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अगर बचाना है 'मास्टर ब्लास्टर' का खिताब, सचिन को करना ही होगा ये वार

Dainikbhaskar.com | Dec 29, 2012, 16:35 IST

  • लंदन. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ज्योफ्री बॉयकॉट को उम्मीद है कि सचिन तेंडुलकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मार्च में होने वाले टेस्ट सीरीज के दौरान क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं।
    बॉयकॉट ने कहा कि पिछले दिनों सचिन का बल्ला खामोश रहा इसलिए वे टेस्ट से संन्यास का मन बना चुके होंगे। उन्होंने कहा कि सचिन को लोग रन बनाते हुए देखना चाहते हैं इसलिए उम्मीद करनी चाहिए कि उनका बल्ला फिर चल पड़े और वे संन्यास न लें।
    बॉयकॉट ने कहा कि सचिन ने वनडे से संन्यास लेकर समझदारी का काम किया है। एक दिन तो सभी को संन्यास लेना ही पड़ता है। यादों के सहारे नहीं जिया जा सकता है। यह पूछने पर कि क्या टेस्ट प्रारूप में भारत को सचिन की अधिक जरूरत है, उन्होंने कहा , ‘मुझे लगता है कि उसे वही करना चाहिए जो उसके लिए सर्वश्रेष्ठ हो। वे जिस भी प्रारूप में अच्छा खेलेंगे, भारतीय टीम का ही भला होगा।’
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  • टेस्ट में भी हैं रनों के बादशाह
    टेस्ट क्रिकेट में भी सचिन तेंडुलकर रनों के एवरेस्ट पर बैठे हैं। उन्होंने अब तक (29 दिसंबर) खेले 194 टेस्ट मैचों की 320 पारियों में 54.32 की औसत से 15645 रन बनाए हैं। उनके नाम टेस्ट में 51 शतक और 66 अर्धशतक दर्ज हैं। उनसे ज्यादा टेस्ट सेंचुरी किसी नहीं लगाईं, ना ही उनसे ज्यादा रन कोई सूरमा ठोक पाया है।
    बांग्लादेश और जिम्बाब्वे को छोड़ कर हर टेस्ट प्लेयिंग नेशन के खिलाफ उनके खाते में 1000 से अधिक रन दर्ज हैं। इसके अलावा उनके खाते में सभी टीमों के खिलाफ टेस्ट शतक लगाने का अनमोल रिकॉर्ड दर्ज है।
  • वनडे का किंग हो कर भी मिली फीकी विदाई
    वनडे क्रिकेट में सचिन तेंडुलकर का रुतबा भगवान के जैसा था। उनके प्रशंसकों ने उन्हें क्रिकेट का भगवान बुला कर उन्हें सिर आंखों पर बैठाया। 18426 रन, 49 शतक, 96 अर्धशतक, 463 मैच, नाबाद 200 रन का स्कोर और 2016 चौके। इन सभी मामलों में नंबर 1 रहे तेंडुलकर बिना विदाई मैच खेले चले गए। उन्होंने चयनकर्ताओं की बैठक से ठीक पहले संन्यास का ऐलान कर हार मान ली।
    जिस सचिन ने क्रिकेट से प्यार किया था, वही अपने रिकॉर्ड्स को बोझ मानने लगा। दुखी मन से उसने अलविदा कहा। उतने ही दुख के साथ उसने क्रिकेट इतिहास का पहला सौवां शतक लगाया।
  • वनडे में भी थे कंगारुओं पर भारी
    वनडे क्रिकेट में भी सचिन का बल्ला कंगारुओं के खिलाफ जम कर बोला। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले 71 वनडे मैचों की 70 पारियों में 9 शतक और 15 अर्धशतक समेत 3077 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 175 रन का रहा।
    तेंडुलकर ने करियर में सबसे ज्यादा चौके और छक्के भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए। कंगारुओं के खिलाफ 70 पारियों में उन्होंने 330 चौके और 35 छक्के लगाए।
  • कंगारुओं की पिटाई करने में उस्ताद
    टेस्ट हो या वनडे, हर फॉर्मेट में तेंडुलकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धुनाई करने में माहिर रहे। कंगारुओं के खिलाफ खेले 35 टेस्ट मैचों में उन्होंने 57 की औसत से 3438 रन बनाए हैं। इसमें 11 शतक और 15 अर्धशतक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी टीम है जिसके खिलाफ उन्होंने टेस्ट में 3 हजार से अधिक रन और 10 से ज्यादा सैकड़े लगाए हैं।
    घरेलू मैदानों पर जब सचिन का सामना माइकल क्लार्क की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम से होगा, तो यह रिकॉर्ड उनके लिए ही एक चुनौती बन जाएगा। उन पर दबाव होगा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रन बनाने का। भले ही टीम के शेष 10 बल्लेबाज रन बनाए या नहीं, तेंडुलकर को हर हाल में बल्ला चलाना होगा। यह दबाव उन पर किसी और ने नहीं बल्कि उनके प्रशंसकों ने ही बनाया है।
  • वार्न को आते थे बुरे सपने
    1990 के दशक में सचिन अपने चरम पर थे। शारजाह में उनके हाथों पिटाई खाने के बाद दिग्गज स्पिनर शेन वार्न ने एक बार कहा था कि उन्हें तेंडुलकर सपने में आ कर डराते हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: boycott labels australia series vital for sachin tendulkar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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