Home »Sports »Cricket »Cricket Classic» Sachin Tendulkar

सचिन तेंडुलकर के वनडे कॅरिअर की पांच बेस्‍ट पारियां

dainikbhaskar | Dec 24, 2012, 08:20 IST

  • नई दिल्‍ली। शिखर पुरुष 1989 में 16 साल के सचिन रमेश तेंडुलकर जब पाकिस्तान में क्रीज पर उतरे, तो वकार यूनुस का बाउंसर उनके हैलमेट पर लगा, नाक से खून भी आया। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि छोटे कद का यह खिलाड़ी क्रिकेट के शिखर पर पहुंचेगा और अपनी उपलब्धियों के दम पर क्रिकेट की दुनिया में राज करेगा। रविवार को जब सचिन के वनडे क्रिकेट से संन्‍यास की खबर आई, तब भी किसी ने नहीं सोचा था कि रनवीर सचिन इस तरह वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। (PHOTOS: एक रन आउट के लिए 3 बार सॉरी बोला था मास्टर ब्लास्टर ने!)
    नागपुर टेस्ट के तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर ही सचिन ने फैसला कर लिया था कि वह मैच खत्‍म होने के बाद वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर देंगे। लेकिन क्रिकेट बोर्ड से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने सलाह दी कि ऐलान से पहले अच्‍छी तरह विचार कर लें, जल्‍दबाजी में फैसला नहीं करें। तब शनिवार की शाम तक भी सचिन तेंडुलकर ने अपने वनडे क्रिकेट के भविष्य पर कोई फैसला नहीं लिया था। सचिन ने खुद को पाकिस्‍तान के खिलाफ चुनी जानी वाली टीम के लिए खुद को उपलब्‍ध रखा था, क्‍योंकि उन्‍होंने बोर्ड को अपने उपलब्‍ध नहीं होने की जानकारी नहीं दी थी। इससे पहले जब भी उन्‍हें नहीं खेलना होता था, वह पहले ही बोर्ड को फोन कर देते थे। लेकिन जब इस बार फोन नहीं गया तो मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने सचिन को फोन किया। संदीप पाटिल ने सचिन को बताया था कि चयनकर्ता मानते हैं कि सचिन का वनडे करियर पूरा हो गया है और अब वह उन्हें टीम में एक और मौका देने की गारंटी नहीं दे सकते। पाटिल ने सचिन को यह भी बताया था कि वो उन्हें टीम से निकालना नहीं चाहते लेकिन उन्हें टीम में बनाए रखना भी मुश्किल काम है। पाटिल ने बताया था कि कई युवा क्रिकेटर टीम में स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बोर्ड की प्राथमिकता 2015 वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करने की है। PICS: सचि‍न को कि‍या है डक पर आउट, मि‍लि‍ए इंडि‍यन टीम के उभरते सि‍तारे से
    पाटिल ने सचिन को यह भी सलाह दी थी कि वो वनडे क्रिकेट से आगे बढ़ने के बारे में सोचें। संदीप पाटिल से बात करने के बाद सचिन तेंडुलकर ने वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया। सूत्रों से यह भी पता चला है कि संन्यास की घोषणा से पहले सचिन ने बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन से भी बातचीत की।
    सचिन नागपुर टेस्‍ट के बाद ही निराश थे। उन्‍होंने अपना फोन तक बंद कर लिया था। वह किसी से बात नहीं कर रहे थे। उनसे बात करने का मात्र एक ही जरिया था- पत्‍नी अंजलि का फोन। और यह बेहद करीबी लोगों के लिए ही मुमकिन था। इस बीच सचिन ने एकांत में और परिवार के साथ ही ज्‍यादातर वक्‍त बिताया। (पढ़ें- सचिन होने का मतलब)
    बताया जाता है कि सचिन पर एक तरह से संन्‍यास का दबाव काफी बढ़ गया था। नागपुर टेस्‍ट के बाद जब वह मुंबई के लिए विमान में बैठे तो उन्‍हें सुनील गावस्‍कर से बातचीत करते हुए देखा गया था। गावस्‍कर का कहना है कि सचिन ने यह फैसला दबाव में लिया है।
    सचिन के खराब फॉर्म को लेकर चयनकर्ता बंटे थे। पाकिस्‍तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीममें उन्‍हें रखने को लेकर पांच में से ज्‍यादातर सेलेक्‍टर्स सचिन को टीम में रखनेके खिलाफ थे। मुख्‍य चयनकर्ता संदीप पाटिल और बोर्ड अध्‍यक्ष श्रीनिवासन सचिन को टीम में रखने के पक्ष में थे, लेकिन सचिन ने हालात को देखते हुए संन्‍यास के फैसले पर अटल रहना ही बेहतर समझा।
