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POST MORTEM: इन 10 से किया टीम को घर में ही शर्मसार

Dainikbhaskar.com | Dec 17, 2012, 14:57 IST

  • खेल डेस्क. टीम इंडिया का टेस्ट फॉर्म कितना खराब है, इसका नजारा इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में देखने को मिल गया। धोनी ब्रिगेड ने बरसों से चली आ रही टीम की घरेलू मैदान पर साख को तहसनहस कर दिया। पिछले 8 सालों में यह पहला मौका है जब टीम को घरेलू मैदानों पर टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी। (नागपुर टेस्ट, इंग्लैंड 2-1 से सीरीज जीता) इस हार के बाद सचिन तेंडुलकर के संन्यास की चर्चा भी गर्महो गई है।
    एलिस्टर कुक की कप्तानी में इंग्लैंड ने भारतीय टीम की बादशाहत को खत्म कर दिया। उन्होंने दिखा दिया कि वे सिर्फ घर के शेर नहीं, बल्कि टर्न लेती एशियाई पिचों पर भी वे दबदबे के साथ जीत दर्ज कर सकते हैं (मैदान पर ट्रॉट से भिड़े कोहली)
    अहमदाबाद टेस्ट को अगर छोड़ दिया जाए, तो फिर चाहे वह मुंबई हो या कोलकाता या फिर नागपुर, किसी भी मैदान पर घरेलू टीम दबदबा नहीं बना सकी। सीरीज के पहले टेस्ट मैच में जीत दर्ज करने की खुशी और टीम में चल रहे विवाद के गम में धोनी ब्रिगेड कुछ ऐसे टूटी कि फिर संभल न सकी।
    अंतिम तीन मुकाबलों के आंकड़े देखने के बाद सीरीज के 10 विलेन सामने आए। इन 10 लोगों ने मिल कर टीम को घर पर भी बदनाम कर दिया।
    आगे क्लिक कर देखिए, कौन हैं वे 10 चेहरे, जिन्होंने किया टीम को शर्मसार...
  • कप्तान महेंद्र सिंह धोनी
    सीरीज की हार ने धोनी की कप्तानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विदेशी पिचों पर नाक कटवाने के बाद अब वे घरेलू मैदानों भी हारने लगे हैं। उदाहरण के साथ लीड न कर पाने की खामी ने पूरी टीम को डुबो दिया। नागपुर में खेली 99 रन की पारी को यदि छोड़ दिया जाए, तो कभी भी धोनी एलिस्टर कुक की तरह टीम का नेतृत्व करते नजर नहीं आए। धोनी का न तो बल्ला बोला, न विकेटकीपिंग में कोई कमाल देखने को मिला और ना ही उनकी रणनीति इतनी असरदार दिखी कि वे मैच बचा पाते।
  • वीरेंद्र सहवाग
    टीम के स्टार ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ जारी विवाद की आग में टीम को ही स्वाहा कर दिया। कभी वे बेवकूफियों से रन आउट होते नजर आए, तो कभी बेहद घटिया शॉट खेल कर क्लीन बोल्ड हुए। यही नहीं सहवाग ने कई अहम कैच भी टपकाए। खराब फील्डिंग और घटिया बल्लेबाजी ने उनके सीनियर होने के रुतबे को कम कर दिया।
    सहवाग ने चार मैचों में 36.14 के औसत से कुल 253 रन बनाए। इसमें केवल एक शतक शामिल रहा। उनके नकारात्मक रवैये के कारण टीम को नुकसान हुआ।
  • सचिन तेंडुलकर
    कभी मास्टर ब्लास्टर कहलाने वाले सचिन तेंडुलकर अपने इतिहास की परछाईं मात्र बन कर रह गए। तेंडुलकर का सीरीज में एवरेज किसी पुछल्ले बल्लेबाज जैसा रहा। ढलती उम्र और खराब फॉर्म ने उन्हें सीरीज का सबसे बड़ा विलेन बना दिया। कोलकाता में खेली 76 रन की पारी को यदि छोड़ दिया जाए, तो कभी भी वे एक सीनियर की तरह बल्लेबाजी करते नजर नहीं आए। उनकी बॉडी लैंग्वेज हर बार एक थके-हारे शेर की तरह दिखी। वे युवाओं को प्रेरणा देते भी तो कैसे जब वे खुद ही रन नहीं बना पा रहे थे। फील्डिंग में भी वे सुस्त-सुस्त से दिखे।
