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संरक्षित घोषित होने के बाद अब निर्माण से बचेंगे लोग, बचा रहेगा उदयसागर झील का प्राकृतिक स्वरूप

Bhaskar News Network | Apr 21, 2017, 07:40 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
संरक्षित घोषित होने के बाद अब निर्माण से बचेंगे लोग, बचा रहेगा उदयसागर झील का प्राकृतिक स्वरूप
झीलों का संरक्षण गजटमें प्रकाशन के बाद प्रशासनिक तंत्र आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा

उदयसागरझील को अधिसूचित कर संरक्षित क्षेत्र घोषित करने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसका प्राकृतिक स्वरूप बचा रह सकेगा। साथ ही अब लोग संरक्षित क्षेत्र में निर्माण से बचेंगे उससे उनको भविष्य में नुकसान की चिंता भी नहीं सताएगी। राजस्थान झील संरक्षण एवं विकास प्राधिकरण की बुधवार को जयपुर में हुई बैठक में उदयसागर झील को अधिसूचित किया गया। इसी के साथ इसकी सीमाओं को छूने वाले गांवों की जमीनें भी संरक्षित क्षेत्र हो गई हैं। झील प्रेमी उदयसागर हित में इसको बहुत बड़ा कदम बता रहे है। हालांकि तर्क यह भी दिया जा रहा है कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। कई लोगों ने व्यवसायिक उपयोग के लिए उदयसागर के आसपास जमीनें खरीद रख रखी हैं, उनको भी अब वहां निर्माण स्वीकृति नहीं मिल सकेगी।

पीछोला-फतहसागर जैसी स्थिति नहीं बनेगी

उदयसागरके आसपास संरक्षित क्षेत्र में अभी बहुत कम निर्माण हुआ है। अधिकांश जमीनें खाली पड़ी है। ऐसे में झील के अधिसूचित होकर संरक्षित क्षेत्र घोषित होने से लोग यहां नया निर्माण नहीं कर सकेंगे। कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर निर्माण करने से भी बचेगा। इससे पीछोला, फतहसागर के आसपास के क्षेत्रों में जिस प्रकार की स्थिति बनी वैसी स्थिति अब उदयसागर के मामले में नहीं बनेगी। गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले हाईकोर्ट ने पीछोला,फतहसागर के आसपास अनधिकृत रूप से बने मकान ध्वस्त करने का आदेश सुनाया था। इससे कई लोगों की नींद उड़ गई थी। लोगाें की परेशानी देखकर उस समय नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। निगम ने तब विशेष अनुमति याचिका दायर कर प्रभावितों को राहत दिलाई थी।

गजट में प्रकाशन के बाद आगे की प्रक्रिया हो सकेगी शुरू

^उदयसागरझील को अधिसूचित कर संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। झील हित में यह बहुत बड़ा निर्णय कहा जा सकता है। हालांकि इसका गजट में प्रकाशन होने के बाद ही डिटेल में स्थिति साफ हो सकेगी। गजट में आने के बाद आगे की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकेगी। रामनिवासमेहता, सचिव यूआईटी

देवड़ों की भागल सबसे ज्यादा प्रभावित गांव

उदयसागरके आसपास कानपुर क्षेत्र का देवड़ों की भागल एक मात्र ऐसा गांव है जो झील से सर्वाधिक प्रभावित माना जा सकता है। जलसंसाधन विभाग के सर्वे के अनुसार 24 फीट पूर्ण भराव क्षमता वाले उदयसागर का जलस्तर यदि 32 फीट तक पहुंच जाए तो देवड़ों की भागल गांव चारों तरफ से पानी से गिर सकता है। उदयसागर झील पनवाड़ी, देबारी, टीलाखेड़ा, कमलोद डूंगर, कमलोद, भोइयों की पंचोली, कानपुर खेड़ा कानपुर, कलड़वास, मटून, खरबड़िया, लकड़वास, मोटादेवरा की सरहद तक फैली हुई है। इन गांवों की सीमा तक के झील क्षेत्र में अब कई नियम लागू हो जाएंगे।

एक समय था कि उदयसागर को गंदे पानी को बड़ा टैंक माना जाता था। आयड़ नदी होते हुए लगातार शहरी सीवरेज और नदी किनारे स्थित फैक्ट्रियों का अपशिष्ट आकर मिलने से उदयसागर के किनारे खड़ा रहना भी मुश्किल होता था। बीते 10 वर्षों में अच्छी बारिश होने से उदयसागर के नियमित तौर पर ओवरफ्लो होने से इसके पानी के स्तर में थोड़ा सुधार नजर आया। उसके बाद जिंक के सहयोग से एकलिंगपुरा क्षेत्र में 20 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होने से उदयपुर में गिरने वाले सीवरेज की मात्रा और कम हुई। इसी बीच उदयसागर झील सीमा में वर्धा समूह की होटल का काम शुरू हुआ। हाईकोर्ट ने इस होटल को ध्वस्त करने और भराव डालकर झील पेटे में बनाई सड़क हटाने का आदेश सुनाया। तब जाकर उदयसागर को लेकर प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता एकदम बढ़ी। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद होटल समूह ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में शरण ले ली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अधिकारियों की सक्रियता और बढ़ी। अब जाकर झील को संरक्षित करने का यह बड़ा कदम उठाया जा सका।

होटल निर्माण शुरू होने के बाद से सक्रिय हुआ प्रशासनिक तंत्र, कार्रवाई शुरू

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Web Title: संरक्षित घोषित होने के बाद अब निर्माण से बचेंगे लोग, बचा रहेगा उदयसागर झील का प्राकृतिक स्वरूप
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