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POST MORTEM: इन 10 कारणों से घर पर भी शर्मसार हो रही है टीम इंडिया

Dainikbhaskar.com | Jan 04, 2013, 06:39 IST

  • खेल डेस्क. कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन मैदान पर पाकिस्तान ने दूसरे वनडे में 85 रन से जीत दर्ज की। इस पराजय के साथ ही मेजबान वनडे सीरीज गंवा बैठा। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी टीम के इस प्रदर्शन से शर्मसार हैं। न तो उन्हें यह समझ आ रहा है कि टीम एकाएक हारने क्यों लगी, ना ही बीसीसीआई को इस बात की चिंता है। टेस्ट के बाद टी-20 और अब वनडे में भी टीम को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। लेकिन एक टीवी चैनल पर आ रही खबर के मुताबिक कोलकाता में हार के बाद टीम में दरार सामने आ गई है। ईडन पर हार के बाद ड्रेसिंग रूम में न तो कप्‍तान धोनी और न ही कोच डंकन फ्लेचर ने टीम के अन्‍य खिलाडियों से बात की। स्‍टेडियम से होटल जाते समय कप्‍तान धोनी उस बस में भी नहीं देखे गए जिस बस में पूरी टीम सवार थी। जो खिलाड़ी बस में सवार थे, वो भी आपस में बात करते नहीं दिखे।
    ताजा हार के बाद एक बार‍ फिर धोनी की कप्‍तानी पर सवाल उठने लगे हैं और तत्‍काल टीम को नया कप्‍तान देने की जरूरत बताई जाने लगी है। गुरुवार की हार के बाद कई खेल विशेषज्ञों ने ऐसी राय जाहिर की। मोहिंदर अमरनाथ ने कहा कि बोर्ड को अब कप्‍तान बदलने में देर नहीं करनी चाहिए, क्‍योंकि असली लक्ष्‍य 2015 का वर्ल्‍ड कप जीतना होना चाहिए। (भारत नहीं आएंगे मियांदाद)
    कोलकाता की पिच शुरुआती ओवरों में बेहतरीन रही। पाकिस्तान के ओपनर्स नासिर जमशेद और मोहम्मद हफीज ने मिल कर यहां जम कर रन बटोरे। लेकिन भारतीय पारी के समय मिस यूनिवर्स जैसी दिखने वाली पिच अचानक से क्रूर सिंह बन गई। भारतीय बल्लेबाज एक-एक रन के लिए संघर्ष करते दिखे। ऐसा लग रहा था मानो टीम इंडिया घर पर नहीं, बल्कि पर्थ की वाका विकेट पर खेल रही है।
    जुनैद खान और मोहम्मद इरफान की रफ्तार से लेकर मोहम्मद हफीज, सईद अजमल और शोएब मलिक की स्पिन तक ने मेजबान टीम के बल्लेबाजों को परेशान किया। वो तो शुक्र था कि कप्तान धोनी के पचासे ने टीम को 100 रन के अंतर से नहीं हारने दिया। धोनी (54) के अलावा कोई अर्द्धशतक नहीं बना पाया। सहवाग (31), गंभीर (11), कोहली (6), युवराज (9) और रैना (18) फ्लॉप साबित हुए। इसीलिए धोनी आसानी से बल्‍लेबाजों पर ठीकरा फोड़ते हुए जिम्‍मेदारी अपने सिर लेने से बच गए। लेकिन पूर्व पाकिस्‍तानी कप्‍तान इमरान खान ने कहा कि भारतीय टीम दोहरी दबाव में आ गई थी। एक तो पाकिस्‍तानी गेंदबाजों का दबाव था और दूसरा, बड़े स्‍कोर का। इमरान ने कहा कि बाद में बल्‍लेबाजी करने का धोनी का फैसला गलत था।
    आगे क्लिक कर जानिए, आखिर क्यों अब घर में भी हार रहे हैं धोनी के धुरंधर...
  • घरेलू पिचों पर भी नहीं बन रहे रन
    पिछले साल टीम इंडिया के शेर विदेशी पिचों पर रन बनाने के लिए तरस रहे थे। तकनीक की खामी को मानने की जगह तेज उछाल भरी पिचों को बहाना बनाया जा रहा था। लेकिन अब जब टीम घरेलू पिचों पर खेल रही है तब भी उसके बल्ले खामोश हैं। वीरेंद्र सहवाग से लेकर सुरेश रैना और विराट कोहली तक सभी लगातार फेल हो रहे हैं।
    कहा जा रहा था कि सचिन तेंडुलकर के टीम में रहने से युवा बल्लेबाजों के रास्ते रुके हुए हैं। लेकिन कोई भी युवा रन बनाने में सफल नहीं हो पा रहा। विदेशी पिचों पर वनडे में शतक लगाने वाले विराट कोहली घरेलू पिचों पर 50 का आंकड़ा तक नहीं छू पा रहे। कभी स्पिन तो कभी रफ्तार के आगे वे घुटने टेक देते हैं।
    यही हाल गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग का है। टीम के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में शुमार ये दोनों लगातार फ्लॉप हो रहे हैं। दिसंबर 2011 में ऐतिहासिक दोहरा शतक लगाने के बाद से वनडे में वीरू का बल्ला शांत है। हंबनतोता में 96 रन के अलावा वे पिछली 12 पारियों में 50 का आंकड़ा पार नहीं कर पाए।