    तेंडुलकर ने सीरीज में 18 की औसत से कुल 112 रन बनाए। इसमें से 76 रन उन्होंने कोलकाता मैच की एक पारी में बनाए।
    क्लीन बोल्ड होने का सिलसिला यहां भी जारी रहा। उनकी खराब होती तकनीक ने उनके संन्यास लेने की मांग को फिर से बढ़ा दिया।
  • गौतम गंभीर
    गुस्सा दिखाने में माहिर दिल्ली का यह बल्लेबाज अपनी अकड़ में टीम इंडिया को ले डूबा। गंभीर न तो बल्ले से रन बना सके और न ही फील्डिंग के जरिए टीम की खास मदद कर पाए। उनका ध्यान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को ताने मारने में ज्यादा रहा। सेलेक्टर्स ने टीम में चार ओपनिंग बल्लेबाज रख कर जैसे गंभीर को टेंशन में ला दिया था। खुद की जगह प्लेयिंग
    इलेवन में बरकरार रखने के लिए वे धीमे बल्लेबाजी करते रहे। कोलकाता में जब उन्हें एक सीनियर की तरह पुछल्ले बल्लेबाजों को बचाना चाहिए था, तब वे सिंगल्स लेकर खुद को नॉटआउट रखने की नाकाम कोशिशों में लगे थे।
    गंभीर ने सीरीज में कुल 251 रन बनाए। 100 रन का आंकड़ा छूने का उनका इंतजार यहां भी जारी रहा औऱ दो हाफ सेंचुरी के अतिरिक्त वे कोई चमत्कारी पारी नहीं खेल पाए।
  • आर अश्विन
    न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में अश्विन स्टार बन कर उभरे थे। उन्होंने अपनी स्पिन से विदेशी बल्लेबाजों को चक्कर में डाल दिया था। अहमदाबाद टेस्ट में भी उनका जलवा बरकरार रखा। प्रज्ञान ओझा के साथ मिल कर उन्होंने टीम को जीत दिलाई। लेकिन इसके बाद जैसे उन्हें खुद की ही नजर लग गई। अश्विन न तो मुंबई में अच्छा परफॉर्मेंस दे पाए, न कोलकाता में उनकी फिरकी का जादू चला। नागपुर में भी वे दमदार प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। चार मैचों में अश्विन ने 14 विकेट चटकाए।
  • जहीर खान
    टीम के सबसे सीनियर बॉलर जहीर खान का खराब फॉर्म पूरी टीम को ले डूबा। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने तमाम असफलताओं को किनारे रखते हुए उन्हें इस सीरीज में शामिल किया था, लेकिन जहीर ने अपने कप्तान को सिवाए निराशा के कुछ नहीं दिया। जहीर खान ने तीन मैचों में कुल 4 विकेट लिए। इसमें से भी दो अंपायर की मेहरबानी (खराब निर्णय) का फल रहे। जहीर के खराब फॉर्म ने उन्हें नागपुर टेस्ट से भी बाहर करवा दिया।
    न तो सीरीज में जहीर की गेंदें रिवर्स स्विंग हुईं, न ही वे नई गेंद की जिम्मेदारी सही ढंग से निभा सके। जिन बेजान पिचों पर इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने 12 विकेट झटके, वहीं जहीर कुल 4 सफलताएं हासिल कर पाए।
  • युवराज सिंह
    कैंसर के बाद पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेले युवराज सिंह टीम की नाकामी में एक बड़ा चेहरा रहे। युवी की फिटनेस किसी भी पल टेस्ट क्रिकेटर जैसी नहीं दिखी। इसके बावजूद वे टेस्ट मैच खेलने की अपनी जिद पर अड़े रहे।