    आगे की स्‍लाइड में पढ़ें, सचिन तेंडुलकर के वनडे कॅरिअर की पांच बेस्‍ट पारियां
    यह भी पढ़ें
  • वनडे कॅरिअर की पांच श्रेष्ठ पारियां
    200*- सचिन ने 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर में एक और कारनामा कर डाला। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे मैच में उन्होंने वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक अपने नाम किया। ये 200 रन उन्होंने 147 गेंदों पर बनाए। भारत ने यह मैच 153 रन से जीता।
    186*- हैदराबाद (1999) में न्यूजीलैंड के खिलाफ 150 गेंदों पर 20 चौके व 3 छक्कों से सजी 186 रनों की पारी खेली। भारत ने 376 रन बनाए। न्यूजीलैंड की टीम 202 रन पर आउट होकर मैच 174 रन से हार गई। सचिन तेंडुलकर को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
    143- शारजाह (1998) में कोका कोला कप मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 131 गेंदों पर 143 रन बनाए। भारत मैच हार गया। लेकिन सचिन की पारी के दम पर फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में कामयाब रहा। सचिन को मैन ऑफ द मैच का अवार्ड मिला।
    134- 24 अप्रैल 1998 को अपने 25वें बर्थडे पर सचिन ने शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल से दो दिन पहले 134 रनों की यादगार पारी खेली। सचिन ने कंगारू गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा डाली। उन्हें मैन ऑफ द मैच के साथ प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट से नवाजा गया।
    98- 2003 वर्ल्‍ड कप के सेंचुरियन मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 75 गेंदों पर 12 चौके की मदद से 98 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। भारत ने सचिन की इस पारी की मदद से 274 रन चेस कर 6 विकेट से जीत हासिल की। सचिन मैन ऑफ द मैच व प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी बने।
  • सचिन की जिंदगी के अहम पड़ाव
    1988 में शुरू किया प्रथम श्रेणी क्रिकेट
    11 दिसंबर 1988 : प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण
    18 दिसंबर 1989 : वनडे पदार्पण (विरुद्ध पाकिस्तान)
    06 अप्रैल 1992 : इंग्लिश काउंटी यार्कशायर के साथ अनुबंध
    27 मार्च 1994 : पहली बार ओपनिंग की, 82 रन ठोके (विरुद्ध न्यूजीलैंड)
    08 अगस्त 1996 : भारतीय टीम के कह्रश्वतान बने। उम्र थी 23 साल।
    31 मार्च 2001 : वनडे में 10 हजार रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने।
    फरवरी-मार्च 2003 : विश्व कप में 673 रन बनाकर ह्रश्वलेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।
    मई 2005 : टेनिस एल्बो की सर्जरी के कारण करीब पांच महीने टीम से बाहर रहे।
    मार्च 2006 : दायें कंधे की सर्जरी कराई। इंग्लैंड-इंडीज के खिलाफ नहीं खेल पाए।
    24 फरवरी 2010 : वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक जमाया (विरुद्ध द. अफ्रीका)।
    02 अप्रैल 2011 : भारत ने श्रीलंका को हरा कर वल्र्ड कप चैंपियन बना।
    18 मार्च 2012 : अपनी आखिरी पारी में 52 रन बनाए। (विरुद्ध पाकिस्तान)
    23 दिसंबर 2012 : वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा (24 दिसंबर 2012)
  • रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड
    > सर्वाधिक वनडे (463)।
    > लगातार 185 वनडे (25 अप्रैल 1990 से 24 अप्रैल 1998 तक) खेले।
    > वनडे कॅरियर में सर्वाधिक रन (18000+ रन)।