  • स्पिनर्स में भी नहीं रहा दम
    स्पिन गेंदबाजी भारतीय टीम का मजबूत पक्ष माना जाता रहा है। अनिल कुंबले से लेकर भगवत चंद्रशेखर तक इंडियन स्पिन अटैक की शान रहे हैं। लेकिन मौजूदा खेंप में यह दम नहीं दिख रहा। आर अश्विन ने अपने करियर की बेहतरीन शुरुआत की थी। वेस्ट इंडीज और न्यूजीलैंड जैसी कमजोर टेस्ट टीमों के खिलाफ विकेट निकाल कर वे हरभजन सिंह के स्थान पर टीम के स्टार बन तो गए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद पाकिस्तान ने भी उनकी हेकड़ी निकाल दी।
    टेस्ट सीरीज के दौरान अश्विन इंग्लिश बैट्समैन के विरुद्ध बेअसर रहे। यही सिलसिला टी-२० और वनडे में भी जारी रहा। कभी टीम के मैच विनर रहे अश्विन रन रोकने में भी नाकाम हो रहे हैं।
  • आईपीएल पर ध्यान डोमेस्टिक पर नहीं
    पाकिस्तानी टीम के पास कभी भी तेज गेंदबाजों की कमी नहीं रही। एक जाता है तो दूसरा उसकी जगह लेने को तैयार हो जाता है। मैच फिक्सिंग के बाद मोहम्मद आमिर और आसिफ पाकिस्तानी टीम से जब अलग हुए तो लग रहा था कि पाकिस्तानी फास्ट बॉलिंग कमजोर हो जाएगी, लेकिन मोहम्मद इरफान और जुनैद खान ने अपना दम दिखा कर नई उम्मीद जगा दी।
    सवाल यह है कि जब पाकिस्तान के पास भारत से कमजोर इंफ्रास्ट्रकचर होने के बावजूद ऐसे धुरंधर तेज गेंदबाज आते कहां से हैं।
    जवाब है बीसीसीआई का खेल से ज्यादा पैसों पर ध्यान होना। बोर्ड ने आईपीएल शुरू कर घरेलू क्रिकेट को किनारे कर दिया। हालांकि, रणजी ट्रॉफी के फॉर्मेट में बदलाव कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश तो हुई, लेकिन वह भी असफल साबित हुई। आईपीएल पर अधिक ध्यान देने का ही नतीजा है कि भारतीय बेंच स्ट्रेंथ इस समय और टीमों के मुकाबले सबसे कमजोर है।
    टीम से सचिन तेंडुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे धुरंधरों की विदाई तो हुई, लेकिन कौन से खिलाड़ी उनकी जगह ले सकते हैं यह अभी तक तय नहीं हो सका। खिलाड़ी डोमेस्टिक लेवल पर तो परफॉर्म कर जाते हैं, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर वे औंधे मुंह गिर जाते हैं। रवींद्र जडेजा और रोहित शर्मा इसका परफेक्ट उदाहरण हैं। ये दोनों खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट्स में जम कर रन बटोरते हैं, लेकिन इंटरनेशनल लेवल के बॉलर्स के सामने ये भीगी बिल्ली साबित होते हैं।
  • क्या कर रहे हैं कोच
    टीम इंडिया में जिस व्यक्ति की मौजूदगी सबसे ज्यादा फैन्स को हैरान करती है वह हैं टीम के कोच डंकन फ्लेचर। फ्लेचर न तो टीम के युवाओं को उनकी गलतियों से अवगत करवा पा रहे हैं, ना ही वे विपक्षी टीम के कमजोर और मजबूत पक्ष खोज कर उसकी काट निकाल पा रहे हैं।
    मैदान पर टीम में प्लानिंग की कमी साफ नजर आती है। किसी खिलाड़ी को जैसे उसकी जिम्मेदारी पता ही नहीं। बल्लेबाज लगातार एक ही गलती कर आउट हो रहे हैं। वहीं गेंदबाज भी लगातार गलत लाइन और लेंथ पर बॉलिंग कर रहे हैं। या तो फ्लेचर खिलाड़ियों को समझा नहीं पा रहे, या फ्लेचर की बात खिलाड़ियों की समझ से परे है।
    ऐसे में सौरव गांगुली के टीम का कोच बनाए जाने की जरूरत बढ़ती जा रही है।
  • बैटिंग लाइन अप पर क्यों कन्फ्यूज्ड हैं धोनी
    बैटिंग ऑर्डर टीम इंडिया के लिए एक और परेशानी है। कप्तान धोनी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि वे क्रम में पहले आएं या बाद में। कोलकाता वनडे में धोनी जब तक क्रीज पर आए तब तक मैच लगभग हाथ से निकल चुका था। जब धोनी का फॉर्म और खिलाड़ियों से बेहतर है तो वे बैटिंग ऑर्डर में ऊपर क्यों नहीं आए। मैच के बाद पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी यही सवाल उठाया था। रवींद्र जडेजा के स्थान पर उन्होंने आर अश्विन को पहले उतारा। इसके पीछे की रणनीति भी समझ से बाहर है।
  • धोनी अक्‍सर पिच का रोना रोते हैं, लेकिन ईडन के पिच की उन्‍होंने तारीफ की थी। इसके बावजूद टीम का यह हाल हुआ। इसलिए अब बहानेबाजी के बजाय खेल पर ध्‍यान लगाना ही होगा।

