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टीम इंडिया खामियों का पिटारा!

बिजेंद्र सिंह शेखावत | Jan 05, 2013, 09:29 IST

  • जयपुर।भारतीय टीम को जब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था, उस समय कहा गया था कि हमारी टीम घर में शेर है। अब टीम से यह तमगा भी छिन गया है। घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट और पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज की हार के दौरान टीम की कई खामियां उजागर हुईं। कुछ महीने पहले तक धोनी की कप्तानी को जादुई कहने वाले पूर्व धुरंधर अब उनसे कप्तानी छीनने की आवाज उठा रहे हैं। टीम इंडिया खामियों का पिटारा बन गई है। आखिर क्‍या है टीम इंडिया की बीमारी और क्‍या हो सकता है इसका इलाज, आगे जानें...
    धोनी ब्रिगेड की खामियों पर एक नजर :

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  • घर में भी नहीं चल रहे धुरंधर
    बल्लेबाजी को टीम का सबसे मजबूत पहलू माना जाता रहा है, लेकिन अब हालत यह हो गई है कि हमारे धुरंधर घरेलू पिचों पर भी रन नहीं बना पा रहे हैं। सहवाग, गंभीर, युवराज और कोहली जैसे दिग्गज एक-दो पारियों में तो चल रहे हैं, लेकिन इससे टीम का भला नहीं हो पा रहा है। सहवाग पाक के खिलाफ 4 व 31 रन बना सके। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनके स्कोर 30 व 9 (मुंबई), 23 व 49 (कोलकाता) और 0 (नागपुर) रहे। इसी तरह गंभीर ने पाक के विरुद्ध 8 व 11 रन बनाए। इंग्लैंड के खिलाफ उनकी पारियां 4 व 65 (मुंबई), 60 व 40 (कोलकाता) और 37 (नागपुर) रहीं।
  • बेरंग फिरकी गेंदबाज
    किसी समय भारतीय स्पिनरों को घरेलू पिचों पर अबूझ पहेली कहा जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पाक के खिलाफ दो वनडे मैचों में विशेषज्ञ स्पिनर अश्विन को सिर्फ एक विकेट मिला। दूसरी ओर सईद अजमल ने दूसरे वनडे में तीन विकेट लिए। हफीज जैसे पार्ट टाइम स्पिनर ने भी दोनों मैचों में एक-एक विकेट लिया।
  • बेतुकी रणनीति
    धोनी की रणनीतियां अब बेतुकी साबित हो रही हैं। वे बैटिंग लाइन-अप को लेकर असमंजस में हैं। उन्होंने चेन्नई वनडे में 113 रन की नाबाद पारी खेली थी, तो वे कोलकाता में ऊपर क्यों नहीं आए। जडेजा से पहले अश्विन को क्रीज पर भेजने की बात भी किसी को समझ नहीं आई।
  • सचिन हटे, तो युवा क्या कर रहे हैं?
    कुछ समय पहले कहा जा रहा था कि सचिन तेंडुलकर ने युवा खिलाडिय़ों का रास्ता रोक रखा है। अब सचिन वनडे से संन्यास ले चुके हैं, तो युवा खिलाड़ी तेवर क्यों नहीं दिखा रहे हैं। विराट कोहली, सुरेश रैना और जडेजा जैसे युवा टुकड़ों में ही चल पा रहे हैं।
  • ...और बोर्ड को कमाने से फुर्सत नहीं!
    टीम लगातार हार रही है और हमारा क्रिकेट बोर्ड इस बारे में जरा भी नहीं सोच रहा है। बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के कारण धोनी का खुलकर पक्ष ले रहे हैं। पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि बोर्ड के लिए कमाई प्राथमिकता बनी हुई है। इसी कारण वह टीम के प्रदर्शन में सुधार के बारे में सोच नहीं रहा है।

