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बोल-सुन नहीं सकते ये बच्चे शूटिंग में आजमाना चाहते किस्मत, देखें VIDEO

dainikbhaskar.com | Mar 20, 2017, 17:19 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

मेरठ के कैंट एरिया में मूक बधिर स्कूल की 8 बेटियां और 2 बेटे निशानेबाजी में अपने हुनर को निखारने में जुटे हैं।

मेरठ. अपना और देश का नाम रोशन करने का जज्बा लिए ये मूक-बधिर बच्चे निशानेबाजी में अपना पसीना बहा रहे हैं। इनके ट्रेनर को भी उम्मीद है कि जिस लगन और मेहनत के साथ ये सभी निशानेबाजी सीख रहे हैं उससे एक दिन ये अपना सपना जरूर पूरा करेंगे। 3 महीने से ले रहे ट्रेनिंग...

- मेरठ के कैंट एरिया में मूक बधिर स्कूल की 8 बेटियां और 2 बेटे निशानेबाजी में अपने हुनर को निखारने में जुटे हैं।
- इन्हें स्कूल में ही बनाई गई शूटिंग रेंज में ज्योति तालियान ट्रेंड कर रही हैं।
- स्कूल में यह शूटिंग रेंज 3 दिसंबर 2016 को शुरू हुई हैं, उसी दिन से ये इसमें प्रैक्टिस कर रहे हैं।
- फिलहाल ये 25 मीटर राइफल शूटिंग में अपनी दमखम दिखा रहे हैं।
- उनकी लगन और मेहनत को देखकर स्कूल स्टाफ भी कह रहे हैं कि एक दिन ये बच्चे जरूर नाम रोशन करेंगे।
सामान्य से अधिक तेजी से सीख रही निशानेबाजी
- इन बेटियों को ट्रेंड कर रही ज्योति तालियान ने dainikbhaskar.com को बताया कि सामान्य व्यक्ति की तुलना में ये तेजी से निशानेबाजी की तकनीक सीख रहे हैं।
- बोल और सुनने में असमर्थ होने के बावजूद एक इशारे में वह निशानेबाजी के बारे में बताई गई जानकारी को समझ लेते हैं।
- ज्योति तालियान का कहना है कि उन्हें भी इशारों-इशारों में बताने के लिए साइन लैंग्वेज पर ध्यान देना पड़ रहा है।
निशानेबाजी से पहले कराया जाता है योग
- ट्रेनर ज्योति तालियान ने बताया कि निशानेबाजी में ध्यान केंद्रित करने का सबसे अधिक महत्व है।
- निशानेबाजी के दौरान ध्यान न भटके इसके लिए इन सभी बच्चों को योग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
- नियमित रूप से योगा क्लास चलाई जाती है, उसके बाद ही निशानेबाजी का प्रशिक्षण शुरू होता है।
- ज्योति जालियान ने बताया कि वह 7 साल से दिव्यांग बच्चों के लिए काम कर रही हैं। इस विषय पर रिसर्च भी किया। उसने देखा कि यदि हम दिव्यांग बच्चों को खेल के प्रति फोकस करें तो ये नार्मल से अधिक एक्सपर्ट हो सकते हैं।
- मूक बधिर स्कूल में निशानेबाजी सीख रही बेटियां अंजलि भागवत की तरह अपना और देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
- ज्योति ने बताया कि इन बेटियों ने उसका नाम इशारों से ही कैप्टन रखा है।
- जब वह इन्हें ट्रेनिंग देने के लिए स्कूल पहुंचती है तो ये बेटियां उसका सम्मान ऐसे ही करती हैं जैसे किसी कैप्टन का किया जाता है।
- इन बेटियों के नाम भारती, हिना, साक्षी, वर्णिका, पूजा, दृष्टि, अनुष्का, रीनू शामिल हैं। ये अभी कक्षा पांचवीं से आठवीं तक की स्टूडेंट्स हैं।
- स्कूल की प्रिंसिपल डा. अमिता कौशिक का कहना है कि इन बेटियों की लगन को देखकर कहा जा सकता है कि इन्हें ऊंचाईयों तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
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Web Title: deaf and dumb children taking shooting training
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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