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शाहजहां ने कटवाए थे 20 हजार कारीगरों के हाथ, जानें सबसे बड़े झूठ का सच

dainikbhaskar.com | Apr 22, 2017, 10:57 IST

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ताजमहल में 23 से 25 अप्रैल तक बादशाह शाहजहां का उर्स होगा।

आगरा.ताजमहल में 23 से 25 अप्रैल तक बादशाह शाहजहां का उर्स होने वाला है। ताज के दीवानों को शाहजहां और मुमताज की असली कब्र देखने को मिलेगी। यहां आने वाले पर्यटक अपने गाइड से सबसे ज्यादा सवाल '20 हजार कारीगरों के हाथ काटने' के बारे में करते हैं। dainikbhaskar.com आपको इसके बारे में बता रहा है। पढ़ें जानकारों की नजर में क्या है कारीगरों के हाथ कटवाने का सच...
- दरअसल, ताजमहल आकर हर कोई अपने गाइड से कहता है शाहजहां बेरहम था और उसने ताज के 20 हजार मजदूरों के हाथ कटवा दिए गए थे। लेकिन, इतिहासकारों की नजर में यह बात झूठ है।
- डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर सुगम आनंद कहते हैं कि शाहजहां ने ताजमहल के निर्माण के बाद कारीगरों से आजीवन काम न करने का वादा लिया था। इसके बदले में जिंदगी भर वेतन दिए गए थे।
- अपने हाथों के हुनर का काम करने से रोक देने को दूसरे शब्‍दों में हाथ काटना कहा गया। शाहजहां ने ताजमहल के पास मजदूरों के लिए ताजगंज नाम से बस्‍ती बसा दी थी।
हर पर्यटक करता है सवाल
- गाइड एसोसिएशन के शमशुद्दीन खान ने बताया, हर पर्यटक ने उनसे मजदूरों के हाथ काटने का सवाल करता है। वह कहते हैं कि ताजमहल की प्रसिद्धि के साथ-साथ यह झूठ काफी तेजी से फैला है।
- इतिहास के विशेषज्ञों के अनुसार, कई कारीगरों और आर्किटेक्ट को ताजमहल के साथ-साथ दिल्‍ली के लाल किला के निर्माण में भी लगाया गया था।
- ताजमहल के निर्माण के अंतिम दौर में खास आर्केटिक्‍ट अहमद लाहौरी ने लाल किला के निर्माण में हिस्‍सा लिया था। वह अपनी टीम के साथ दिल्‍ली पहुंचे थे।
- शाहजहां ने 400 साल पहले ताजगंज नाम से बड़ी बस्‍ती बसाई थी। ताजमहल के निर्माण के वक्‍त मजदूर और आर्किटेक्‍ट विशेषज्ञों यहीं रहते थे। अब ये कालोनियां आबादी बढ़ने के साथ-साथ अपना रूप बदल चुकी हैं।
- अब भी यहां पर उन मजदूरों के वंशज यहां रह रहे हैं। यहां के निवासी ताहिर उद्दीन ताहिर का कहना है कि उन्‍हें गर्व है कि उनके पूर्वजों ने ताजमहल बनाने में हिस्‍सा लिया।
- यहां आने वाले पर्यटक उनसे पूछते हाथ काटने की अफवाह के बारे में पूछते हैं। बार-बार पर्यटकों को बताना पड़ता है कि यह झूठ है। ताहिर ने बताया यदि यह अफवाह सही होती तो पूर्वजों से इसके बारे में पता चलता।

ताज का नक्‍शा बनाने वाले को मिलती थी 1 हजार रुपए सैलरी
- शाहजहां को इमारतें बनवाने का शौक था। ताज पहली इमारत थी, जिसका निर्माण उन्‍होंने कराया।
- दूरदराज से तमाम बेहतरीन कारीगर पैसों के लालच में आगरा में आकर बस गए थे।
- भारत ही नहीं अरब पर्सिया और तुर्की से वास्‍तुविदों, मिर्ताणकर्ताओं और पच्‍चीकारी के कलाकारों को बुलाया गया था।
- ताज का नक्‍शा बहुतों ने बनाया, लेकिन शाहजहां को उस्‍ताद ईसा आफदी का डिजाइन पसंद आया।
- जबकि पत्‍थरों पर शब्‍द उकेरने का काम अमानत खान शिरजी को सौंपा गया।
- शाहजहां इन दोनों को काम के बदले 1 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी देता था, जोकि उस समय बहुत ज्‍यादा थी।
- आफदी के साथ चार अन्‍य लोगों को नक्‍शे के काम के लिए समान वेतन पर रखा गया था।

तुर्की के कारीगर ने बनाया था ताज का गुंबद
- तुर्की के कारीगर इस्माइल खान को ताज का गुंबद बनाने की जिम्‍मेदारी मिली थी।
- इसके लिए उन्हें 500 रुपए प्रति महीने सैलरी मिलती थी।
- वहीं, 200 रुपए महीने पर लाहौर के कासिम खान ने कलश बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
- मनोहर लाल मन्नू को 500 रुपए प्रति महीने में पच्चीकारी का काम सौंपा गया था।
- गुंबद तैयार करने की जिम्मेदारी तुर्की के कारीगर इस्माइल खान को मिली और इसके लिए उन्हें 500 रुपए महीना पर रखा गया।
- 200 रुपए महीने पर लाहौर अब पकिस्तान के कासिम खान ने कलश बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
- मनोहर लाल मन्नू लाल मोहन लाल को 500 रुपये माह में पच्ची कारी का काम सौंपा गया।
आगे की स्लाइड्स में देखें ताजमहल की 4 फोटोज...
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Web Title: Mughal emperor Shah Jahan urs to celebrates at taj mahal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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