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'नीतीश अंतिम बार सीएम की कार में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जाएंंगे'

bhaskar news | Oct 24, 2015, 02:37 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
'नीतीश अंतिम बार सीएम की कार में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जाएंंगे'
पटना. दादरी, फिर हरियाणा में दलित बच्चों की हत्या, साहित्यकारों का सम्मान लौटाना और इन सबके बीच बिहार चुनाव। ऐसे ही कई मुद्दों की देश में चर्चा हो रही है। केंद्र में भाजपा है। सवालों के केंद्र में भी, सत्ता के केंद्र में भी। ऐसे में बीजेपी में क्या चल रहा है, इसी के जवाब तलाशे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से। जब उनसे पूछा गया कि हाल ही में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की कई घटनाएं हुईं और इसका आरोप भाजपा पर है, तो शाह ने कहा, ''भाजपा कहां माहौल बिगाड़ रही है? घटनाएं कांग्रेस की सत्ता वाले कर्नाटक और सपा सरकार के यूपी में हो और सवाल भाजपा से किया जाए, ये सही नहीं है। कन्नड़ लेखक कलबुर्गी की हत्या और दादरी में अखलाक की हत्या पर हमसे सवाल करने के पहले इन राज्यों का गवर्नेंस हमें सौंप दें। साहित्यकारों के सम्मान लौटाने की मंशा क्या है, मैं नहीं जानता। पर विरोध के इस तरीके का हम समर्थन नहीं करते हैं।''
क्या है भाजपा की आगे की स्ट्रैटेजी? महागठबंधन के लगातार बाहरी बनाम बिहारी मुद्दे पर क्या होगा बीजेपी का जवाब? बीजेपी क्यों नहीं ला रही सीएम उम्मीदवार का चेहरा? क्या महागठबंधन की सरकार बनी तो बिहार को सवा लाख करोड़ रुपए का पैकेज नहीं मिलेगा? इस तरह के तीखे सवालों के साथ शाह से रूबरू हुए हमारे पॉलिटिकल एडिटर अरुण कुमार पांडेय।
> सहयोगी शिवसेना ने मोदी को ढोंगी कहा, कालिख पोतने जैसी हरकतें की?
देखिए, महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के खिलाफ हम शिवसेना के साथ चुनाव लड़ते हैं और शासन में साथ होते हैं। कुछ मुद्दों पर हम दोनों के स्टैंड अलग-अलग हैं। यह बाला साहेब ठाकरे के समय से हो रहा है। शिवसेना के सहयोगी होने के बावजूद उसकी हर बातों से न हम राजी होते हैं और न उसके विरोध के तरीके का सपोर्ट करते हैं।
> क्या संघ प्रमुख द्वारा आरक्षण पर सवाल उठाए जाने से भाजपा बैकफुट पर है?
हम बैकफुट पर क्यों रहेंगे? जिस दिन यह विचार आया, उसी दिन रविशंकर प्रसाद ने साफ कर दिया कि भाजपा आरक्षण की पक्षधर रही है और मौजूदा व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होगा। बावजूद विपक्ष ने जब भ्रांति फैलाई तो हमने, खुद प्रधानमंत्री ने और अन्य लोगों ने कई बार प्रतिक्रिया दी। लोग समझदार हैं। नीतीश-लालू के झांसे में अब लोग नहीं आने वाले हैं।
> क्या बिहार चुनाव में जातिवाद के आगे विकास का मुद्दा पीछे छूट गया?
हम तो विकास के एजेंडे पर ही कायम हैं। विपक्ष जातिवाद का सहारा लेने की कोशिश कर रहा है। नीतीश विकास की बात कर रहे हैं। लालू उल-जलूल बातें कर जातिवाद को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं।
> पीएम, आप खुद और कई मंत्री बिहार में हैं। रोज दो दर्जन नेताओं की सभाएं हो रही हैं, चुनौती बढ़ी है क्या?
आपको ऐसा इसलिए लग रहा है, क्योंकि चुनाव सिर्फ बिहार में है। चुनाव का हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम पूरी शिद्दत से चुनाव लड़ते हैं। हमारे लिए विधानसभा की सभी 243 सीटें महत्वपूर्ण हैं। ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना हमारा लक्ष्य है।
> 3 चरण बाकी हैं, कितनी सीटें जीतेंगे?
