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25 दिन में 50 नंदियों ने तोड़ा दम, चारे के लिए अधिकारी शहर से जुटा रहे चंदा

Bhaskar News Network | Dec 02, 2016, 07:05 IST

  • उपखंडक्षेत्र के गोलासन गांव स्थित हनुमान महावीर नंदीशाला की चाबी 6 नवंबर को पथमेड़ा ट्रस्ट की ओर से प्रशासन को सौंपने के बाद से अब 25 दिन में 50 नंदियों की मौत हो चुकी है। हैरत की बात है कि इसके बावजूद प्रशासन नंदीशाला के प्रशासन लेकर कोई पहल नहीं कर रहा है। इधर, नंदीशाला में पल रहे 10 हजार से ज्यादा नंदियों के लिए प्रशासनिक अधिकारी सारे सरकारी काम छोड़ नंदियों के चारेे-पानी की व्यवस्था के लिए चंदा जुटाने में लगे हैं। पिछले दो दिनों से नंदीशाला में चारे की किल्लत बनी हुई है। इसको लेकर एसडीएम हनुमानसिंह तहसीलदार प्रहलादसिंह भाटी सहित कई अधिकारी भामाशाहों से मिलकर नंदियों के चारे के लिए गुरुवार को शहर के निजी अस्पतालों में पहुंचे तथा चंदा जुटाने के बाद नंदीशाला में चारे के ट्रक खाली करवाए। इधर, नंदीशाला की व्यवस्था से परेशान प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि चारे के लिए उनके पास पैसे नहीं है, ऐसे में भामाशाह से आर्थिक सहयोग मिलने पर ही नंदीशाला में चारा खाली हो पाता है। दूसरी तरफ सरकार की ओर से किसी तरह के निर्देश नहीं मिलने से चारे के अभाव में नंदीशाला मेें भूख-प्यास से नंदी लगातार बीमार होते जा रहे हैं। शेष|पेज13

    निजीअस्पतालों से एकत्रित किया 3 लाख का चंदा : तहसीलदारप्रहलादसिंह भाटी ने गुरुवार को सांचौर स्थित विभिन्न निजी अस्पतालों में जाकर डॉक्टरों से चारे के लिए चंदा देने का आग्रह किया। इस पर डॉक्टरों ने चारे के लिए तीन लाख रुपए उन्हें दिए। तहसीलदार ने बताया कि चारे के लिए मनमोहन हॉस्पिटल सांचौर हॉस्पिटल से 51-51 हजार रुपए, बीलाल हॉस्पिटल से 50 हजार, तलेसरा हॉस्पिटल से 25 हजार, राधेश्याम वैष्णव, सत्यपाल हॉस्पिटल ममता हॉस्पिटल से 21- 21 हजार, डॉ. नरसीराम देवासी, डॉ. उतम पुरोहित, डॉ. मनोज गंगवाणी डॉ. सुभाष सैनी ने 11-11 हजार डॉ. शिशुपाल भट्टड़ ने चारे के लिए 5100 रुपए तहसीलदार को दिए।

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    इनकेअलावा भामाशाह संपतराज बुरड़ ने दो ट्रक चारा भेजने की स्वीकृति दी। इस दौरान तहसीलदार के साथ ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. विभाराम चौधरी, पंचायत समिति सदस्य हरिसिंह राव, मानव सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष गणपत पुरोहित जगदीश मालवीय ने भी शहरवासियों से आग्रह कर चंदा जुटाया।

    ^नंदीशाला में चारे का संकट है। इसके लिए समाजसेवी ट्रस्ट भामाशाहों से मिलकर चारा एकत्रित कर रहे हैं। बीमार नंदियों के उपचार के लिए 1 पशु चिकित्सक 2 कंपाउंडर नियुक्त किए हैं। अब तक 50 नंदियों की मौत हो चुकी है। -प्रहलादसिंहभाटी, तहसीलदार, सांचौर



    चारे का संकट है, अब तक 50 नंदी की हो चुकी है मौत

    बीमार स्वस्थ नंदी एक ही बाड़े में

    नंदीशालामें पल रहे नंदियों की प्रशासन उचित देखभाल नहीं कर पा रहा है। यहां कमजोर स्वस्थ नंदी एक साथ ही बांध रखे हैं जिससे कमजोर नंदियों की मौत होती जा रही है। पथमेड़ा ट्रस्ट की ओर से कमजोर नंदियों को अलग-अलग बाड़ों में रखा जाता था। बाड़े में चारा डालने पर स्वस्थ नंदी चारे के लिए लपकती है तो ऐसे में कमजोर नंदी उनके पैरों में कुचल कर घायल हो रहे हैं। दूसरी ओर कमजोर नंदियों को स्वस्थ नंदी चारा भी नहीं खाने देते जिससे भूख के कारण उनकी मौत हो रही है।

    सांचौर. गोलासन नंदीशाला में भूखे नंदी चारे के इंतजार में एक जगह हुए इकट्ठे।

    भगवान भराेसे है हजारों नंदी

    गोलासनस्थित देश की सबसे बड़ी नंदीशाला में पल रहे नंदी अब भगवान भरोसे ही हैं। प्रशासनिक अधिकारी चाहकर भी नंदियों के लिए चारे-पानी का पर्याप्त इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।

    ग्रामीणभी जिद पर अड़े

    गोलासनके ग्रामीण भी नंदीशाला को गोचर भूमि पर होना बताकर इसे हटाने की मांग पर अड़े हैं। इसके चलते प्रशासन के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।

    सरकारभी नहीं कर रही पहल

    संचालनको लेकर 25 दिन बाद भी सरकार की आेर से भी काेई पहल नहीं की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इस मामले को लेकर सरकार को अवगत करा दिया है, जबकि इतने दिन बाद भी इसे लेकर कोई हल नहीं निकाला जा रहा है।

    पहले हर रोज आता था 5 लाख का चारा, अब आधे नंदी का ही भर रहा है पेट

    प्रशासनकी ओर से नंदीशाला संभालने के बाद 25 दिनों में 75 लाख रुपए का चारा लाया गया है। इससे पहले पथमेड़ा ट्रस्ट की ओर से नंदीशाला का संचालन किया जा रहा था। इसके लिए ट्रस्टियों ने बताया था कि नंदीशाला में रोजाना 5 लाख रुपए का चारा रहा था। यानि, प्रशासन की ओर से रोजाना सिर्फ 3 लाख रुपए के चारे की ही व्यवस्था हो पा रही है। इतने चारे से आधे नंदी ही अपना पेट भर पा रहे हैं, जबकि बाकी नंदी बिना चारे-पानी के ही दिन निकाल रहे हैं।

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