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PHOTOS: नागपुर में आया धोनी को गुस्सा, भूल गए पिछला 'ऐहसान' सारा

Dainikbhaskar.com | Dec 17, 2012, 11:11 IST

  • खेल डेस्क. टीम इंडिया नागपुर में अपनी नाक बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। धोनी ब्रिगेड के अंदर अचानक से फाइटिंग स्पिरिट पैदा हो गई है। टीम के खिलाड़ी छोटी-छोटी बात पर उलझ रहे हैं।
    रविवार को जॉनेथन ट्रॉट के खिलाफ की गई कॉट बिहाइंड की अपील को ठुकरा दिया गया। इसी साल बेस्ट अंपायर का अवार्ड जीतने वाले श्रीलंका के कुमार धर्मसेना गेंद के बल्ले से टकराने की आवाज नहीं सुन सके और उन्होंने इंग्लैंड के बल्लेबाज को नॉट आउट करार दे दिया।
    इस बात पर टीम इंडिया के विराट कोहली और आर अश्विन का पारा चढ़ गया। वे अंपायर और ट्रॉट से जम कर बहस करने लगे। यही नहीं, इस फैसले से खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी थोड़े नाराज दिखे और अंपायर से बहसबाजी करने पहुंच गए।
    इस सीन को देख कर इंग्लैंड के दिग्गज जोर-जोर से हंस रहे थे। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड ने चुटकी लेते हुए ट्विटर पर कहा, "बीसीसीआई चाहता है कि सभी फैसले अंपायरों पर छोड़ दिए जाएं। फिर चाहे वे गलत हो या सही, खिलाड़ी उनके फैसलों को आंख बंद कर स्वीकार कर लें। यह बात शायद उनकी टीम के खिलाड़ियों को नहीं पता।"
    सीरीज में एशियाई अंपायरों का परफॉर्मेंस दोयम दर्जे का रहा है। श्रीलंका के धर्मसेना तो जैसे इंग्लिश टीम के लिए विलेन बन कर सीरीज में उंगली उठाते रहे। लेकिन मेहमान टीम ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। वे चुपचाप अपना काम करते रहे और शिकायत करे से बचते रहे।
    लेकिन मेजबान टीम के खिलाड़ी शायद इस बात को नोटिस नहीं कर सके। अगर ऐसे फैसले यदि भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ विदेशी टूर पर दिए जाते, तो अब तक तो अंपायर रावण की उपाधि पा चुके होते। देश की सड़कों पर खिलाड़ियों के साथ-साथ नस्लीयभेद के आरोपों के साथ अंपायरों के भी पुतले जल रहे होते।
    आगे क्लिक कर देखिए, सीरीज में कब-कब इंग्लैंड को मिली 'सजा'
  • धोनी का चढ़ा पारा, कोहली ने दिखाया गुस्सा
    इंग्लैंड की दूसरी पारी के 62वें ओवर में इशांत शर्मा की गेंद जॉनेथन ट्रॉट के बल्ले का किनारा लेते हुए धोनी के दस्तानों में चली गई। धोनी को पूरा विश्वास था कि उन्होंने सही कैच लपका है और ट्रॉट आउट हैं। लेकिन श्रीलंकाई अंपायर कुमार धर्मसेना आवाज नहीं सुन सके और उन्होंने ना में सिर हिला दिया।
    अंपायर के इस फैसले से धोनी को गुस्सा आ गया। वे तुरंत उनसे बात करने पहुंच गए। यही नहीं, विराट कोहली भी इस बहस में कूद पड़े और ट्रॉट से भी तूतू-मैंमैं करने लगे।
  • भूल गए पिछले ऐहसान
    ट्रॉट के खिलाफ कॉट बिहाइंड की अपील ठुकराए जाने से कप्तान धोनी गुस्से में आ गए। लेकिन शायद मेजबान कप्तान यह भूल गए थे कि पहले दो विकेट उन्हें भीख में मिले हैं।
    पूरी सीरीज में धर्मसेना ने अपने अधिकतर फैसले भारत के पक्ष में ही दिए हैं। मोंटी पानेसर से लेकर एलिस्टर कुक तक को उनके खराब फैसलों का शिकार होना पड़ा।
  • कप्तान कुक हुए थे शिकार
    इंग्लैंड की दूसरी पारी में कप्तान एलिस्टर कुक खराब फैसले का शिकार हो कर पवेलियन लौटे थे। आर अश्विन की गेंद पर कुक के खिलाफ कॉट बिहाइंड की अपील की गई थी, लेकिन रिप्ले में देखने को मिला कि गेंद उनके बल्ले से काफी दूर से निकली थी। कुक को खराब अंपायरिंग के कारण महज 13 रन के स्कोर पर पवेलियन लौटना पड़ा।
  • पहली पारी में भी हुए थे शिकार
    एलिस्टर कुक पहली पारी में भी गलत अंपायरिंग का शिकार हुए थे। तब इशांत शर्मा की गेंद पर उन्हें गलत LBW दिया गया था। रिप्ले में साफ दिखा था कि गेंद स्टंप्स की लाइन में बिल्कुल भी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें आउट दे दिया गया।
  • मोंटी पानेसर को भी दिया था गलत आउट
    धर्मसेना ने कोलकाता में हुए टेस्ट मुकाबले में मोंटी पानेसर को गलत ढंग से LBW आउट दिया था। गेंद उनके पैड पर लगने से पहले बल्ले से टकराई थी। इसके बावजूद उन्हें आर अश्विन की अपील पर आउट करार दिया गया।
  • ट्रॉट नहीं हैं इतने सीधे
    इंग्लैंड के जॉनेथन ट्रॉट उतने सीधे नहीं जितना इंडियन प्लेयर्स उन्हें समझ रहे थे। एक भारतीय स्पोर्ट्स लेखक ने ट्रॉट पर चुटकी लेते हुए ट्विटर पर लिखा, "भारत को अब तक यह पता होना चाहिए कि ट्रॉट सिर्फ जमीन पर लग चुके कैच लपकने का ही दावा करते हैं। वे कभी बल्ले का किनारा लगने वाले कैचों पर अपनी मर्जी से पवेलियन नहीं लौटते।"
  • मच जाता बवाल
    इंग्लैंड को इस सीरीज में जितना खराब अंपायरिंग से रूबरू होना पड़ा, यदि वैसा भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ हुआ होता, तो यकीनन अंपायर को नस्लीय करार दे दिया गया होता। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया टूर के दौरान कुछ गलत अंपायरिंग फैसलों पर जम कर बवाल मचा था। लेकिन इंग्लैंड की टीम ने भारत में ऐसा कुछ नहीं किया।
    सीरीज में यूडीआरएस का न होना, यह बीसीसीआई का ही फैसला था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने एक गलत फैसले पर हंगामा मचाया।
  • क्यों भड़क रहे हो धोनी?
    सीनियर स्पोर्ट्स पत्रकार अयाज मेमन ने इस पूरे वाकये पर कहा है, "भारतीय खिलाड़ियों को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए कि उन्हें दूसरी पारी में एलिस्टर कुक और कॉम्पटन के विकेट मिल गए। ये दोनों विकेट खराब अंपायरिंग का नतीजा थे, बॉलर्स की मेहनत का नहीं। इसलिए ट्रॉट के पक्ष में दिए गए एक गलत फैसले पर इतना भड़कना सही नहीं।"
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: ms dhoni angry over trott decision by umpire
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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