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बिना आकांक्षा के प्रभु का भजन ही भक्ति

Bhaskar News Network | Apr 21, 2017, 07:40 IST

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टोडाभीम| सारीसृष्टी में मानव जीवन व्यापार बन गया है। ईश्वर की भक्ति तथा भजन भी कुछ ना कुछ पाने के लिए किए जा रहे हैं। बिना किसी आकांक्षा के ईश्वर का भजन करना ही भक्ति है और इससे जीवन के सभी लोक सुधर सकते है। यह बात बुधवार को पाडला टूडावली में भरोसी गुर्जर के निवास पर आयोजित भागवत कथा के दौरान साध्वी प्रज्ञादीदी ने बताई। सुख, शक्ति समय का आधार सत्य होता है, क्याकि सच्चाई की ईश्वर का दूसरा रूप होती है।

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Web Title: बिना आकांक्षा के प्रभु का भजन ही भक्ति
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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