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यूपी पुलिस की इस हरकत को सुन शर्मसार हो जाएंगे अखिलेश!

दैनिकभास्कर.कॉम | Feb 24, 2013, 12:06 PM IST

यूपी पुलिस की इस हरकत को सुन शर्मसार हो जाएंगे अखिलेश!
मुज़फ्फरनगर.वेस्ट यूपी के मुज़फ्फरनगर जिले में यूपी पुलिस का ऐसा चेहरा सामने आया है जिसके बारे में सुनकर कोई भी हिल जाएगा। खाकी की एक करतूत नें ना सिर्फ पूरे पुलिस महकमें को शर्मसार किया है बल्कि एक बच्चे को आठ साल तक बाल अपचारी/जेबकतरे की जिन्दगी जीने को मजबूर किया। अपने पिता अशरफ अली द्वारा एक दलित महिला को न्याय दिलाने के लिए कुछ पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत के चलते 13-वर्षीय गज़ा अली को जिले की खतौली थाने की पुलिस ने फर्जी वादी और गवाह के नाम से एक फर्जी मुकदमा बनाकर 100 रूपये चोरी करने वाला जेब कतरा बना दिया। इसके बाद स्थानीय न्यायालय नें उसे बाल अपचारी मानते हुए 2005 बाल सुधार गृह भेज दिया।
आठ साल तक चले मुकदमें गवाह और वादी फर्जी होने की वजह से अब न्यायालय किशोरे न्याय बोर्ड ने अब 13 साल के गज़ा अली से 21 वर्षीय के युवक बने चुके मुलजिम को बाईज़त बरी ही नहीं किया है बल्कि थाने के तत्कालीन पुलिस दरोगा और उसके सहकर्मी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए है। मामला जिले के खतौली थाने में 2005 का है, जहां थाने के उपनिरीक्षक सूरजपाल सिंह और हेड मोहर्रिर जगदीश प्रसाद ने खतौली निवासी अशरफ अली के 13-वर्षीय बेटे गज़ा अली को जेब काटने के आरोप में पकड़ लिया।
फर्जी वादी और फर्जी गवाहों के आधार पर गज़ा अली के खिलाफ जेब काटने का मुकदमा इसलिए दर्ज करवाया गया ताकि उसके पिता द्वारा सब इंस्पेक्टर सूरजपाल सिंह और उनके सहयोगी के खिलाफ अशरफ अली द्वारा एक दलित महिला को न्याय दिलाने के लिए पुलिस उच्चाधिकारियों से की गयी शिकायत और उसके बाद हुई कार्यवाही का बदला लिया जा सके। चिल्ड्रेन पैराडाइस स्कूल के कक्षा आठ के छात्र गजा अली को जेब काटने के जुर्म में चालान कर जेल भेज दिया इतना ही नहीं पुलिस ने इस बच्चे पर डोडा रखने का भी आरोप लगते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया।
गज़ा के वकील काजी मोहम्मद नईम के मुताबिक़ मुलजिम को नाबालिग मानते हुए मामला किशोर न्यायालय बोर्ड को दे दिया गया जंहा मुक़दमे की तारीख पर लगातार वादी और गवाह के ना आने पर न्यायालय ने खतोली पुलिस को वादी और गवाह के समन जारी कर दिए। उधर पुलिस ने वादी और गवाह के ना मिलने पर रिपोर्ट भेज दी की ऐसा कोई गवाह या वादी नहीं है, क्योंकि खतोली पुलिस खुद भूल चुकी थी की यह फर्जी मुकदमा उनके ही कुछ कर्मियों नें ही लिखा था।
इस पर न्यायालय नें बच्चे को फर्जी मुक़दमे में फ़साने वाले दरोगा सूरजपाल सिंह और जगदीश प्रशाद को न्यायालय में तलब किया मगर दोनों ही न्यायालय में उपस्तिथ नहीं हुए। इसके बाद हाल ही में न्यायालय ने 13-वर्षीय बच्चे गजा अली से अब 21-वर्षीय गज़फर अली बन चुके युवक को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया और तत्कालीन दरोगा सूरजपाल सिंह और हेड मोहर्रिर जगदीश प्रसाद के ख़िलाफ कड़ी कार्यवाही के आदेश दिए हैं।
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Web Title: Akhilesh Shaming will hear this act of UP police
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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