में बाहर से आने वाले कई पर्यटक राजसमंद तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसका असर यहां के पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि राजसमंद शहर के प्रमुख पर्यटक स्थलों का प्रचार-प्रसार किया जाए तो यहां भी नाथद्वारा और उदयपुर की तरह सैलानियों को बढ़ाया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

{अभी यह है स्थिति

वर्तमानमें जयपुर से उदयपुर आने वाले पर्यटक उदयपुर-गोमती फोरलेन होते हुए देवगढ़, भीम, ब्यावर वाले रूट से निकलते हैं। पूरे फोरलेन पर राजसमंद जिले के प्रमुख मंदिरों द्वारिकाधीश, श्रीनाथजी, चारभुजानाथ, कुंभलगढ़ दुर्ग, हल्दीघाटी, नौचौकी पाल सहित प्रमुख स्थलों के बारे में जानकारी वाले होर्डिंग्स नहीं है।

{नाथद्वारा, कुंभलगढ़, हल्दीघाटी : महीने में करीब सवा लाख पर्यटक आते हैं।

{राजसमंद में द्वारकाधीश नौ चौकी की पाल : महीने भर में सिर्फ 25 हजार पर्यटक ही पहुंचते हैं।

{श्रीनाथजी में प्रतिदिन औसतन : तीन हजार गुजराती वैष्णव आते हैं।

{कुंभलगढ़ में प्रतिदिन : 500 पर्यटक आते हैं। महीने में औसतन 20 हजार पर्यटक आते हैं।

{राजसमंद में द्वारकाधीश मंदिर : प्रतिदिन 60 से 80 दर्शनार्थी बाहर से आते हैं। महीने में औसतन तीन हजार दर्शनार्थी आते हैं।

फोरलेन पर बोर्ड लगाने के प्रस्ताव भेज रखे हैं

^जिलापर्यटन समिति की बैठक में प्रस्ताव लेकर नेशनल हाइवे को भेज रखे हैं। जगह-जगह पर्यटन स्थलों के साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। फोरलेन कंपनी को भी पत्र भेजकर साइन बोर्ड लगाने को कहेंगे। सुमितासरोच, उप निदेशक, पर्यटन विभाग उदयपुर

परिषद दाेनों फोरलेन पर संकेतक बोर्ड लगाएगी

^नगरपरिषद दोनों फोरलेन पर बोर्ड लगाएगी। इसके वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं। जल्द ही फोरलेन पर चौराहों के पास बोर्ड लगाए जाएंगे। सुरेशपालीवाल, सभापति नगर परिषद

पर्यटकों को आकर्षित करने पर ध्यान देना होगा

रास्तादिखाने वाले नक्शे भी लगाने चाहिए। नगर परिषद ने हालही में 1 अरब से ज्यादा का बजट पारित किया है। स्थानीय परिषद को पर्यटकों को आकर्षित करने वाले कामों पर ध्यान देना चाहिए। नीलेशपालीवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता

द्वारकाधीश मंदिर की परिक्रमा को मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर विकसित करें

फोरलेनपर राजसमंद शहर से 10-15 किमी पहले और जगह-जगह डायवर्जन वाली जगहों पर श्रीनाथजी मंदिर, प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर, चारभुजानाथ, राजसमंद झील, नौचौकी पाल, विश्व धरोहर राज प्रशस्ति, हल्दीघाटी, कुंभलगढ़ दुर्ग सहित प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों की विस्तृत जानकारी वाले होर्डिंग्स और चित्र सहित सूचना पट्ट लगाने की जरूरत है। स्थानीय संस्कृति की झलक जानकारी वाले प्रजेंटेशन एलईडी लगानी चाहिए। प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर मार्ग परिक्रमा को मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर विकसित करना होगा। नौचौकी पाल पर राज प्रशस्ति लेखों का हिंदी अनुवाद कर आकर्षक डिसप्ले लगाने चाहिए। पर्यटन विभाग को शहर के आसपास पधारो म्हारे देश जैसे स्लोगन वाले बोर्ड लगाने चाहिए। ताकि फोरलेन से गुजरने वाले पर्यटक शहर की तरफ आकर्षित हो। डॉ.राकेश तैलंग, साहित्यकार और शिक्षाविद

{राजनगर से सेवाली रास्ते की चौड़ाई बढे

राजनगरसे फोरलेन सेवाली वाले मार्ग से प्रसिद्ध नौचौकी पाल काफी पास है, लेकिन फोरलेन से सेवाली होते हुए नौचौकी पाल को जोड़ने वाला मार्ग संकरा है। जबकि इस मार्ग से राजसमंद झील का नजारा देखने को मिलता है। इस मार्ग की चौड़ाई बढ़ाई जाए और इस दीवारों पर स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाने वाली चित्रकारी हो तो सैलानी आकर्षित हो सकते हैं।

{फोरलेनपर होर्डिंग लगे

शहरवासियोंका कहना है कि उदयपुर-गोमती और राजसमंद-भीलवाड़ा फोरलेन पर राजसमंद के धार्मिक, ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी वाले चित्रात्मक सूचनात्मक होर्डिंग्स लगाने की जरूरत है।

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