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इस स्कूल में चलता है बैंक, पॉकेट मनी बचाकर छात्र जमा करते हैं पैसे

dainikbhaskar.com | Apr 21, 2017, 15:04 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

यूपी के कानपुर जिले में इस सराकरी स्कूल में चलता है मनीबैंक।

कानपुर. यूपी के कानपुर जिले में एक ऐसा सरकारी स्कूल है, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ पॉकेट मनी के बचत के बारे में बताया जाता है। स्कूल में एक मनी बैंक चलता है, जिसमें छात्र अपने पॉकेट मनी को स्वेच्छा से जमा करते हैं। इस बैंक को चलाने वाले छात्र-छात्राएं ही हैं। एक छात्र मैनेजर, तो 4 क्लर्क का काम करते हैं। यहां रुपए का लेनदेन एक बैंक की तरह ही किया जाता है।

2009 में खुला था मनीबैंक, कम से कम 10 रुपए करना होता पड़ता है जमा


- स्कूल की प्रिंसिपल शशि मिश्रा ने बताया- गांव के बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए साल 2009 में स्कूल में मनी बैंक की शुरुआत की। छात्रों को पैसे का महत्व बताया और पैसा जमा करने के लिए स्कूल में एक बैंक खोलने की योजना बच्चों के सामने रखी।
- मनी बैंक को लेकर छात्रों में बहुत उत्सुकता थी। छात्र घर से मिलने वाले 1-2 या 5 रुपए को खर्च करने के बजाय मनी बैंक में जमा करने लगे हैं। करीब 4 महीने में ही बैंक में छात्रों ने 2 हजार रुपए जमा कर दिए।
- बैंक की मैनेजर बनी छात्रा सपना ने बताया- यह बैंक हफ्ते में एक दिन शनिवार को खुलता है, जिसमें सभी छात्र-छात्राएं हफ्ते भर के पॉकेट मनी जमा करते हैं। कम से कम 10 रुपए जमा करना होता है। बैंक में मैनेजर के पद पर उस छात्र को रखा जाता है, जिसकी गणित में अच्छा होता है।
- सपना ने बताया- सभी छात्रों को बैंक का सदस्य बनाकर उनका पासबुक बनाया जाता है। इसमें छात्र का नाम, पिता का नाम, पता, कांटेक्ट नंबर लिखे जाते हैं।


बैंक से ऐसे निकाल सकते हैं पैसा


- सपना के मुताबिक, पैसा निकालने का कोई दिन तय नहीं है, छात्र जब चाहे बैंक से अपनी जरुरत के हिसाब से पैसा निकाल सकता है। पैसा निकालने के लिए छात्र को एक सादे कागज पर अपना नाम, पता और धनराशि की जानकारी देनी होती है।
- पैसा निकालने से पहले छात्रों को प्रिंसिपल शशि मिश्रा से मिलकर अपनी जरुरत को बताना पड़ता है। कारण पढ़ाई से जुड़े होने पर ही छात्रों को पैसा निकालने की अनुमति दी जाती है। प्रिंसिपल की परमिशन के बाद मैनेजर उस पर्ची पर साइन कर देता और क्लर्क छात्र को धनराशि दे देता है। रुपए निकालने और जमा करने के बाद पासबुक में इंट्री भी की जाती है।


पैरेंट्स बोले- बच्चों की बदल गई आदत, अब फालतू खर्च नहीं करते पैसे


- प्रिंसिपल शशि मिश्रा ने बताया- साल 2008 में कटारी के शंकरपुर गांव में इस स्कूल प्रदेश सरकार ने खुलवाया था। शुरुआत में यहां सिर्फ 17 छात्र-छात्राओं ने एडमिशन लिया था। आज के समय में स्कूल में 172 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं।
- स्कूल के आसपास करीब 4 गांव मिलाकर 12 से 14 हजार की आबादी है, जिसमें ज्यादातर गरीब परिवार हैं।
- स्कूल में पढ़ने वाली संध्या के पिता मेघनाथ कहते हैं- मुझे जब इस मनीबैंक के बारे में पता चला, तो थोड़ा अटपटा लगा। लेकिन जब बेटी ने बताया कि वो अपने पॉकेट मनी को बैंक में जमा करेगी और पढ़ाई की जरुरत के लिए रुपए निकाल सकेगी, तो खुशी हुई।
- सबसे अच्छी बात ये है कि इस स्कूल से निकलने के बाद छात्रों को उनका पूरा जमा रुपया वापस कर दिया जाता है, जोकि आगे की पढ़ाई में काम आता है। पहले बेटी अपनी पॉकेट मनी को फालतू चीजों को खरीद कर उड़ा देती थी। लेकिन अब वह पैसे बचाने लगी है।


आगे की स्लाइड्स में 7 फोटोज में देखें कैसे चलता है बैंक...


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Web Title: money bank run by students in this school
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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