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11 साल की 'दामिनी' का दर्द, सुनाते हुए झलक आए मासूम के आंसू!

यास्मीन सिद्दीकी | Jan 17, 2013, 03:57 IST

  • जयपुर.ड्रिप के जरिए ग्लूकोज तो कतरा-कतरा जिस्म में आ रहा है मगर हलक सूखा है। कई दिनों से पानी नहीं पीया। थक चुकी हूं हॉस्पिटल के बेड पर लेटे-लेटे। मेरी उम्र के बच्चे तो इंजेक्शन से भी डरते हैं और मैं हूं कि 11 ऑपरेशन की चुभन झेल चुकी हूं।
    दर्द बयां करती ये मासूम सीकर की दामिनी है। साढ़े चार महीने पहले कुछ हैवानों की दरिंदगी का शिकार हुई 11 साल की मासूम हॉस्पिटल की चारदीवारी में कैद होकर रह गई है। शनिवार को मेजर ऑपरेशन हुआ था। कहा गया था ये आखिरी होगा पर ना जाने क्या गड़बड़ हो गई कि मंगलवार को फिर से ऑपरेशन करना पड़ा। बताते हुए दर्द आंखों से छलक उठा।
    आंसू पोंछे और फिर से कहने लगी-पता नहीं मैं ठीक हो पाऊंगी भी या नहीं। मैंने मां को कह दिया है-अगर मैं मर गई तो भी मेरे गुनहगारों को फांसी दिलवाना। छूटने मत देना उन दरिंदों को।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कैसे बयां किया इस दामिनी ने अपना दर्द>>>
  • सहेलियां पूछेंगी तो क्या जवाब दूंगी
    कोई बात भी करता है तो डर लगने लगता है। सहेलियों के सवालों का क्या जवाब दूंगी। मैं अस्पताल में इतने दिन क्यों रही। क्या हुआ था तुझे? गुनहगार तो कोई और है लेकिन सजा मुझे भुगतनी पड़ रही है। इस हादसे की वजह से मेरा बचपन मुझसे छिन रहा है। मासूम का कहना है कि उसे रंगीन टीवी पर कार्टून देखना पसंद है और छोटा भीम पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर है। उनके घर रंगीन टीवी नहीं है। ऐसे में अपनी बहन के घर जाकर कार्टून देखकर आती थी। किसी के घर जाना तो दूर, पिछले साढ़े चार महीने से अपने घर ही नहीं गई।
  • पुलिस बनूंगी, सजा दूंगी दरिंदों को
    हादसा होने के बाद तो मुझे समझ में ही नहीं आया कि ये क्या हुआ? जख्म बहुत गहरे हैं, शरीर और जेहन दोनों के। ये डरावना सपना कभी भूल नहीं सकती। अब तो मेरा एक ही मकसद है कि दोषियों को फांसी मिले। मासूम अक्सर डॉक्टरों से कहती है-मैं जल्दी ठीक होना चाहती हूं, स्कूल जाना चाहती हूं। मैं पुलिस बनुंगी। बुरा करने वाले ऐसे लड़कों को मैं सजा दूंगी।
  • आखिरी ऑपरेशन पर खुशी, मेहंदी रचाई
    बहन ने बताया कि उसने शनिवार को आखिरी ऑपरेशन की बात सुनी तो आंखों में चमक साफ दिखने लगी। मुझसे कहने लगी-दीदी, हाथों पर मेहंदी रचा दो। मेहंदी लगी। रंग भी बहुत गहरा चढ़ा मगर एक और ऑपरेशन का सुना तो खुशी काफूर हो गई। फिर वही चुभन। डरी बच्ची ऑपरेशन का सोच कर ही रोने लगती है। वो अब और मौन रहने लगी है। शायद सोचती है-आखिर कब आजादी मिलेगी दर्द की इन बेड़ियों से।
  • एफएसएल रिपोर्ट के बिना कैसे तय हो दुष्कर्मियों को सजा
    दिल्ली गैंग रेप के बाद दुष्कर्म के मामलों में जल्द सुनवाई और आरोपियों को सख्त सजा की मांग पूरा देश कर रहा है। ..और राजस्थान में न्याय की राह तकते 2200 के करीब मामले महज इसलिए अटके हैं कि एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री) की रिपोर्ट आना बाकी है। प्रदेश के पांच संभागों में चल रही प्रयोगशालाओं के बावजूद दुष्कर्म के मामलों में जांच करने वाली जैविक ब्रांच सिर्फ जयपुर व कोटा में ही है।
    हैरानी की बात है कि अभी इन जैविक ब्रांच में साल 2011 के मामलों में लिए गए नमूनों की भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में 2012 के मामलों की तो जांच अभी शुरू होनी बाकी है।
  • बीकानेर, जोधपुर व उदयपुर संभाग में एफएसएल के 19 जिले हैं। वर्ष 2011 में इन संभागों से लगभग 800 केस तथा 2012 में 950 केस में सैंपल जयपुर में जांच के लिए भेजे गए। इसके अलावा जयपुर संभाग से पिछले दो वर्षो में करीब 18 सौ से ज्यादा केसों में सैंपल जांच के लिए आए। इनमें करीब 2200 केस अब भी पेंडिंग हैं।