    नतीजा टीम की हार। युवराज न तो रन बना सके और ना ही वे गेंदबाजी से टीम के लिए मददगार साबित हुए। उन्हें प्लेयिंग इलेवन में बतौर ऑलराउंडर जगह दी गई थी, लेकिन वे इसमें पूरी तरह फेल हुए।
  • इशांत शर्मा
    दिल्ली के स्टार तेज गेंदबाज इशांत शर्मा को टीम में लाया गया था जहीर खान के साथ नई गेंद की जिम्मेदारी संभालने के लिए, लेकिन इशांत ने सिवाए निराशा के और कुछ नहीं दिया। नागपुर टेस्ट की पहली इनिंग को यदि छोड़ दिया जाए तो उनकी स्विंग बॉलिंग कहीं भी असरदार नहीं दिखी। इंग्लैंड के बल्लेबाजों के सामने वे नौसीखुए जैसे साबित हुए। इशांत ने भी 2 मैचों में कुल 4 विकेट चटकाए। इसमें से 3 विकेट उन्हें नागपुर टेस्ट की पहली पारी में मिले।
  • बीसीसीआई
    टीम की नाकामी के पीछे बीसीसीआई भी एक बड़ा विलेन साबित हुआ। शुरुआती मैचों में असफलता के बाद टीम में बड़े बदलावों की दरकार थी। संदीप पाटिल की अगुवाई वाली चयन समिति ने कुछ कड़े फैसले लेने के बारे में सोचा भी, लेकिन बीसीसीआई ने बीच में हस्तक्षेप कर उन्हें नहीं होने दिया।
    हर मैच में टीम कॉम्बिनेशन समझ से परे दिखा। ओपनिंग पोजिशन के लिए टीम में चार खिलाड़ियों को रखा गया जो कि पूरी तरह गैर-जरूरी थी। अजिंक्य रहाणे और मुरली विजय हर बार बेंच पर आराम फरमाते रहे।
    लंबे समय से फ्लॉप हो रहे वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को सेलेक्टर्स ने लगातार टीम में बरकरार रखा।
    वहीं बॉलिंग डिपार्टमेंट में भी खिलाड़ियों का सेलेक्शन चौंकाने वाला रहा। सेलेक्टर्स ने रणजी तक में खराब फॉर्म में चल रहे पीयूष चावला को इन-फॉर्म बॉलर अमित मिश्रा से ऊपर तरजीह दी। नागपुर टेस्ट में टीम इंडिया जीत दर्ज करने के समीकरण तक पहुंच गई थी, लेकिन चावला ने पूरा खेल बिगाड़ दिया।
  • कोच डंकन फ्लेचर
    खिलाड़ियों की असफलता के बीच कोच डंकन फ्लेचर का चुप रहना टीम के लिए घातक साबित हुआ। न तो फ्लेचर वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर औऱ कप्तान धोनी के बीच जारी शीत-युद्ध को शांत कर पाए, ना ही वे सचिन तेंडुलकर का खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाने में कामयाब हुए। गेंदबाज लगातार गलत लाइन और लेंथ के साथ खेलते रहे, लेकिन फ्लेचर ने उनके लिए कोई प्लानिंग नहीं की।
    फ्लेचर का इंडिया के साथ परफॉर्मेंस शुरुआत से ही खराब रहा है। पिछले साल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर वे टीम को हार से बचाने में असमर्थ रहे थे। घरेलू मैदानों पर भी वे खिलाड़ियों के साथ असरदार संवाद बनाने में नाकाम रहे। जो जोश और जज्बा पूर्व कोच गैरी कर्स्टन ने पैदा किया था, फ्लेचर उसे बरकरार रखने में पूरी तरह से फेल हुए।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: dhoni tendulkar zaheer villain in test series vs england
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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