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उदयपुर... जहां रंग झील में उतरते हैं तो हर शाम उत्सव होता है

Bhaskar News Network | Dec 02, 2016, 07:55 AM IST

उदयपुर. राजस्थानकी पहचान यहां के उत्सव हैं..., और ये उत्सव उतने ही रंगीन हैं जितने कुल्लू का दशहरा और केरल का ओणम। जरूरत है तो बस इन उत्सवी तारीखों के इर्द-गिर्द टूरिस्ट कैलेंडर व्यवस्थित करने की। उत्सव के रंगों में रंगा उदयपुर आम दिनों से कहीं ज्यादा खूबसूरत नजर आता है। ये उत्सव यहां के पर्यटन आकर्षण, यहां की झीलों को और भी आकर्षक बना देते हैं। उत्सव के रंग और इन झीलों के किनारों पर जमा हुए लोगों का उल्लास राजस्थान की असली तस्वीर दुनिया के सामने पेश करता है।

बागोर की हवेली : बागोरकि हवेली का निर्माण 18वीं शताब्दी में मेवाड़ घराने के प्रधानमंत्री ठाकुर अमरचन्द बड़वा ने करवाया।

गणगौरघाट : हवेलीके आगे त्रिपोलिया पर गणगौर घाट स्थित हैं, जहां उदयपुरवासी एकत्रित होकर हर साल गणगौर उत्सव मनाते हैं।

गणगौर तीज है उदयपुर मेवाड़ के लिए खास

यहतस्वीर इसी साल गणगौर उत्सव के दौरान पिछोला झील के दूसरे छोर ली गई है। गणगौर घाट के पीछे स्थित बागोर की हवेली इस नजारे को और खूबसूरत बना देती है। यह ‘गण’(भगवान शिव) ‘गौर’ (उनकी प|ी पार्वती) का उत्सव है। हालांकि मेवाड़ में गणगौर तीज का त्योहार लोकपर्व के रूप में उत्साह से मनाया जाता है। वसंत के आगमन की खुशी में इसी घाट पर मेवाड़ महोत्सव भी मनाया जाता है।

झीलों के शहर का ये पहलू बताता है कि उत्सव कैसे इंसान ही नहीं एक पूरे शहर के मिजाज को बदल देता है।

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दैिनक भास्कर, उदयपुर,शुक्रवार, 2 दिसंबर, 2016

अभिव्यक्ति

अनदेखा...अनछुआ राजस्थान

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Web Title: उदयपुर... जहां रंग झील में उतरते हैं तो हर शाम उत्सव होता है
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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