    पांच साल बाद भारत आई पाकिस्तानी टीम भारत के लिए सवा सेर साबित हुई। न तो मेजबान टीम पाकिस्तान के बल्लेबाजों को काबू कर पाई, ना ही मेहमान टीम के गेंदबाजों को खेल सकी। नतीजा, सीरीज 0-2 से गंवा दी। ईडन में लगातार यह भारत पर पाकिस्‍तान की चौथी जीत रही।

  • टीम इंडिया के पास मैच फिनिशर की कमी है। टीम की इस हार ने कुछ अहम सवाल खड़े किए हैं। पिछले साल जब टीम इंडिया इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में हारी थी तो कप्तान से लेकर हर सीनियर खिलाड़ी तक ने यही कहा था कि घर पर तो हम भी शेर हैं। लेकिन ये कागजी शेर घर पर भी ढेर हो गए।

  • गुरुवार को ईडन गार्डन में टीम एफर्ट नहीं दिखा। कप्तान धोनी 54 रन पर नाबाद रहे, लेकिन इसके लिए उन्होंने 89 गेंदें खेलीं। धोनी ने स्लॉग ओवरों में जुनैद की गेंद पर एक छक्का व तीन चौके मारे, लेकिन तब तक काफी देर हो गई थी। भारतीय टीम की बल्लेबाजी इतनी खराब रही कि 23.2 ओवर से 40 ओवर तक किसी बल्लेबाज ने चौका नहीं जड़ा। 40.1 ओवर में जाकर धोनी ने इरफान की गेंद पर चौका मारा। धीमी बल्लेबाजी के कारण ही भारत की आवश्यक रन संख्या प्रति ओवर 18.86 हो गई थी, जबकि भारतीय सूरमा 3.16 प्रति ओवर की रेट से रन बना रहे थे। पाक गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल से विकेट झटकते हुए भारतीय पारी को परवान नहीं चढऩे दिया।

  • तेज गेंदबाज हो रहे फेल
    जैसा हाल भारत के बल्लेबाजों का है कुछ वैसी ही स्थिति गेंदबाजों की भी है। जिस पिच पर मेहमान टीमों के तेज गेंदबाज आसानी से विकेट निकाल रहे हैं, उन्हीं पिचों पर हमारे पेसर्स लगातार पिट रहे हैं। फिर चाहे बात टेस्ट की हो या फिर वनडे की, कहानी हर जगह एक सी ही है। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में जहीर खान सरीके अनुभवी तेज गेंदबाजा फेल हुए। उनकी जगह टीम में लाए गए युवा इशांत शर्मा की भी जम कर धुनाई हुई।
    वनडे में भुवनेश्वर कुमार की स्विंग देख कर थोड़ी उम्मीद जागी, लेकिन मददगार पिच पर उनकी नाकामी ने एक बार फिर निराश कर दिया। अशोक डिंडा के लिए कोलकाता घरेलू मैदान था। उसी पिच पर खेल कर वे क्रिकेट की एबीसीडी सीखे हैं। फिर भी वे यहां बेदम दिखे और एक भी विकेट नहीं निकाल सके।
    वहीं, पाकिस्तान के फास्ट बॉलर्स ने कंडीशन्स का बखूबी इस्तेमाल किया। सटीक लाइन और लेंथ के साथ रफ्तार के कॉम्बिनेशन ने मेजबान टीम के बल्लेबाजों को जम कर परेशान किया। युवा जुनैद खान और मोहम्मद इरफान मेहमान टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए। इन्हीं दो यंगस्टर को हथियार बना कर पाकिस्तान ने भारत में वनडे सीरीज फतह कर ली।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Reasons why indian cricket team lost to pakistan in kolkata
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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