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LEGEND: हो जाती पाक क्रिकेट की मौत... अगर नहीं मिलता ये मसीहा

Dainikbhaskar.com | Dec 01, 2012, 12:41 IST

  • खेल डेस्क.इस साल दिसंबर का महीना क्रिकेट प्रेमियों के लिए कुछ ज्यादा खास होने वाला है। महीने के अंत में पड़ोसी पाकिस्तानी टीम यहां दो टी-20 और तीन वनडे मैचों की सीरीज खेलने आएगी। भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबलों का फैन्स को बेसब्री से इंतजार रहता है। टीम इंडिया चाहे कहीं भी हारे, लेकिन पाकिस्तान से हार कोई बर्दाश्त नहीं कर पाता।
    इस रोमांचक सीरीज से पहले dainikbhaskar.com अपने पाठकों के लिए लेकर आया है पाकिस्तान के खास क्रिकेटरों में पर एक सीरीज।
    इसी कड़ी में सबसे पहले हम आपको बता रहे हैं पाकिस्तानी क्रिकेट के पितामाह अब्दुल हफीज करदार के करियर से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें। भारत और पाकिस्तान का बंटवारा 1947 में हुआ था। दोनों मुल्कों के अलग होने के बाद एक ओर जहां सब नॉर्मल करने की जद्दोजहद थी, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी क्रिकेट को दुनिया में पहचान दिलाने की मशक्कत।
    यदि करदार नहीं होते, तो शायद पाकिस्तानी क्रिकेट इस मुकाम पर कभी पहुंच ही नहीं पाता जहां वह आज के समय में है।
    आइए, तस्वीरों की जुबानी जानते हैं पाकिस्तानी के पितामाह के करियर से जुड़ी खास बातें...
  • करदार का जन्म 17 जनवरी 1925 को पंजाब के लाहौर शहर में हुआ था। इस्लामिया कॉलेज से एज्यूकेशन लेने वाले करदार आजादी से पहले भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। उन्होंने भारत की ओर से खेलते हुए 3 टेस्ट मैचों में 80 रन बनाए।

  • बंटवारे के बाद पाकिस्तान को वर्ल्ड क्रिकेट में पहचान दिलाने में करदार ने अहम रोल निभाया। उन्हें फादर ऑफ पाकिस्तान क्रिकेट के रूप में भी जाना जाता है।

  • आजादी के बाद पाकिस्तान ने सबसे पहली टेस्ट सीरीज भारत के खिलाफ खेली। उस पाक टीम की कप्तानी करदार ने की थी। सबसे पहला टेस्ट मुकाबला 16 अक्टूबर 1952 को दिल्ली में खेला गया।

  • लाला अमरनाथ की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने करदार एंड कंपनी को 2-1 से हराया। हालांकि, पाकिस्तान यह सीरीज हार गया था, फिर भी करदार की ही कप्तानी में टीम को टेस्ट इतिहास की पहली जीत लखनऊ में मिली थी।

  • करदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने कुल 23 टेस्ट मैच खेले, इसमें से 6 मैच में टीम को जीत मिली, तो 6 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। 11 मैच ड्रा रहे।

  • करदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने उस समय के सभी टेस्ट प्लेयिंग टीमों के खिलाफ मैच खेले। उन्होंने हर टीम को हराने का एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया था। बंटवारे के बाद अपने वजूद के लिए संघर्ष करने वाले देश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि थी। 11 अक्टूबर 1956 को करदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को कराची में हुए टेस्ट मुकाबले में हरा कर इतिहास रचा।

  • खब्बू ऑलराउंडर करदार ने 174 फर्स्ट क्लास मैचों में 29.83 की एवरेज से 6832 रन बनाए, जिनमें 8 शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 24.55 की औसत से 344 विकेट भी झटके। टेस्ट मैचों की बात करें, तो करियर में खेले 26 टेस्ट मैचों में उन्होंने 5 फिफ्टी प्लस स्कोर्स समेत 927 रन बनाए। साथ ही 21 विकेट भी चटकाए।

  • करदार मोहम्मद अली जिन्नाह के फॉलोअर थे। उन्हीं के बताए रास्ते पर चल कर वे राजनीति में आए और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में एशियाई और अफ्रीकी क्रिकेट को आईसीसी में खास पहचान मिली। 1977 में खिलाड़ियों के साथ पेमेंट को लेकर हुए विवाद के कारण करदार को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनका निधन 21 अप्रैल 1996 को होमटाउन लाहौर में हुआ।

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Web Title: father of pakistan cricket abdul hafeez kardar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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