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ढाई दिनों तक दुनिया का पेट भर सकता था 'कोहिनूर', यहां मिला था हीरा

dainikbhaskar.com | Apr 21, 2017, 20:44 IST

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सुप्रीम कोर्ट ने कोहिनूर हीरे को यूके से वापस लाने या नीलामी रोकने से इनकार कर दिया है।

आगरा.दुनिया का सबसे बेशकीमती हीरा कोहिनूर को यूके से वापस लाने या नीलामी रोकने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। इस फैसले की वजह से कोहि‍नूर के बारे में हर कोई जानना चाहता है। यह हीरा आगरा के किले के खजाने में हुमायूं को मिला था। dainikbhaskar.com आपको इसके इतिहास के बारे में बता रहा है।
ढाई दिनों तक दुनिया का पेट भर सकता था 'कोहिनूर'
- साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया। इसे जीतने पर बड़े पैमाने पर खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था।
- बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था।
- 10 मई 1526 को जब बाबर स्‍वयं आगरा पहुंचा, तो हुमायूं ने कोहिनूर हीरा उसे भेंट किया, लेकिन बाबर ने हीरा हुमायूं को वापस लौटा दिया। इसके बाद यह हीरा मुगल खजाने में रख दिया और वहां की शोभा बढ़ाता रहा।
- बाबरनामा के मुताबिक, इस हीरे को देखकर हुमायूं की आंखें चौंधिया गई थीं।
क्या कहते हैं इतिहासकार
- डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर सुगम आनंद कहते हैं कि हुमायूं के हमले के वक्‍त यह किला राजा विक्रमादित्‍य के कब्‍जे में था।
- राजा के प्रतिनिधि किलेदार ने जानमाल की सुरक्षा का आश्‍वासन पाकर किला मुगलों को सौंप दिया था।
- बाबरनामा में इस हीरो की तोल 36 माशा लिखी हुई है। इसका मूल्‍य दुनिया के आधे दिन के व्‍यय के बराबर बताया गया है।
- इतिहासकार राजकिशोर राजे ने अपनी बुक तवारीख-ए-आगरा में लिखा है, बाबर जब आगरा पहुंचा तो उसने खजाने को देखा। यहां खजाने के भंडार को देखते ही उसने जश्‍न मनाने का विचार बनाया।
- आगरा और ग्‍वालियर में इतनी संपत्ति लूटी गई कि उसने अपने प्रमुख सरदारों को 6 लाख से 10 लाख रुपए की लागत के सिक्‍के प्रदान किए।
- बाबर ने हर सैनिक और शिविर रक्षक तक को इस लूट में हिस्‍सा दिया। मुस्लिम तीर्थ स्‍थलों जैसे मक्‍का, मदीना, हिरात, समरकंद आदि को बहुमूल्‍य भेंट भी भेजी।
- इसी क्रम में काबुल के प्रत्‍येक निवासी स्‍त्री, पुरुष और बच्‍चों तक के लिए एक-एक चांदी का सिक्‍का भेजा गया।
- ईरान में अपने मित्रों और रिश्‍तेदारों को बहुमूल्‍य उपहार भेजे। बाबर ने सारा धन बांटकर अपने लिए इतना कम धन रखा कि लोग मजाक में उसे कलंदर तक कहने लगे।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर बंद की सुनवाई
- बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने यूके से कोहिनूर हीरा वापस लाने या इसकी नीलामी पर रोक लगाने के लिए ऑर्डर जारी करने से इनकार कर दिया है।
- चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अगुआई वाली बेंच ने कहा, "हम इस बारे में कोई आदेश नहीं दे सकते, कोर्ट विदेशी सरकार को इसे नीलाम नहीं करने को भी नहीं कह सकता।" इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई बंद करने का आदेश दिया।
कैसे इंग्लैंड पहुंचा कोहि‍नूर हीरा
- औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे।
- 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया।
- नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहनूर हीरा शूजा शाह के हाथों से होते हुए महाराजा रंजीत सिंह तक पहुंचा।
- महाराजा रंजीत सिंह ने इसे उड़ीसा के पुरी के जगन्नाथ मंदिर को दान देने का विचार किया, लेकिन 29 मार्च 1849 को लाहौर में ब्रिटिश कब्जा हो गया और पंजाब भी ब्रिटिश हकूमत का हिस्सा बन गया।
- इसके बाद लाहौर संधि के अनुसार कोहनूर हीरा महाराजा रंजीत सिंह से लेकर इंग्‍लैंड की महारानी तक पहुंचा दिया।
आगे की 3 स्लाइड्स में देखें आगरा किले की फोटोज...
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Web Title: facts about Kohinoor Diamond
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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