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जनाना अस्पताल में हुई पानी की किल्लत, कलेक्टर ने दी स्थिति सुधारने की हिदायत

Bhaskar News Network | Dec 02, 2016, 07:30 AM IST

आधी रात को पानी खत्म होने से प्रसूताओं को झेलनी पड़ी परेशानी

भास्करन्यूज | सिरोही

करीबदो करोड़ की लागत और तमाम सुविधाओं वाले जनाना अस्पताल के बावजूद यहां अव्यवस्था का आलम है। यहां तो आरओ प्लांट और ही टॉयलेट में पानी नहीं आता है। परिजन पीने का पानी तो बाहर से लाते हैं, लेकिन टॉयलेट में पानी नहीं होने से प्रसूताओं को परेशानी हो रही है। बुधवार रात करीब 2 बजे टॉयलेट का पानी खत्म हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन सवेरे तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। गुरुवार सवेरे जनाना अस्पताल परिसर स्थित नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर पर रैली को हरी झंडी दिखाने पहुंचे कलेक्टर अभिमन्यु कुमार को लोगों ने शिकायत की। कलेक्टर ने अस्पताल का निरीक्षण किया और अव्यवस्थाओं को देखकर नाराज हुए।

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उन्होंनेअस्पताल प्रशासन को चेताया कि आज के बाद ऐसी समस्या आई तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना। कलेक्टर ने एक-एक वार्ड, आरओ प्लांट और टॉयलेट देखें, जहां पानी नहीं रहा था। धर्मशाला का भी निरीक्षण किया। धर्मशाला संचालक को कहा कि कोई भी व्यक्ति रात को खुले में नहीं सोना चाहिए।

सीजेरियन डिलेवरी के बाद पार करनी पड़ती है सड़क

{जनाना अस्पताल में सभी सुविधाएं होने के बावजूद क्यों नहीं होते ऑपरेशन, इस लापरवाही के कारण प्रसुताओं को गुजरना पड़ता है प्रसव से भी बड़ी पीड़ा से

{ जिला मुख्यालय पर अलग से बना है जनाना अस्पताल, ऑपरेशन थियेटर समेत अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध है इस अस्पताल में

{ इसके बावजूद सीजेरियन डिलेवरी समेत महिलाओं के अन्य ऑपरेशन होते हैं 200 मीटर दूर सड़क के पार जनरल अस्पताल में

जानिए, क्यों हुए ऐसे हालात

{जिला अस्पताल में पीएमओ का पद लगातार 10 माह से खाली है। इसका चार्ज चिकित्सा विभाग ने सीएमएचओ को ही दे रखा है। ऐसे में कामकाज में भारी परेशानी रही है।

{ अन्य अस्पतालों से जिला अस्पताल की विंग ही अलग है। जिला अस्पताल की मॉनिटरिंग सीधे जॉइंट ऑफिस से होती है। सरकार ने जिला अस्पताल की मॉनिटरिंग के लिए अलग से पीएमओ का पद स्वीकृत कर रखा है।

{ जिला अस्पताल में ट्रोमा सेंटर, बर्न यूनिट, आईसीयू, मातृ शिशु कल्याण केंद्र समेत कई सुविधाएं उपलब्ध है। पहली बार 30 से अधिक डॉक्टर्स कार्यरत है। लेकिन, पीएमओ नहीं होने से अक्सर समस्याएं खड़ी होती हैं।

10 माह से पीएमओ ही नहीं

करीब50 करोड़ के अत्याधुनिक संसाधनों और 200 बैड क्षमता वाले जिला अस्पताल में पिछले 10 माह से पीएमओ नहीं है। अन्य डॉक्टर्स की कमी झेल रहे इस अस्पताल में सरकार पीएमओ तक नहीं लगा पा रही है। सरकार ने इसका प्रभार सीएमएचओ को दे रखा है, लेकिन उनके पास पहले से ही जिले के 252 अस्पतालों का प्रभार है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी करीब 16 योजनाओं कामकाज भी वे ही देखते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल का कामकाज भी उन्हें ही देने से पूरे जिले के अस्पतालों की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी

{जिला अस्पताल में पड़ी करीब 6.50 लाख रुपए की सोनोग्राफी मशीन पिछले दो साल से कमरे में बंद है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है,

{ सोनोग्राफी बंद होने से सबसे बड़ी परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। उन्होंने बार-बार दो-दो अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

{ पहले वे नियमित जांच के लिए सरकारी अस्पताल आती हैं। जहां जरुरी होने पर डॉक्टर उन्हें सोनोग्राफी लिखकर देते हैं।

{ सरकारी अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने से उन्हें इसके लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है। शहर में यह सुविधा तीन अस्पतालों में है। जहां भीड़ होने से उन्हें कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।

सिरोही. अव्यवस्था से नाराज कलेक्टर ने जिम्मेदारों को फटकार लगाई।

सिरोही. पानी की सुविधा नहीं होने से मरीजों के परिजनों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।

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Web Title: जनाना अस्पताल में हुई पानी की किल्लत, कलेक्टर ने दी स्थिति सुधारने की हिदायत
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