दो-तिहाई सीटों पर जीत तय है। सरकार हमारी बनेगी। जिन सीटों पर चुनाव हो गए, वहां हमने समीक्षा की है। बिहार में बदलाव की लहर है। बाकी के चरणों में तो देखना विपक्ष का अता-पता भी नहीं होगा।
> नीतीश बहस की चुनौती दे रहे हैं?
किस बात पर बहस? बीते 60 वर्षों तक कांग्रेस-लालू-नीतीश का राज रहा। राज्य का क्या हाल है? पढ़ाई, दवाई और कमाई के लिए बिहार के लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है। नीतीश उलटा हमसे हिसाब मांग रहे हैं। अभी बिहार का चुनाव है। उन्हें अपने 10 वर्षों का और बड़े भाई लालू के किए 15 वर्षों का हिसाब देना चाहिए। उन्हें नमो फोबिया हो गया है।
> बिहारी बनाम बाहरी का मुद्दा उठा है?
हां, हम भी कहते हैं कि बिहारी ही होगा बिहार का सीएम। बिहार पर बिहारी ही राज करेगा। क्या सिर्फ नीतीश ही अकेले बिहारी हैं? वे लालू के जंगलराज को आतंकराज कहते थे। उसी का विरोध कर सत्ता में आए और आज उन्हीं लालू से हाथ मिला लिया। कांग्रेस का तो 25 साल पहले ही बिहार में चैप्टर खत्म हो गया। अब वह न किसी की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार कर सकती है और न अपना अस्तित्व बचा सकती है।
> राजग की चुनावी रैलियों में भावी सीएम के रूप में आधा दर्जन नाम उभरे हैं। कौन होगा सीएम-अगड़ा, पिछड़ा या यादव?
नतीजा आने के बाद पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक होगी और तय होगा सीएम। (नीतीश पर तंज कसते हुए) हमारे यहां सीएम के लायक नेताओं की कमी थोड़े है? बड़े भाई लालू चुनाव लड़ने योग्य नहीं रहे और छोटे भाई नीतीश के एक कंधे पर लालू का जंगलराज, दूसरे पर कांग्रेस का भ्रष्टाचार, कैसे होगा बिहार का विकास?
> सरकार किसी की बने, क्या विशेष पैकेज बिहार को मिल कर रहेगा?
यह नीतीश-लालू के लिए थोड़े मिला है? यह बिहार के विकास के लिए है। इसीलिए तो हम कहते हैं कि बिहार में ऐसी सरकार चाहिए जो केंद्र के साथ मिलकर बिहार में गरीबों-पिछड़ों के लिए काम करे। केंद्र से झगड़ने वाली सरकार नहीं चाहिए। बिहार सरकार का 25 वर्ष केंद्र से झगड़ा करने में बीत गया। जिन्होंने राज किया, उनका ही विकास हुआ है। पीएम ने बिहार के विकास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की तो नीतीश राजनीति करने लगे। विशेष पैकेज को पुरानी पैकेजिंग बताने लगे। हम पूछते हैं कि जिन योजनाओं का पिछले दशक या सालों में एलान हुआ या स्वीकृति मिली, उन्हें आज तक लागू क्यों नहीं किया? किसने रोक रखा था? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हम तो डेढ़ वर्ष से केंद्र में हैं।
> दो चरणों में 81 सीटों के चुनाव हो गए। बाकी बचा है 162 सीटों के लिए तीन चरणों का चुनाव। आपको कितनी सीटें मिलेंगी?
इस बार के चुनाव में दो-तिहाई सीटों पर एनडीए की जीत तय है। सरकार हमारी बनेगी। जिन सीटों के लिए चुनाव हो गए, हमने सीट-टू-सीट रिव्यू कर पाया है कि बदलाव की लहर है। 81 में कम से कम 55 सीटों पर हमारी जीत होगी। आगे के चुनावों में तो विपक्ष का अता-पता नहीं होगा।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, नीतीश की चुनौती पर क्या बोले अमित शाह...
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Web Title: 'नीतीश अंतिम बार सीएम की कार में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जाएंंगे'
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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