  • सरकार ने जयपुर, बीकानेर, कोटा, जोधपुर व उदयपुर संभागों में प्रयोगशालाएं बनाई लेकिन जैविक शाखा जयपुर व कोटा में ही खोली गई है। शेष तीन संभागों में 19 जिले आते हैं। तीनों संभागों की रिपोर्ट भी जयपुर आने के कारण पेंडिंग मामलों का दबाव बढ़ रहा है। गंभीर बात यह है कि एफएसएल की आरपीए परिसर में स्थित जैविक ब्रांच में सिर्फ एक माइक्रोस्कोप है।
    जयपुर में एक अतिरिक्त निदेशक, पांच वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (एसएसओ), पांच वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (एसएसए), पांच कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जेएसए), पांच प्रयोगशाला सहायक (एलए) व पांच कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जेएलए) के पद प्रस्तावित हैं। लेकिन इनमें दो एसएसओ, दो एसएसए, तीन जेएसए, दो एलए व एक जेएलए ही कार्यरत हैं।
    देरी से सैंपल हो जाते हैं खराब :
    दुष्कर्म के मामलों में जांच के लिए पुलिस थाने द्वारा पीड़िता व आरोपी के पहने कपड़े तथा डॉक्टरी मुआयना के दौरान एकत्रित किए सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। जांच में देरी होने पर कई केसों में सैंपल खराब हो जाते हैं। इसी तरह कपड़ों में फंगस लग जाती है। सड़-गल भी सकते हैं।
  • फास्ट ट्रैक अदालत में चलाया जाए केस
    बिहार के राज्यसभा सांसद मोहम्मद अली अनवर अंसारी ने बुधवार को जयपुर में मीडिया से कहा-तीन माह पहले बिहार की किशोरी से सीकर में हुए सामूहिक ज्यादती मामले को सरकार को अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए केस फास्ट ट्रैक अदालत में देना चाहिए।
    अंसारी ने मामले को गंभीरता से उजागर करने के लिए मीडिया का आभार जताते हुए कहा कि बदमाशों में कानून का डर खत्म हो रहा है। ऐसे मामलों में तत्काल सजा सुनाने से अपराधियों में भय पैदा होगा।
    प्रेस कांफ्रेंस में अंसारी के अलावा बिहार की सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा व उदयपुरवाटी के राष्ट्रीय क्रांति मंच के पदाधिकारी अजय तसीड़ भी मौजूद थे। नसीमा ने बताया कि बिहार सरकार ने दुष्कर्म की पीड़िता की देखरेख के लिए ज्वाइंट लेबर कमिश्नर एम.डी. अखलाक अहमद को 6 दिसंबर से यहां लगा रखा है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: 11 years 'Damini' pain, speak - speak cried!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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