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कमाई के मामले में हिंदुस्तान सबसे आगे

दोहा से सुधीर मिश्र | Dec 07, 2012, 06:26 AM IST

कमाई के मामले में हिंदुस्तान सबसे आगे

वर्ष 2022 में कतर में होने वाले फीफा कप फुटबॉल ने भारतीयों के लिए यहां रोजगार के कई रास्ते खोल दिए। यहां के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मनी ट्रांसफर के जरिए दूसरे देशों में जाने वाले पैसों के मामले में भारत सबसे अव्वल है। कतर सेंट्रल बैंक की ओर से हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि कामगारों के जरिए वर्ष 2011 में कुल 13 बिलियन डॉलर यहां से दूसरे देशों को भेजे गए। इसमें भारत और फिलिपींस की 70 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि अमेरिका, यूरोप और अरब मुल्क काफी पीछे हैं।


रोजी रोटी की जुगाड़ में हर साल लाखों भारतीय कतर पहुंच रहे हैं। खासतौर से केरल, आंध्र और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों से। नेपाल, यूपी, पंजाब और बिहार के भी काफी लोग यहां हैं। तकरीबन हर इलाके में नए निर्माणों का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। यहां की करीब 21 लाख की आबादी में सिर्फ तीन लाख के करीब लोग ही कतर मूल के हैं। बाकी लोग अलग-अलग मुल्कों से आए हैं।

बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों के बाद फिलिपींस वाले अपनी तकनीकी दक्षताओं के कारण यहां तेजी से रोजगार के लिए आ रहे हैं। मनी ट्रांसफर के आंकड़ों के हिसाब से 7.6फीसदी की हिस्सेदारी के साथ अमेरिका के तीसरे और यूरोप उससे थोड़ा पीछे है। दरअसल 2022 में यहां फीफा कप होना है। उसी की तैयारियों को लेकर यहां काफी संभावनाएं उभरी हैं।


खेलों की तैयारियों के एक जानकार के मुताबिक इन तैयारियों पर करीब सौ बिलियन डॉलर अगले कुछ वर्षों में खर्च किए जाने हैं। यह सारा काम नेशनल विजन 2030 के तहत होना है। नौ नए स्टेडियम बनाए जाने हैं और तीन पुराने स्टेडियमों को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए नए सिरे से तैयार किया जाना है। इसके अलावा पर्यटन, यातायात, स्वास्थ्य, मार्केटिंग, शिक्षा और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े क्षेत्रों में काफी काम किया जाना है।

25 बिलियन मेट्रो रेल और 20 बिलियन डॉलर सड़कों पर खर्च होने हैं। फीफा को यहां 65 हजार नए होटल कमरों की जरूरत है। इस लिहाज से भारतीयों के लिए अभी भी काफी संभावनाएं हैं।

...फिर भी लोग खुश नहीं


बात चाहे टैक्सी ड्राइवरों की हो या होटलों में काम करने वालों की। लोग चाहे मीडिया या मार्केटिंग से जुड़े हों या फिर आईटी सेक्टर से। ज्यादा पैसा मिलने के बावजूद पूरी तरह से कोई भी खुश नहीं। इसकी सबसे बड़ी वजह कतर के मूल निवासियों की तरह सुविधाएं न मिलना और भेदभाव होना है। हैदराबाद से आए मोहम्मद जमाल ने कहा कि दो साल कमाकर वह वापस हैदराबाद जाएगा। वहां पैसा कम है पर इज्जत ज्यादा, यहां कतरी लोग हमें नौकर समझते हैं। श्रम कानून भी यहां ठीक से नहीं लागू हैं।

खासतौर से काम के लिए स्पॉन्सरशिप जैसे मसलों पर। लोग एक नौकरी छोड़कर यहां पर दूसरी नौकरी आसानी से नहीं कर सकते। उन्हें अपने एम्प्लॉयर से सहमति की जरूरत होती है। इस वजह से काफी लोग यहां काम करते हुए कुंठित हैं। मजदूरों की मजदूरी और उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी शिकायतें हैं जिनके लिए कुछ मानवाधिकार संगठनों ने फीफा से अपील की है कि वह मानवाधिकारों को ठीक से लागू कराए।खासतौर से निर्माण के क्षेत्र में जिसमें न केवल मजदूरों की बल्कि निर्माण सामग्री की भी काफी जरूरत है।

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Web Title: India at the forefront in terms of earnings
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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