    > वनडे में सर्वाधिक शतक (4९)।
    > सर्वाधिक 90 मैदानों पर खेले।
    > किसी एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक वनडे शतक (9 शतक, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ)।
    > सबसे तेज 10000 से 18000 वनडे रन बनाने वाले।
    > सभी बड़ी टीमों के खिलाफ एक हजार से अधिक रन।
    > वनडे कैलेंडर ईयर में सात बार 1000 से अधिक रन।
    > थर्ड अंपायर द्वारा आउट दिए जाने वाले पहले क्रिकेटर
    > विभिन्न टूर्नामेंट के फाइनल में कुल 1833 रन बनाए।
    > विभिन्न टूर्नामेंट के फाइनल में 6 शतक, भारत को सभी में जीत मिली।
    > एक वनडे पारी में सर्वाधिक चौके (25 चौके, द. अफ्रीका के खिलाफ)।
    > सर्वाधिक 150+ रन (पांच बार)।
    > कॅरियर में सर्वाधिक अर्धशतक (96)।
    > 142 बार 50 से अधिक का स्कोर।
    > सर्वाधिक मैन ऑफ द सीरीज (१6)।
    > वनडे में किसी एक खिलाड़ी के साथ साझेदारी का सर्वोच्च योग (8227 रन सौरव गांगुली के साथ)
    > वनडे में ओपनर के रूप में सर्वाधिक रनों की साझेदारी (136 मैच में 6609 रन सौरव गांगुली के साथ)
    > वनडे में ओपनिंग की सर्वाधिक शतकीय साझेदारी (21, सौरव गांगुली के साथ)
    > वर्ल्‍डकप में सर्वाधिक शतक (6)
    > वर्ल्‍डकप में सर्वाधिक अर्धशतक (15)
    > वर्ल्‍डकप में सर्वाधिक रन (2000+)
    > किसी एक वर्ल्‍डकप में सर्वाधिक रन (673 रन, 2003 में)
    > दो वर्ल्‍डकप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज (523, 673 रन)।
    > वर्ल्‍डकप में तीसरे विकेट के 237*रनों की साझेदारी।
    > वनडे में 18 बार 90-100 के बीच आउट हुए।
    > 6 बार 200 से अधिक की साझेदारी।
    > आईसीसी रैंकिंग में टॉप 10 में 10 साल तक रहनेवाले एकमात्र क्रिकेटर।
    > वनडे के एक कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक शतक (9)। वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक (200* वि. द. अफ्रीका)।
    > वनडे में सर्वाधिक मैन ऑफ द मैच (62 बार)।
    > किसी भी विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी (331 रन द्रविड़ के साथ)।
    > दूसरे विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी (331, द्रविड़ के साथ, वि. न्यूजीलैंड)।
    > तीसरे विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी (237* रन द्रविड़ के साथ, वि. केन्या)
    > सर्वाधिक वनडे रन (3114 रन श्रीलंका के खिलाफ), ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3077 रन)
  • प्रबंधन के ये गुर सीखें इस क्रिकेटर से
    1. धैर्य :यदि आप में धैर्य होगा, तो कितना भी ज्यादा तनाव हो तो आप ठंडे दिमाग से उसका सामना कर सकेंगे।
    2.प्रेरणा :हर इंसान का कोई न कोई रोल मॉडल होता है। उनसे प्रेरणा लें, ताकि जीवन में तरक्की कर सकें।
    3. परिश्रम :जब भी कोई कार्य करें, उसमें सौ प्रतिशत देने की कोशिश करें।
    4. रचनात्मक : हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करें। रचनात्मक सृजन आपको आगे बढ़ाएगा।
    5. बदलाव :तरक्की के लिए बदलाव बहुत जरूरी है। यह बदलाव ही आपको आगे ले जाएगा।
    मैच विनर
    कहा जाता था कि सचिन जब बड़े स्कोर बनाते थे, तब टीम नहीं जीत पाती थी, लेकिन आंकड़ों पर नजर डाले, तो स्थिति उलट है। सचिन ने 49 में से 33 शतक जीत वाले मैच में लगाए। जब भी टीम जीती, तब सचिन ने 56 या अधिक रन बनाए और वह भी 90 की स्ट्राइक रेट से। इसका एक सबूत यह भी है कि सचिन से ज्यादा मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड (62) किसी ने नहीं जीते। जयसूर्या दूसरे नंबर (48) पर हैं।
    ग्रेट पार्टनर
