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धानमंडी को हाेती है लाखों की आय, फिर भी हाल- बदहाल

Bhaskar News Network | Mar 21, 2017, 06:25 IST

जाखड़ांवाली| यहांधानमंडी से लाखों रुपए की आय होती है मगर मंडी व्यवस्था सुधार पर खर्च पर ध्यान नहीं दिया जाता। गेहूं खरीद के बाद कृषि उपज मंडी समिति पीलीबंगा धानमंडी प्रशासन लाखों का टैक्स कमाकर विकास कार्य पर ध्यान नहीं दे रही। इस बार गेहूं की खरीद एक अप्रैल से होनी है लेकिन धानमंडी में गेट, पिड़, कैंटीन, सड़कें, शौचालय बदहाल पड़े हैं। मंडी में कैंटीन हर साल ठेके पर देते हैं। उसके शट्टर तक टूटे पड़े हैं। धानमंडी का मुख्य द्वार रस्सी से बांधकर झाड़ झंखाड़ लगाकर रोक रखा है। पिड़ एवं सड़कें जगह जगह से टूटी हुई हैं। इससे किसानों को गेहूं खराब होता है। पीलीबंगा, रावतसर, सूरतगढ़ तीनों तहसीलों के बीचो-बीच यह एकमात्र मंडी है। इससे यहां भीड़ लगी रहती है। इस धानमंडी में भैरूसरी, जाखड़ांवाली, 18 एसपीडी, बड़ोपल, मानकथेड़ी, दौलतांवाली, चौहिलांवाली, ठेठार, अराईयांवाली आदि ग्राम पंचायतों से किसान फसल बेचने आते हैं।

गोदामका उपयोग नहीं होने से होता है लाखों का नुकसान: धानमंडीमें जब मंडी बनी तब एक बड़ा गोदाम जो एक हजार मिट्रिक टन का बनाया है। उसमें एक बार भी गेहूं का भंडारण नहीं किया जो बदहाल हो गया है। इससे दो वर्ष पूर्व दोबारा तैयार करवाकर सरकार के लाखों रुपए लगा दिए मगर पिछले दो सालों में भी यहां भंडारण नहीं किया जा रहा है। इससे यहां का गेहूं परिवहन कर सूरतगढ़, हनुमानगढ़, चूरू तक गोदामों में भेजा जाता है। इससे सरकार को दोहरा नुकसान हुआ है। एक तो गोदाम रिपेयरिंग पर लगा पैसा बेकार एवं गोदाम होने के बावजूद परिवहन के लिए ठेकेदार को लाखों का भुगतान किया जाता है। इस संबंध में पीलीबंगा मंडी समिति सचिव सुरेंद्र कैथ ने बताया कि प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज रखा है। बजट मिलते ही धानमंडी में काम कराया जाएगा।

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Web Title: धानमंडी को हाेती है लाखों की आय, फिर भी हाल- बदहाल
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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