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BIG QUESTION: फास्ट बॉलिंग के आगे क्यों फिसड्डी हैं हमारे गेंदबाज और बल्लेबाज?

Dainikbhaskar.com | Jan 09, 2013, 11:21 IST

  • खेल डेस्क. टेस्ट सीरीज में 2-1 की धमाकेदार जीत दर्ज कर इतिहास रचने वाली इंग्लैंड की टीम अब वनडे मैचों में मेजबान टीम इंडिया को टक्कर देने को तैयार है। एलिस्टर कुक की अगुवाई वाली इंग्लैंड टीम टिम ब्रेसनन, स्टीवन फिन, स्टुअर्ट ब्रॉड और जेम्स एंडरसन जैसे तेज गेंदबाजों के साथ एकदिवसीय मुकाबलों में उतरेंगे।
    फास्ट बॉलिंग के लिए बेजान पिचों पर इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन ने टेस्ट सीरीज के दौरान शानदार परफॉर्मेंस दिया था। उन्होंने न पिच का बहाना बनाया, ना ही परिस्थितियों का रोना रोया। सही लाइन लेंथ को रफ्तार के साथ मिला कर एंडरसन ने मेजबान टीम को धूल चटा दी।
    भारतीय टीमपिछले साल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर बुरी तरह पिट कर लौटी थी। वहां की तेज उछाल वाली पिचों पर बल्लेबाज तो रफ्तार के आगे ढेर हो रहे थे, लेकिन हमारे फास्ट बॉलर्स मददगार पिचों पर भी विकेट लेने की जगह रन लुटा रहे थे।
    कुछ ऐसा ही सीन भारतीय पिचों पर भी देखने को मिला। इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन से लेकर पाकिस्तान के युवा तेज गेंदबाज जुनैद खान और मोहम्मद इरफान ने मेजबान टीमके दिग्गज बल्लेबाजों को दिन में तारे दिखाए। गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग को समझ नहीं आ रहा था कि गेंद कहां से निकल कर किस ओर जा रही है। पिछले साल जम कर रन बनाने वाले विराट कोहली भी क्वालिटी फास्ट बॉलिंग के सामने बेबस हो गए थे।
    फास्ट बॉलिंग में ऐसी क्या खास बात है कि सबसे ज्यादा अमीर क्रिकेट बोर्ड होने के बावजूद बीसीसीआई के पास क्वालिटी फास्ट बॉलर्स का अकाल रहता है। बल्लेबाज को डराने वाली रफ्तार और सटीक लाइन लेंथ के मामले में भारतीय गेंदबाज हमेशा गच्चा खा जाते हैं।
    वहीं दूसरी ओर पड़ोसी पाकिस्तानमें खराब पिच और बेकार इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद हर दूसरा गेंदबाज 100 की रफ्तार से बॉल डालता है।
    dainikbhaskar.com ने आंकड़ों और पिछले कुछ परफॉर्मेंसेस को जब पलट कर देखा तो बल्लेबाजों और गेंदबाजों में कुछ विशेष कमियां सामने आईं।
    आगे क्लिक कर जानिए, आखिर क्यों फास्ट बॉलिंग इतने सालों से बनी हुई हैं टीम इंडिया के लिए हव्वा...
  • कपिल-जहीर के बाद नहीं मिला कोई बॉलर
    आपको यह बात जान कर हैरानी होगी कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कोई भी ऐसा फास्ट बॉलर नहीं हुआ जो कि विपक्षी बल्लेबाज में अपना खौफ पैदा कर सके। कपिल देव ने रिकॉर्डतोड़ विकेट जरूर चटकाए, लेकिन वे मध्यम तेज गेंदबाजों की श्रेणी में रहे।
    जहीर खान ने करियर की शुरुआत रफ्तार भरी गेंदों से की, लेकिन चोटिल हो जाने के डर से उन्होंने धीरे-धीरे रफ्तार की कुर्बानी दे दी। वे विकेट टू विकेट बॉलिंग और रिवर्स स्विंग पर डिपेंड करने लगे।
    टेस्ट मैचों में कपिल देव ने 434 विकेट और वनडे में में 253 विकेट झटके। जहीर खान 10 साल के टेस्ट करियर में 295 विकेट ले सके हैं। वनडे में भी उनके आंकड़े कुछ खास नहीं। जहीर ने वनडे में 269 विकेट चटकाए हैं।
    वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज ने भारत से कहीं बेहतर तेज गेंदबाज प्रोड्यूस किए हैं।
  • बल्लेबाज भी तो हैं फ्लॉप
    फास्ट बॉलिंग में टीम इंडिया की परेशानी सिर्फ गेंदबाजों तक सीमित नहीं। मददगार पिचों पर जहां बॉलर्स विकेट नहीं निकाल पाते, वहीं भारतीय बल्लेबाज भी क्वालिटी फास्ट बॉलिंग के आगे फ्लॉप हो जाते हैं। विराट कोहली से लेकर गौतम गंभीर तक की तकनीक की पोल पाकिस्तानी जुनैद खान और मोहम्मद इरफान ने खोल कर रख दी।
