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Reality check : रैन बसेरे में जड़े है ताले, ठिठुर रहा गरीब, अफसर साधे हैं छुपी

dainikbhaskar.com | Dec 02, 2016, 20:53 PM IST

कानपुर में रैन बसेरों पर लगे हैं ताले।

कानपुर.सर्दी ने अपनी दस्तक दे दी है। वहीं रैनबसेरे को लेकर प्रसाशन की लापरवाही सामने आने लगी है। dainikbhaskar.com की टीम ने शहर के 5 अलग-अलग जगहों पर बने रैनबसेरे का रियल्टी चेक किया, जिसमें कहीं ताले लटकते नजर आए तो कहीं कंबल, अलाव, चादरें नदारद दिखी। आगे पढ़िए कैसे जिम्मेदार अधिकारी झाड़ते रहे पल्ला, ठिठुर रहा गरीब...
परमट के रैन बसेरे में लटक रहा ताला
- सबसे पहले रात के 8 बजे कानपुर के परमट रैन बसेरा में पहुंची वहां पर मौजूद रैन बसेरा में ताला लगा हुआ मिला।
- पास के रहने वाले रोहित ने बताया, यह रैन बसेरा पिछले 2 महीने से बंद है।
- इसे गरीबों को ठंड, गर्मी और बरसात में आश्रय देने के लिए बनाया गया है, लेकिन ये सिर्फ अधिकारियों के मर्जी से खुलता है।
- यहां के गार्ड राजू ने बताया, अभी अधिकारियों ने इसे खोलने से मना किया है, जब कहेंगे तब जी खोला जाएगा।
- वहीं सुनीता ने बताया कि यह कभी नहीं खुलता है। यदि कभी खुल भी गया जाए तो यहां सहारा लेने आने वालों को भगा दिया जाता है।
रैनबसेरा उर्सला और डफरिन -
- रात करीब 8:30 बजे उर्सला अस्पताल पहुंचे। यहां के कैंपस में बने रैन बसेरा में भी कोई तैयारी नहीं दिखी।
- वहां सोने या बैठने का इंतजाम तो दूर की बात थी, वहां लाइट भी नहीं जल रही थी।
- अंधेरा होने की वजह से उसमें एक भी आदमी मौजूद नहीं था। साथ ही गंदगी का अबार भी लगा हुआ था।
- इसके बाद उर्सला के महिला अस्पताल डफरिन पहुंचे। यहां पर बने बसेरे में 102 और 108 एम्बुलेंस के चालक अपना कब्जा जमाए हुए मिले।
- एम्बुलेंस चालकों ने बताया, सीएमएस ने उन्हें ठहराया हुआ है। अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान हम लोगों को ड्यूटी करनी होती है, ऐसे में आने जाने में समय ना लगे इस वजह से यहीं रुकते हैं।
- जबकि उर्सला और डफरिन में बने रैनबसेरा में तीमारदारों को ठहरने के लिए बनाया गया है।
रैनबसेरा सुतरखाना
- करीब रात के 9 बजे स्टेशन के पास सुतरखाना में बने रैन बसेरा का जायजा लेने पहुंचे। यहां भी ऐसा ही हाल देखने को मिला।
- यहां न ही कोई गार्ड था और न ही कर्मचारी। पूरा रैन बसेरा खाली पड़ा हुआ था, उसमें रजाई और गद्दा तो दूर वहां इतनी बदबू थी वहां खड़े होना भी मुश्किल था।
- आसपास के दुकानदारों ने बताया, यहां पर शराबीयों, जुआरियों और अफीम-गांजा पीने वालों का अड्डा है।
- वहीं स्थानीय निवासी अजय कुशवाहा ने बताया, जब भीषण ठंडी पड़ती है सिर्फ तबही यहां गरीबों के लिए सोने का इंतजाम किया जाता है।

रैनबसेरा एक्सप्रेस रोड
- टीम जब करीब 9:30 बजे एक्सप्रेस रोड पर बने रैनबसेरा पहुंची, यहां पर बसेरे में छत तो थी, लेकिन दीवारें नहीं थी।
- दरअसल सर्दियों में उन रैन बसेरों को मोटी पॉलीथिन से पैक कर दिया जाता है, जिससे वहां रात में रुकने वालो को ठंड न लगे। लेकिन यहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं दिखा।
- बसेरे में बैठे मोहित ने बताया, वो दिनभर रिक्शा चलाता और रात में यहीं आकर आराम करता है।

रैनबसेरा में सुविधा
- सरकार की तरफ से रैनबसेरा में गरीबों के लिए जो सुविधा दी जाती है, उसमें पुरे हाल में दरी, गद्दा, साफ चादर और तकिया दिया जाता है।
- इसके अलावा सभी सहारा लेने वालों को कंबल भी उपलब्ध कराए जाते हैं। साथ ही हर रैनबसेरा में अलाव भी जलाने का इंतजाम किया जाता है।
- लेकिन ठंड ने दस्तक दे दी है और अभी तक सभी बसेरों में व्यवस्थाएं नहीं की गई है।
पल्ला झाड़ते रहे जिम्मेदार अधिकारी
- रियल्टी चेक के बाद शहर के एडीएम सिटी अविनाश सिंह से dainikbhaskar.com की टीम ने बात की तो उन्होंने कहा, सभी रैनबसेरे नगरनिगम के अधीन है। बढ़ती ठंड को देखते हुए नगर आयुक्त को चिठ्ठी लिखकर उनको दुरुस्त करने और सभी सुविधा मुहिया कराने को कहा गया है।
- एडीएम सिटी के बाद नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह से बात हुई तो उन्होंने कहा, शहर के 6 जोन में के अधिकारी यह काम देख रहे है, आप उन्ही से बात कर लीजिए।
- जोन के इंचार्ज नंद किशोर का कहना है, सभी रैनबसेरों की तैयारी पूरी हो चुकी है, लेकिन पूछने पर जोन में कितने बसेरे आते है उन्होंने कहा, 'नहीं पता वो कल ऑफिस में लिस्ट देखकर बता पाएंगे।'
- इतना ही नहीं जब पूछा गया कि इस व्यवस्था में कितने गद्दे, कंबल उपलब्ध कराए गए हैं, तो उनका जबाब था 'उन्हें ये फिगर नहीं पता।'
- उधर जोन तीन की इंचार्ज पुष्पा राठौर का कहना था, वो दो दिन से निर्वाचन आयोग द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग में बीजी है, शनिवार के बाद ही वो इसका काम देखेंगी।
क्या कहते है राजनैतिक दल -
- बीजेपी के नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी का कहना है, कानपुर के जिलाधिकारी को चिठ्ठी लिखी है।
- वहीं कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हर प्रकाश अग्निहोत्री ने बताया, इसकी जिम्मेदारी नगर आयुक्त और मेयर की है, लेकिन ये दोनों ही गरीबों के परेशानी से कोई मतलब नहीं।
- बस मेयर प्रचार में जुटे है और नगर आयुक्त को इनसब चीजों से कोई मतलब नहीं हैं।
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Web Title: night shelters home lock poor people Shivering in cold
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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