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यहां लगा है इतिहास का पहला CCTV कैमरा, 18वीं सदी के नवाब करते थे यूज

Dainikbhaskar.com | Apr 19, 2017, 10:03 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
लखनऊ.यूपी की राजधानी अपने अंदर इतिहास को समाए है। इसका उदाहरण है पुराने लखनऊ में बना बड़ा इमामबाड़ा। सन् 1784 में इस इमारत को बनवाते समय नवाब साहब ने देसी सीसीटीवी कैमरा भी लगवाया था। इससे वे आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखते थे। वर्ल्ड हैरिटेज डे के मौके पर dainikbhaskar.com अपने रीडर्स को 18वीं सदी की उस तकनीक के बारे में बता रहा है। जाने कैसा था 232 साल पुराना सीसीटीवी कैमरा...
- अवध के नवाब असफ उद्दौला ने 1784 में बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण करवाया था। इस इमारत में एक 3 मंजिला बावली भी है, जिसका इस्तेमाल वाटर कन्जर्वेशन के लिए किया जाता था।
- बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन में सिक्युरीटी का खास ध्यान रखा गया था। कोई भी अनजान व्यक्ति या दुश्मन बिना इजाज़त के बावली के अन्दर आने की कोशिश करता था तो अंदर बैठे तीरंदाज़ उसका काम तमाम कर देते थे। बावली उनके लिए सीसीटीवी कैमरा जैसा काम करती थी।
- इमामबाड़ा के गाइड ने बताया, "बावली पहले 5 मंजिला इमारत के रूप में बनी थी, लेकिन अब सिर्फ तीन मंजिले ही बची हैं। बावली की दूसरी मंजिल से कुआं साफ दिखाई देता है। उसमें मेनगेट से अंदर आने वाले हर शख्स की परछाईं पड़ती है। अंदर बैठे व्यक्ति को परछाईं देखकर पता चल जाता था कि अंदर आने वाला दोस्त है या दुश्मन। यह इस बिल्डिंग की खासियत है कि मेन गेट पर खड़े व्यक्ति को नहीं पता चलता कि उस पर कोई नजर रखे है।"
कुएं में पड़ी है खजाने की चाबी
- यह इमारत इस तरह से बनी है कि एक तरफ से सूरज की किरणें आती हैं तो दूसरी तरफ अंधेरा होता है। बिना एयर कंडीशन के यह इमारत तेज गर्मी में भी बिलकुल ठंडी रहती है।
- गाइड आसिफ ने बताया, "एक बार दुशमन ने इमामबाड़ा पर आक्रमण किया था। तब नवाब साहब का खजांची खजाने की चाबी लेकर इस कुंए में कूद गया था, ताकि खज़ाना महफूज़ रह सके। आज तक कोई भी उस चाबी को नहीं ढूंढ पाया है।"
...तो डूब जाएगी बावली
- शाही बावली का सीधा कनेक्शन गोमती के पानी से है। जैसे-जैसे गोमती का पानी बढ़ता है, वैसे-वैसे बावली का पानी बढ़ता है। कहा जाता है कि जिस दिन गोमती में बाढ़ आएगी ये तीन मंजिला बावली डूब जाएगी।
फैजाबाद तक जाती हैं सुरंगें
- इमामबाड़ा में भूल भुलैया टूरिस्ट्स को खूब लुभाती है। भूल भुलैया में 479 दरवाज़े और 1000 रास्ते हैं। दीवारों की खासियत यह है की यहां दीवार के एक तरफ खड़े आदमी की बातें दूसरी तरफ खड़े आदमी को साफ़ सुनाई देती है। इमामबाड़े में मौजूद सुरंगे फैजाबाद तक गई हैं।
- भूल भुलैया मकड़जाल जैसी है इसलिए यहां अकेले जो भी जाता है फंस जाता है। यही वजह है कि यहां अकेले जाना प्रतिबंधित है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए बड़ा इमामबाड़ा की 10 PHOTOS...
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Web Title: Bara Imambara of Lucknow has 232 year old CCTV camera installed
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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