    एक दो गेंदों पर रन न बनने से भारतीय बल्लेबाज बेचैन से हो जाते हैं। रन बनाने की जल्दबाजी में वे गलत शॉट खेल कर अपना विकेट गंवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के युवा बल्लेबाज नासिर जमशेद ने अपनी तकनीक से सभी को प्रभावित किया। भुवनेश्वर कुमार और शमी अहमद जो कि थोड़ा दबाव बना रहे थे, उनके आगे जमशेद दबे नहीं। उन्होंने बिना घबराए आराम से अपना खेल दिखाया। इसी तकनीक ने उन्हें लगातार मैचों में शतक लगाने में मदद की, लेकिन मेजबान बल्लेबाज तकनीक के मामले में पीछे दिखे।
    दुनिया की सबसे तेज विकेट पर्थ की वाका पर रिकी पोंटिंग ने सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया है। ऑस्ट्रेलिया की इस पिच पर पोंटिंग ने 38.60 की औसत से 965 रन बनाए। इस पिच पर टिक कर खेलने की तकनीक ने उन्हें दुनिया भर की पिचों पर रन बनाने के लिए तैयार किया।
    इसी तकनीक की कमी भारतीय बल्लेबाजों में साफ देखने को मिलती है। सचिन तेंडुलकर और राहुल द्रविड़ को छोड़ कर आज तक कोई भी दिग्गज इस मामले में अपनी छाप नहीं छोड़ सका। यदि टीम इंडिया को मिशन वर्ल्ड कप 2015 के लिए टीम को तैयार करना है, तो तेज गेंदबाजी के खिलाफ बल्लेबाजों की तकनीक पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है।
  • पिचें हैं बेजान, कहां से आएंगे तेज गेंदबाज
    फास्ट बॉलिंग में करियर बनाने के लिए सबसे जरूरी होता है युवा गेंदबाज के अंदर कॉन्फिडेंस पैदा करना। लेकिन भारतीय पिचें उनके हौसलों को तोड़ने का काम करती हैं। रणजी जैसे घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंटों के दौरान बल्लेबाजों के मुफीद पिचें बनाई जाती हैं। या तो पिचें बल्लेबाजों के लिए जन्नत होती हैं, या फिर स्पिन गेंदबाजों को सपोर्ट करती हैं। लेकिन एक स्टेंडर्ड विकेट जिस पर तीनों के लिए मदद मिल सके, ऐसी पिचें तैयार नहीं की जातीं।
    ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के हर मैदान का मिजाज लगभग तय है। पर्थ के वाका मैदान को दुनिया के सबसे उछाल भरी पिच कहा जाता है। लेकिन भारत में किसी भी मैदान के मिजाज को भांपा नहीं जा सकता।
  • नहीं मिलती सही ट्रेनिंग
    बीसीसीआई के पास अपने तेज गेंदबाजों को ट्रेन करने का सही सिस्टम नहीं है। बोर्ड आईपीएल जैसे महंग टूर्नामेंट्स से कमाई तो खूब करता है, लेकिन इसका कितना हिस्सा भारतीय क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने में जाता है, यह सोचनीय है।
    भारतीय क्रिकेट में गेंदबाज अपनी किस्मत और मेहनत से आगे बढ़ते हैं। प्रतिभावान तेज गेंदबाजों का पूल बना कर उनकी तकनीक सुधारने और रफ्तार व सटीकता बढ़ाने पर बोर्ड ने कभी ध्यान नहीं दिया। वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में क्रिकेट के हर डिपार्टमेंट के लिए अलग से ट्रेनिंग पूल होते हैं।
    बॉलर्स अकसर ज्यादा से ज्यादा तेज गेंदें फेंकने के प्रयास में लाइन और लेंथ गंवा देते हैं। जब धीरे-धीरे यह फॉर्मूला फेल होता है तो वे रफ्तार से समझौता कर विकेट टू विकेट बॉलिंग पर आ जाते हैं। लेकिन रफ्तार के साथ सही लाइन और लेंथ पर कंट्रोल कैसे किया जाए, इस बात की ट्रेनिंग उन्हें नहीं मिल पाती।
    जहीर खान और इरफान पठान इस बात का अच्छा उदाहरण हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में एंट्री के बाद इन दोनों गेंदबाजों की तुलना दिग्गज गेंदबाज वसीम अकरम और वकार यूनिस से की गई थी। लेकिन आगे चल कर दोनों ने ही रफ्तार से समझौता कर लिया। मुनाफ पटेल और श्रीसंथ की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही।
    वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के जुनैद खान की बात करें, तो उन्होंने तेज गेंदबाजी के लिए मददगार परिस्थितियों का मेजबान टीम के बॉलर्स से बेहतर इस्तेमाल किया। जिस पिच पर जुनैद ने मेजबान का स्कोर 29 पर 5 विकेट कर दिया था, वहीं भारतीय गेंदबाज विकेट के लिए तरसते रहे।
    जेम्स एंडरसन ने भी टेस्ट सीरीज के दौरान ऐसा ही कारनामा करके दिखाया था। ट्रेनिंग के अंतर ने दोनों टीमों में बड़ा फासला पैदा कर दिया।
  • फेल हो गई चेन्नई पेस फाउंडेशन
    चेन्नई में एमआरएफ पेस फाउंडेशन ने भारतीय तेज गेंदबाजी में थोड़ी जान फूंकी थी। 1987 में की गई मरहूम रवि मेमन और ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज डेनिस लिली की इस पहल ने भारत को जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद, जहीर खान, इरफान पठान और श्रीसंथ जैसे स्टार गेंदबाज दिए। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि इनमें से कोई भी गेंदबाज अपनी रफ्तार को कायम नहीं रख सका। अब इस फाउंडेशन को ग्लेन मैकग्राथ देखते हैं, लेकिन यह फाउंडेशन भारतीय तेज गेंदबाजी को सही दिशा नहीं दे पा रहा।
    नतीजा, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की मददगार पिचों पर भी भारतीय तेज गेंदबाज विकेट नहीं ले रहे।
  • क्या है सॉल्यूशन?
    बीसीसीआई फास्ट बॉलिंग को बढ़ावा देने के लिए पोटेंशियल फास्ट बॉलर्स का एक पूल तैयार कर सकता है। इन बॉलर्स को मैरिट के आधार पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे तेज गेंदबाजी के मुफीद पिचों पर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाए। डोमेस्टिक क्रिकेट में फास्ट बॉलर्स के लिए स्पेशल विदेशी कोच होने चाहिए, जो कि उन्हें सही तकनीक सिखा सकें। रफ्तार के साथ लाइन और लेंथ पर कंट्रोल कैसे किया जाता है? बैट्समैन को छकाने के लिए बॉलिंग में वैरिएशन कैसे लाया जा सकता है, इसकी बेसिक तकनीक खिलाड़ियों को सिखाई जानी चाहिए।
    2015 में वर्ल्ड कप का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में होगा। वहां की पिचों पर कैसे सही तकनीक के साथ तेज गेंदबाजी की जाए, इसके लिए 10-12 तेज गेंदबाजों का पूल तैयार किया जा सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज और पाकिस्तान बनाम भारतीय गेंदबाज
    पाकिस्तान
    टेस्ट
    वसीम अकरम - 414
    वकार यूनिस - 373
    इमरान खान - 362
    शोएब अख्तर - 178
    सरफराज नवाज - 177
    उमर गुल - 158
    वनडे
    अकरम - 502
    यूनिस - 416
    अब्दुल रज्जाक - 268
    अख्तर - 241
    इमरान - 182
    गुल - 161
    ऑलओवर
    अकरम - 916
    वकार - 789
    इमरान - 544
    अख्तर - 438
    रज्जाक - 388
    गुल - 388
  • ऑस्ट्रेलिया
    टेस्ट
    मैकग्राथ - 563
    डेनिस लिली - 355
    ब्रेट ली - 310
    मैकडरमॉट - 291
    गिलेस्पी - 259
    वनडे
    ब्रेट ली - 380
    मैकग्राथ - 380
    मैकडरमॉट - 203
    ओवरऑल
    मैकग्राथ - 948
    ली - 718
    मैकडरमॉट - 494
    लिली - 458
    मिचेल जॉनसन - 415
    गिलेस्पी - 402
  • वेस्ट इंडीज
    टेस्ट
    कर्टनी वॉल्श - 519
    कर्टली एम्ब्रॉस - 405
    मेल्कम मार्शल - 376
    जोएल गार्नर - 259
    वनडे
    वॉल्श - 227
    एम्ब्रॉस - 225
    ओवरऑल
    वॉल्श - 746
    एम्ब्रॉस - 630
    मार्शल - 533
    गार्नर - 405
    माइकल होल्डिंग - 391
  • भारत
    टेस्ट
    कपिल देव - 434
    जहीर खान - 295
    श्रीनाथ - 236
    वनडे
    श्रीनाथ - 315
    अगरकर - 288
    जहीर - 269
    कपिल - 253
    ओवरऑल
    कपिल - 687
    जहीर - 581
    श्रीनाथ - 551
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: india vs england ODI fast bowling problem in indian cricket
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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