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सचिवालय की RO-ARO भर्ती में लगा धांधली के आरोप, इव‍िव‍ि में प्रवक्ता के खाली पदों को भरने का निर्देश

dainikbhaskar.com | May 18, 2017, 20:57 IST

  • सचिवालय की RO-ARO भर्ती में लगा धांधली के आरोप, इव‍िव‍ि में प्रवक्ता के खाली पदों को भरने का निर्देश
    इलाहाबाद यून‍िवर्स‍िटी। फाइल
    इलाहाबाद.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी विधानसभा सचिवालय में आरओ और एआरओ के 107 पदों की भर्ती में घपले की जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव विधानसभा को जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति ए.पी.शाही तथा न्यायमूर्ति डी.एस. तिवारी की खंडपीठ ने इलाहाबाद के दीपक कुमार राय व 18 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता राजेश्वर सिन्हा व समीर श्रीवास्तव ने बहस की।
    याची का कहना है कि पूर्व विधानसभाअध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के निर्देश पर विधानसभा सचिवालय में 47 समीक्षा अधिकारी व 60 सहायक समीक्षा अधिकारियों कुल 107 पदों को भरने का विज्ञापन निकाला गया। 18 अक्टूबर 16 को परिणाम घोषित हुआ। लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार लिया गया। एक दिन चार पैनलों ने 278 अभ्यर्थियों का कुल 1113 लोगों का चार दिन में साक्षात्कार लिया गया। याची का कहना हैकि न्यूनतम आयु 21 वर्ष थी, जबकि सौरभ सिंह को 19 साल की उम्र में ही नियुक्त कर दिया गया। चयनित लोगों में कई विधानसभा अध्यक्ष के रिश्तेदार हैं। चयन परीक्षा की अन्तिम सूची में जिनका नाम शामिल नहीं था, उन्हें भी नियुक्ति दे दी गई। 18 अक्टूबर 16 को चयन परिणाम घोषित किया गया और 24 घंटे में कई की 19 अक्टूबर 16 को ज्वाइनिंग करा दी गई। 20 अक्टूबर तक सभी की ज्वाइनिंग हो गई। याची का कहना है कि चयन में आरक्षण नियमों को भी लागू नहीं किया गया। सिद्धार्थनगर के तेरह लोगों की नियुक्ति की गई है। याचिका में प्रमुख सचिव, विधायी व विधानसभा के अलावा 45 नियुक्त कर्मचारियों को भी पक्षकार बनाया गया था। याचिका निस्तारित हो गई है।

    2. इलाहाबाद यून‍िवर्स‍िटी में प्रवक्ता के खाली पदों को भरने का निर्देश

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवक्ता के खाली पदों की भर्ती करने का निर्देश दिया है। साथ ही कार्यरत अतिथि प्रवक्ताओं को सत्रांत तक ही कार्य करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को अध्यादेश 44 का कड़ाई से पालन करने का भी निर्देेश दिया है। कोर्ट ने अतिथि प्रवक्ताओं की सेवा नियमित करने की मांग अस्वीकार कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति ए.पी. शाही और न्यायमूर्ति डी.एस. त्रिपाठी की खंडपीठ ने भूगोल विभाग के डॉ. महेन्द्र शंकर सिंह व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।
    मालूम हो कि विश्वविद्यालय में प्रवक्ताओं की मानदेय पर नियुक्ति की गई। पद खाली रहने पर कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। नियमानुसार नियुक्ति वर्ष से अगले तीन वर्ष तक ही अतिथि प्रवक्ता रह सकते हैं। 20 जनवरी 2001 को यह अवधि एक साल कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आधार पर अतिथि प्रवक्ता को हटाकर दूसरे अतिथि प्रवक्ता को रखना उचित नहीं माना जा सकता। विश्वविद्यालय मनमानी नहीं कर सकता जिसको चाहे रखे, जिसको चाहे हटा दे। नियुक्तियां विश्वविद्यालय परिनियमावली के अनुरूप ही की जा सकती है। 1995 से गैस्ट फैकल्टी बनी तभी से अतिथि प्रवक्ता नियुक्त हो रहे हैं। कोर्ट ने कार्यरत अतिथि प्रवक्ताओं को सत्रांत तक वेतन देने का भी आदेश दिया है। विश्वविद्यालय अगले सत्र से अध्यादेश 44 का कड़ाई से पालन करके। तथा भारत सरकार निर्धारित समय के भीतर प्रवक्ताओं का चयन पूरा करे। तदर्थ नियुक्ति भी अध्यादेश व स्टैच्यूट के विपरीत न हो। याचिका निस्तारित कर दी गई है।

    3. पुराने नियम से होगी दरोगा पर मृतक आश्रितों की भर्ती
    पुलिस विभागों में मृतक आश्रित कोटे के तहत उपनिरीक्षकों की भर्ती पुरानी नियमावली के तहत ही की जाएगी। हाईकोर्ट ने एकल न्यायपीठ के इस आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अपील खारिज कर दी है। प्रदेश सरकार ने 19 अगस्त 2015 को नयी नियमावली लागू कर चयन प्रक्रिया की शर्ताें में कुछ बदलाव कर दिए थे। संशोधन लागू होने से पूर्व आवेदन कर चुने अभ्यर्थियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची विक्रांत तोमर और अन्य के अधिवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर एवं इंस्पेक्टर सर्विस रूल्स 08 के तहत हर अभ्यर्थी के लिए 35 मिनट में 4.8 किलोमीटर की दौड़ अनिवार्य थी।
    प्रदेश सरकार द्वारा लागू नई नियमावली से इसका समय घटाकर बीस मिनट कर दिया गया। मृतक आश्रित कोटे में भर्ती के लिए पुलिस विभाग ने 14 अक्टूबर 2014 को कट आफ डेट घोषित की थी। सभी जिलों से आवेदन मंगाए गए। पुलिस मुख्यालय में आवेदन पहुंचने के बाद 17, 18 और 19 अगस्त 2015 के 423 अभ्यर्थियों की दौड़ कर ली गई। जिन अभ्यर्थियों के आवेदन 14 अक्टूबर 2014 के बाद और 19 अगस्त 15 से पहले पहुंचे थे इन पर नई नियमावली लागू की जा रही है। एकल पीठ ने इस निर्णय को खारिज करते हुए पुराने नियम से भर्ती कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार ने विशेष अपील दाखिल की। न्यायमूर्ति वी.के. शुक्ला और न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए पुरानी नियमावली के तहत भर्ती करने का आदेश दिया है।
    4. हाईकोर्ट जमीन पर अतिक्रमण-टीम को मौके मुआयना कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
    इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में अतिक्रमण कर मस्जिद बनाने के खिलाफ याचिका पर दोनों पक्षों को मौके पर शनिवार 20 मई को निरीक्षण करने का कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों व दोनों पक्षकारों को मौके का निरीक्षण कर सोमवार 22 मई को रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या न्यायालय की बन रही बिल्डिंग के चारों तरफ अग्निशमन गाड़ी पहुंचने में किसी प्रकार का अवरोध तो उत्पन्न नहीं हो रहा है। इस बात पर भी बल दिया गया कि भवन के चारों तरफ अग्निशमन गाड़ी निर्बाध रूप से आ जा सके। अभिषेक शुक्ल की याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डी.बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ कर रही है।


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Web Title: high court order to filling vacant posts of spokesman in allahabad university
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