    सचिन ने गांगुली के साथ जोड़ीदार के रूप में 8227 रन बनाए हैं। इनमें से 26 शतकीय साझेदारियां (वनडे-टेस्ट) भी शामिल हैं। उन्होंने सहवाग के साथ 4387 व द्रविड़ के साथ 4117 रन जोड़े। भारत ने वनडे में अब तक कुल 95,765 रन बनाए हैं। इनमें से 19.24 प्रतिशत रन (18426 रन) सचिन के बल्ले से निकले हैं।
  • सचिन का यह कैसा ब्‍लास्ट
    मास्टर ब्‍लास्टर सचिन तेंडुलकर के वनडे क्रिकेट से संन्यास ने दिसंबर की ठंड में भी गर्माहट ला दी। देश भर में चर्चा है कि आखिर सचिन ने क्यों एकाएक संन्यास की घोषणा की। क्या उन्होंने बीते कई सालों से हो रही आलोचनाओं से दुखी होकर संन्यास लिया या फिर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में असफलता ने उन्हें किसी एक फॉर्मेट से हटने के लिए मजबूर किया। सचिन की घोषणा की किसी को हवा तक नहीं लगी।
    नागपुर टेस्ट के दौरान सचिन के संन्यास के कयास जरूर लगाए जा रहे थे लेकिन न ही बीसीसीआई और न ही स्वयं सचिन ने इसका कोई संकेत दिया। रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया का चयन हुआ। उ?मीद की जा रही थी कि सचिन इस टीम का हिस्सा होंगे। माना यही जा रहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ सदैव सफल रहने वाले सचिन ताजे सीरीज के माध्यम से फॉर्म की वापसी करेंगे। क्रिकेट विशेषज्ञ गावसकर व कपिलदेव भी सचिन को यही सुझाव दे रहे थे। क्रिकेट जगत में यह माना जा रहा था कि यदि सचिन लगातार खेलते रहे तो वे पहले जैसे फॉर्म में आ सकते हैं। सचिन यदि खेलते तो कंपनियों के व्यापारिक हित भी पूरे होते लेकिन सचिन ने सबको दुखी कर दिया। सचिन के मुख्‍य चयनकर्ता संदीप पाटिल से मधुर संबंध हैं। वे पाटिल को विश्वास में लेकर कह सकते थे कि एक और सीरीज में स्वयं को आजमाना चाहता हूं। सचिन के संन्यास के बाद तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। कहा जा रहा है कि संभवत: सचिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बाद संन्यास ले लेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि सचिन ने किसी दबाव में संन्यास लिया होगा। वैसे मेरा मानना है कि लगातार की असफलता से ही सचिन ने कुंठित होकर संन्यास लिया होगा।
    वैसे देखा जाए तो सचिन पिछले कई सालों में चुनिंदा वनडे सीरीज में ही खेलते रहे। उन्होंने वनडे से ज्यादा ध्यान टेस्ट में दिया था। यह कहा जा सकता है कि वे वनडे कॅरियर को घसीट रहे थे। गत वर्ष वल्र्डकप समाप्त होने के बाद से सचिन वनडे में कभी फिटनेस नहीं होने या खराब फॉर्म के कारण अपना नाम वापस लेते रहे हैं। सचिन वनडे मे चमत्कारिक प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं। हालांकि पिछले कई सालों से वे अपने जादुई प्रदर्शन को दोहराने के लिए तरसते रहे हैं। सचिन ने पिछले दिनों यह कह भी दिया था कि वे सीरीज दर सीरीज अपने प्रदर्शन का आंकलन करेंगे तभी संन्यास का फैसला लेंगे। सचिन ने अपना यह वादा पूरा किया। यह और बात है कि उन्होंने मैदान में हजारों दर्शकों की उपस्थिति में संन्यास लेने के वजाय टेलीफोन से सूचना भेजना ज्यादा उचित समझा।
    अब यह प्रश्न वाजिब है कि आखिर सचिन कब टेस्ट से संन्यास लेंगे। हम सिर्फ अनुमान ही लगा सकते हैं क्योंकि सचिन तो हवा भी नहीं लगने देते हैं। एक अनुमान यह है कि सचिन यदि अब रणजी मैचों में खेलते हैं तो इसका तात्पर्य होगा कि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलेंगे। अब सचिन के नए धमाके के लिए हमें फरवरी तक इंतजार करना होगा।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Sachin Tendulkar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From Cricket Classic

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top