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22Yr की ये लड़की चाहती है इच्छामृत्यु, जगह से हिल भी नहीं सकती मां-बेटी

dainikbhaskar.com | May 21, 2017, 09:33 IST

  • यूपी के कानपुर में रहने वाली 22 साल की अनामिका और उसकी मां शश‍ि इच्छा मृत्यु चाहती हैं।
    कानपुर. यूपी के कानपुर जिले में एक मां और बेटी को ऐसी बीमारी है, जिससे वह चलना तो दूर एक जगह से हिल भी नहीं सकतीं। ऐसी लाचार जिंदगी से छुटकारा पाना के लिए दोनों केंद्र और राज्य सरकार से इच्छा मृत्यु चाहती हैं। उनका है कि जब कोई मदद नहीं कर सकता तो इच्छा मृत्यु की अनुमति ही दे दे।
     
      इस बीमारी का इंडिया में नहीं कोई इलाज, ऐसे हाल में मां-बेटी


    - कानपुर के यशोदा नगर के शंकराचार्य इलाके में 22 साल की अनामिका अपनी मां शशि मिश्रा के साथ रहती हैं।
    - वह बताती हैं- इनको और इनकी मां को मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी है। इसकी जानकारी 1995 में उस समय हुई, जब मां को अचानक चलने-फिरने और काम करने में परेशानी होने लगी।
    - डॉक्टर मुकुल शर्मा ने टेस्ट कराने को कहा। रिपोर्ट में यह बीमारी निकली। डॉक्टरों का कहना है कि इसका इंडिया में कोई इलाज नहीं है। बस एक फिजियोथेरेपी सहारा है, जिससे कुछ आराम मिल सकता है।  
    - उसी समय डॉक्टर ने मेरे अंदर भी इस बीमारी के होने के संकेत दे दिए थे। साथ ही कहा था कि आगे चलकर मुझे ज्यादा दिक्कत हो सकती है।
    - साल 2002 में पापा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मां को तो पहले से ही बीमार थी, 2006 के बाद मेरे अंदर भी बीमारी के लक्षण आने लगे। हाथ-पैर काम करना बंद हो गए। कॉलेज में सीढियां चढ़ाना मुश्किल होने लगा।
    - किसी तरह मैंने बीकॉम किया। लेकिन उसके बाद से मैं पूरी तरह से बिस्तर पर आ गई। कई डॉक्टर से इलाज कराया, कुछ असर नहीं हुआ। पिता के देहांत के बाद घर की आर्थ‍िक स्थ‍िति भी बिगड़ने लगी।  
    - बीमारी की वजह से सारे रिश्‍तेदारों ने भी नाता तोड़ दिया। अब हम मां-बेटी की हालत ये है कि बाथरूम तक जाने के लिए सहारा चाहिए, जिसमें पड़ोस मदद करते हैं। पड़ोसी ही खाना बनाकर देते हैं।


    PMO को लिखा था लेटर- मदद करो या इच्छा मृत्यु दे दो, लेकिन...


    - अनामिका कहती है- जिल्‍लत भरी इस जिंदगी से परेशान होकर साल 2014 में पीएम मोदी को लेटर लिखकर मदद की गुहार लगाई थी। हमने अपने लिए इलेक्ट्रॉनिक बेड और व्‍हील चेयर के साथ नौकरी की मांग की थी। ताकि हमें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
    - इसके अलावा लेटर में मांग पूरी न करने पर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की बात कही थी। लेकिन पीएम ऑफिस से कोई मदद नहीं मिली। यही नहीं, हमने उसके बाद कई बार अपनी बीमारी को लेकर रिमाइंडर भी भेजा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।- करीब डेढ़ साल बाद मेरे पास PMO से फोन आया और कहा गया कि हम अपनी बीमारी के लिए प्रदेश के सीएम से मदद मांगे, वहीं मदद करेंगे।  
    - सीएम अखिलेश यादव ने 5 अगस्‍त 2016 को विवेकाधीन कोष से हमे 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी, उसके बाद हमारी कोई सूचना नहीं ली।
    - हमारी आर्थ‍िक स्थ‍िति को देखते हुए डॉक्टर अभिषेक मिश्रा पिछले 5 साल से मुफ्त इलाज कर रहे हैं। दवाई तक का भी पैसा नहीं लेते।
      डॉक्टर का क्या है कहना...


    - डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीटयूट के न्यूरोलोजिस्ट डॉ. अजय सिंह के मुताबिक, ''मस्कुलर डिस्ट्रोफी एक तरह की जेनेटिक ( आनुवंशिक) डिजीज है, जो पैरेंट्स से उसके संतान को होती है।''
    - ''देश में प्रति 2 हजार में से किसी एक को ये बीमारी होती है। अगर समय रहते पेशेंट का ट्रीटमेंट शुरू न हो, तो उसकी डेथ होने की पॉसिबिलीटीज बढ़ जाती हैं।''
    - ''मेल चाइल्ड में तो इस बीमारी की पहचान एक उम्र के बाद हो जाती है, लेकिन फीमेल में मैरिज बाद इसके बारे में जानकारी हो पाती है। जब तक फीमेल में इस बीमारी का ट्रीटमेंट शुरू हो पाता है, तब तक बहुत देर हो जाती है। डिलीवरी के बाद मां से उसके बच्चे को ये बीमारी हो जाती है।''
    - ''20 साल की उम्र तक पहुंचते ही कई पेशेंट की डेथ हो जाती है। अभी तक इस बीमारी का पूरी तरह से ट्रीटमेंट पॉसिबल नहीं हो पाया है।''


    आगे की स्लाइड्स में जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव...
     
     
     
     






  • अनामिका और उनकी मां को मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी नाम की बीमारी है।
    ये हैं लक्षण

    - मांसपेशियों कमजोर होने लगती है।
    - मांसपेशियों का विकास रुक जाता है।
    - आंखे बंद होने लगती हैं।
    - सुस्ती और कमजोरी महसूस होती है।
    - उठने-बैठने में प्रॉब्लम होती है।
    - हड्डियां कमजोर होकर टूटने लगती हैं।
    - सिर के बाल गिरने से इंसान गंजा होने लगता है।
    - कम एज (20) में इंसान उम्र दराज (50) दिखने लगता है।

    बचाव

    - प्रेंग्नेसी के टाइम नियमित जांच कराएं।
    - मोर्निग वॉक जरुर करें।
    - खान-पान पर कंट्रोल रखें।
    - साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।


    ये है बीमारी का इलाज

    डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीटयूट के डॉ. एके सिंह के मुताबिक, अभी तक मस्कुलर डिस्ट्रोफी को लाइलाज बीमारी के तौर पर ही जाना जाता था। लेकिन अब देश के कुछ बड़े हॉस्पिटल ने अपने यहां स्टेम सेल थेरेपी से इस बीमारी को ठीक करने का दावा किया है। लेकिन मेडिकल साइंस में अभी इसे पूरी तरह से मान्यता नहीं मिली है। इस बीमारी को लेकर रिसर्च जारी है।

    यहां है इलाज की सुविधा

    मस्कुलर डिस्ट्रोफी बीमारी के इलाज की सुविधा दिल्ली स्थित एम्स, मुंबई के सायन हास्पिटल, अपोलो हॉस्पिटल, पीजीआई चंडीगढ़, और बंगलौर के प्राइवेट हॉस्पिटल में मौजूद है।


    आगे की स्लाइड्स में 3 फोटोज में देखें किस हाल में रहती हैं मां-बेटी...
  • अनामिका कहती हैं- साल 2002 में पापा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मां को तो पहले से ही बीमार थी, 2006 के बाद मेरे अंदर भी बीमारी के लक्षण आने लगे।
  • पिता के देहांत के बाद घर की आर्थ‍िक स्थ‍िति भी बिगड़ने लगी। बीमारी की वजह से सारे रिश्‍तेदारों ने भी नाता तोड़ दिया।
  • मां-बेटी की हालत ये है कि बाथरूम तक जाने के लिए सहारा चाहिए, जिसमें पड़ोस मदद करते हैं। पड़ोसी ही खाना बनाकर देते हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: mother daughter wants Euthanasia due to disease
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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