  • सुधार के लिए उठाने होंगे ये कदम
    कई पूर्व दिग्गज अलग-अलग समय पर टीम के प्रदर्शन में सुधार के उपाय बता चुके हैं। इनका मानना है कि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो हमारी टीम काफी पिछड़ जाएगी। पांच प्रमुख सुझाव :
    घरेलू क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान
    पिछले कई सालों से यह देखने को मिल रहा है कि भारतीय टीम में शामिल खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट को तरजीह नहीं देते हैं। राष्ट्रीय टीम के साथ व्यस्त नहीं होने पर भी वे रणजी या दिलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों में नहीं खेलते हैं। इसके स्थान पर हमारे खिलाड़ी या तो विज्ञापनों की शूटिंग में व्यस्त रहते हैं या फिर वे प्रायोजकों के कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं। दूसरी ओर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में घरेलू क्रिकेट में खेलना जरूरी है।
  • आईपीएल पर लगाई जाए लगाम
    आईपीएल पर लगाम लगाते हुए भारतीय क्रिकेटरों को इससे दूर रखा जाए। रणतुंगा और इमरान जैसे क्रिकेटर इस लीग से क्रिकेट को हो रहे नुकसान की बात कह चुके हैं। इस लीग के कारण विदेशी खिलाडिय़ों को भारतीय पिचों पर खेलने का अनुभव मिलता है, तो भारत के खिलाफ सीरीज में उनके काम आता है।
    विज्ञापनों और तनख्वाह में कटौती
    विज्ञापनों से मिलने वाली भारी राशि के कारण हमारे खिलाड़ी क्रिकेट को लेकर एकाग्रचित्त नहीं रहते हैं। बोर्ड भी उन्हें सालाना अनुबंध देकर उनके लिए बड़ी रकम तय कर देता है। एक बार अनुबंध की ग्रेड तय हो जाने के बाद किसी भी खिलाड़ी को पूरे साल वही रकम मिलेगी, चाहे उसका प्रदर्शन कितना भी खराब क्यों नहीं हो। बोर्ड को प्रदर्शन आधारित तनख्वाह देने का फॉर्मूला अपनाना चाहिए।
  • पिचों की हालत सुधारी जाए
    अभी तक हमारे देश के पिच बल्लेबाजों या स्पिनरों के लिए मददगार होते हैं। टीम की हालत को देखते हुए बोर्ड को पिचों की स्थिति सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने ही होंगे। कम से कम कुछ सेंटर्स पर तो तेज व उछाल वाले पिच तैयार करने होंगे, ताकि हमारे बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के सामने लडखड़़ाएं नहीं।
    रोटेशन अपनाया जाए
    टीम इंडिया के खिलाडिय़ों का कार्यक्रम जरूरत से ज्यादा व्यस्त रहता है। इससे उन पर थकान हावी हो जाती है। बोर्ड रोटेशन पद्धति के हिसाब से खिलाडिय़ों को आराम दे। ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड रोटेशन को लेकर काफी सख्त है। वह अपने खिलाडिय़ों को जरूरत से ज्यादा क्रिकेट नहीं खेलने देता है। बीसीसीआई को उससे सबक लेना चाहिए।
  • थक गए हैं धोनी : श्रीकांत
    चयन समिति के पूर्व मुखिया के. श्रीकांत अब खुलकर कह रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी घरेलू टेस्ट सीरीज में धोनी को कप्तानी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धोनी अब थक गए हैं और उनसे टेस्ट कप्तानी छीन लेने का समय आ गया है। उन्हें सिर्फ टी-20 में नेतृत्व संभालना चाहिए। टेस्ट में गंभीर और वनडे में कोहली को आजमाया जा सकता है।
    टीम को फिर से शीर्ष पर पहुंचने में लगेंगे 10 साल : आलम
    पूर्व पाक कप्तान इंतिखाब आलम का मानना है कि टीम इंडिया अभी संघर्ष के दौर से गुजर रही है और उसे फिर से शीर्ष पर पहुंचने में 10 साल भी लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि सचिन (वनडे), द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे सितारों के संन्यास के बाद टीम लडख़ड़ा गई है। जब आप तीन या चार विश्व स्तरीय खिलाडिय़ों को खो देते हैं, तो ऐसी स्थिति बनना स्वाभाविक है। किसी के पास जादू की छड़ी नहीं है, जो इससे तुरंत उबर जाए।
    दबाव में बिखर गई है धोनी ब्रिगेड : अब्बास
    जहीर अब्बास के अनुसार धोनी ब्रिगेड इन दिनों दबाव में है। उन्होंने कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन के कारण ऐसी स्थिति बन जाती है। जब आप स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हों, तो खिलाड़ी दबाव में गलतियां कर बैठते हैं। टीम के बल्लेबाज रन नहीं बना पा रहे हैं और इससे टीम की परेशानी बढ़ रही है। मेरे हिसाब से बोर्ड को थोक के भाव में बदलाव करने से बचना चाहिए।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: india pak match 2013
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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