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यह है दुनिया का एकमात्र किला, जहां 400 घरों की बस्ती अभी भी है आबाद

bhaskar news | Mar 23, 2017, 16:19 IST

जैसलमेर का सोनार किला त्रिकुटा पर्वत पर बना है।

ऑटोमेशन डेस्क.राजस्थान का यह किला दुनिया में अपनी खासियत के कारण अलग पहचान रखता है। राज्य के मुख्य किलों में शुमार जैसलमेर का सोनार दुर्ग विश्व का एकमात्र आवासीय किला है। इसमें आज भी करीब 400 घरों में 1200 लोगों की आबादी रहती है। आगे लगभग 900 साल पुराने किले की ऐसी है खासियत ...
विश्वधरोहर घोषित यह 'सोनार किला' या 'स्वर्ण किले' के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि सूर्यास्त के समय यह पीले बलुआ पत्थर का किला सोने की तरह चमकता है। किले का निर्माण राजपूत राजा रावल जैसल ने 1156 में करवाया था। इसमें तीन स्तरीय दीवारों से मजबूत किलेबंदी की गई थी। जैसलमेर किला थार मरुस्थल के त्रिकुटा पर्वत पर बना है। यहां कई इतिहासिक लड़ाईयां भी हुई हैं। 13 वीं शताब्दी में इस किले पर अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया और 9 वर्ष तक किले में कब्जा रखा। किले में खिलजी का कब्जा होने पर राजपूत महिलाओं ने जौहर किया था।
दूसरा हमला मुगल सम्राट हुमायूं ने 1541 में इस किले पर हमला किया था। इसके बाद मुगलों के साथ संबंध सुधारने के लिए रावल ने 1570 में अकबर के साथ अपनी बेटी की शादी कर दी। किले पर 1762 तक मुगलों का कब्जा रहा। इसके बाद महारावल मूलराज ने किले पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद मूलराज और अंग्रेजों के बीच संधि हो गई और उसका कब्जा किले पर बना रहा। 1820 में मूलराज की मौत के बाद पोते गज सिंह के हाथों यहां का शासन आ गया।

यह किला थार के रेगिस्तानी क्षेत्र की त्रिकुरा नाम की पहाड़ी पर बना है। यह किला पीले पत्थरों से बने होने के कारण दूर से ही सोने जैसी आभा देता है।

अपनी इस खासियत के कारण किले का नाम सोनार पड़ा है। रात में जब किले में फ्लड लाइट्स की रोशनी पड़ती है तो एक अनोखी छवि दिखाई देती है। जैसलमेर का सोनार दुर्ग पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। सोनार दुर्ग की वजह से ही जैसलमेर की पहचान स्वर्णनगरी के रूप में विख्यात है। रात में किले की आकर्षक छवि देखने के लिए साल भर देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ रहती है।
यह किला एक 30 फुट ऊंची दीवार से घिरा हुआ है। यह एक विशाल 99 बुर्जों वाला किला है। वर्तमान में, यह शहर की आबादी के एक चौथाई के लिए एक आवासीय स्थान है। किला परिसर में कई कुएं हैं, जो यहाँ के निवासियों के लिए पानी का नियमित स्रोत हैं। किला राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली का आदर्श संलयन दर्शाता है।

किले में भी अखाई पोल, हवा पोल, सूरज पोल और गणेश पोल नाम के द्वार हैं। इनमें अखाई पोल या प्रथम द्वार अपनी शानदार स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रवेश द्वार को 1156 में बनाया गया था। शाही परिवारों और विशेष आगंतुकों द्वारा यही प्रवेश द्वार उपयोग किया जाता था।
1500 फीट लंबाई
यह किला 1500 फीट (460 मी.) लंबा और 750 फीट (230 मी.) चौड़ा और 250 फीट (76 मी.) ऊंचे पर्वत पर बना हुआ है। किले का तहखाना 15 फीट लंबा है। किले में कुल चार प्रवेश द्वार है, जिनमे से एक द्वार पर तोपे भी लगी हुई है।

व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी हवेलियाँ भी बनवायी है. जिनमे से कुछ हवेलियाँ तो एक दशक से भी ज्यादा पुरानी है. जैसलमेर शहर में पीले पत्थरो से बनी ऐसी कई विशाल और सुंदर हवेलियां हैं।
किले में एक शानदार जलनिकासी का सिस्टम भी है, जो बारिश के पानी को आसानी से चारो दिशाओ में किले से दूर ले जाता है।
आगे की स्लाइड्स में विश्व धरोहर घोषित सोनार फोर्ट की फोटोज...
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Web Title: Amazing Sonar fort of Jaisalmer where people still live
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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