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PHOTOS: कैसा दर्द सहकर सूमो पहलवान बनते हैं चैंपियन, जानिए पूरा सच

Dainikbhaskar.com | Jan 14, 2013, 11:32 IST

  • खेल डेस्क. सूमो पहलवान का नाम तो सुना ही होगा आपने। इस नाम को सुनते ही जहन में एक पहाड़नुमा पहलवान की तस्वीर जहन में तैर जाती है। सबको यह लगता है कि उनकी लाइफ मस्ती से भरी होती होगी। जो मर्जी आए खाओ, जब चाहो तब सो जाओ। कोई रोक टोक नहीं।
    लेकिन हकीकत इससे बहुत अलग है।
    सूमो पहलवान की जिंदगी क्रिकेटर और फुटबॉलर जैसे खिलाड़ियों से भी कहीं ज्यादा कठिन होती है। इस स्पोर्ट में माहिर बनने के लिए जो समर्पण और बलिदान पहलवानों को देना पड़ता है, वह दर्द कोई नहीं जानता।
    dainikbhaskar.com अपने पाठकों के लिए लाया है इस खेल के खिलाड़ियों की जिंदगी और ट्रेनिंग से जुड़े खास फैक्ट्स।
    आगे क्लिक कर देखिए, कैसे-कैसे दर्द को झेल कर सूमो पहलवान बनते हैं चैंपियन
  • सूमो पहलवानों की जिंदगी ग्लैमर से दूर एक बौद्ध भिक्षु जैसी होती है। वे समाज से दूर रह कर गुजर-बसर करते हैं। जिस प्रकार से घोड़ों की जिंदगी अस्तबल तक सीमित रहती है और रेस में दौड़ना उनका एकमात्र लक्ष्य, ठीक वैसे ही सूमो पहलवान की जिंदगी बंधनों में बंधी होती है।

  • जिस अस्तबल में सूमो पहलवान रहते हैं उसे जापानी भाषा में 'हेया' कहा जाता है। अपनी पूरी लाइफ वे यहीं गुजारते हैं।

  • हर अस्तबल का अपना एक इतिहास है। सूमो पहलवान की पहचान उसके अस्तबल से होती है। वे उसकी प्रतिष्ठा और सम्मान के लिए फाइट्स में उतरते हैं।

  • सूमो एसोसिएशन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। रिंग में फाइट से लेकर आम जिंदगी तक, हर काम उन्हें नियमों के अनुसार ही करना होता है।

  • सूमो पहलवानी की फाइट पहलवान दो तरीकों से जीत सकते हैं। या तो वे अपने प्रतिद्वंद्वी को उठा कर बाहर फेंक दें, या उसके शरीर के किसी भी अंग (पैरों के अलावा) को जमीन पर स्पर्श करवा दें।

  • पहलवानों की जिंदगी पर एसोसिएशन की तानाशाही चलती है। उनकी हेयरस्टाइल, कपड़े पहनने का तरीका, वे कैसे दिखते हैं, क्या खाते हैं और समाज में किससे मिलते हैं, इन सब बातों में संघ की हुकूमत चलती है।

  • जापान में सूमो पहलवान होना गर्व की बात माना जाता है। इसमें व्यक्ति की फिटनेस और कद-काठी देखी जाती है। एक अस्तबल में बने रहने के लिए पहलवानों को कठिन डाइट और एक्सरसाइज शेड्यूल को फॉलो करना होता है।

  • सूमो पहलवानों के खान-पान पर खास ध्यान दिया जाता है। उन्हें एक निश्चित समय और मात्रा में ही भोजन दिया जाता है। कौन सा पहलवान क्या और कितना खाएगा इस बात का फैसला उनके सुपरवाइजर करते हैं।

  • संघ द्वारा बनाए किसी भी नियम को तोड़ना पहलवान के लिए महंगा साबित हो सकता है। यदि कोई भी पहलवान नियमों को तोड़ता है तो उस पर गलती की गंभीरता के अनुसार जुर्माना लगाया जाता है। कभी-कभी तो उन्हें निलंबित तक कर दिया जाता है।

  • पहलवान रिंग के अंदर और बाहर कैसे दिखते हैं, इसको लेकर सूमो एसोसिएशन ने कड़े नियम बना रखे हैं। उन्हें बाल लंबे रखने के निर्देष रहते हैं।

  • पब्लिक के बीच पहलवानों को जापानी ट्रेडीशनल ड्रेस पहनना होता है। जिससे उनकी पहचान आसानी से हो सके।

  • रिंग के अंदर पहलवान अपनी रैंक के मुताबिक कपड़े पहनते हैं। रैंक जितनी ऊंची होती है, सूमो पहलवान के कपड़े उतने ही अलग होते हैं।

  • सूमो पहलवानी रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज पहलवान को योकोजूना बुलाया जाता है। योकोजूना आमतौर पर फाइट्स के दौरान अपनी कमर पर रस्सी बांधते हैं। ऊंची रैंकिंग वाले पहलवानों को नियमित तन्ख्वाह और एक्स्ट्रा एलाउएंस दिए जाते हैं।

  • अस्तबल में जूनियर पहलवानों का दिन सीनियर्स से पहले शुरू होता है। उन्हें ज्यादा मेहनत करनी होती है।

  • पहलवानी के साथ ही खिलाड़ियों को साफ-सफाई, कुकिंग और अस्तबल की देखभाल भी करना होता है। रैंकिंग में नीचे काबिज पहलवान इन सब बातों का ध्यान रखते हैं।

  • सूमो पहलवानी के इतिहास में 70 पहलवानों को योकोजूना की उपाधि मिल सकी है।

  • मंगोलिया के हरुमाफुजी कोहेई हाल ही में योकोजूना की रैंक दी गई थी। वर्तमान में सक्रिय दो योकोजूना में उनका नाम भी शुमार है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: life of a sumo wrestler in pictures
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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