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चिलम से चिल होते साधु-संतों की कहानी तस्वीरों की जुबानी

आशीष राय | Jan 22, 2013, 00:08 IST

  • कुंभ कैंपस.संगम और साधु-संतों की बीच की एक कड़ी है चिलम। संगम पहुंचे बाबा चिल होने के लिए इस चिलम का इस्तेमाल करते हैं। यह बाबाओं के लिए नशे का नहीं, बल्कि थकान मिटाने का एक साधन है। प्रभु की भक्ति के बाद बाबा चिलम का दम जरूर लेते हैं। सुबह हो या शाम, बाबा चिलम की मस्ती में मस्त रहते हैं।
    तस्वीरों में देखिए साधु और चिलम का संगम...
  • संगम पहुंचे साधुओं का कहना है कि बिना चिलम के दम के साधु-साधु नहीं कहलाता। चिलम भरना जो सीख गया, वही बाबा का असली चेला कहलाता है। यही है चिलम और बाबा का संगम।

  • कहा जाता है कि साधना बिना चिलम के दम के पूरी नहीं होती है। वह कहते हैं कि चिलम उन्हें सीधे भगवान के पास तक पहुंचाती है।

  • साधु के एकांतवास में यह चिलम ही उनकी साथी होती है। आज भी हिमालय में ऐसी जगहें हैं, जहां आस-पास न बस्ती है, न आदमी। ऐसे मौके पर यह चिलम ही है जो बाबा का साथ नहीं छोडती।

  • बाबा कहते हैं कि चिलम में जैसे-जैसे आग जलती है, हम भगवान के और नजदीक पहुंचते हैं।

  • चिलम साधू को बेफिक्र, निश्चिंत, निरालम्ब, निराधार बनाती है। इसकी परीक्षा से गुजरे बिना कोई साधु सिद्ध नहीं होता है।

  • बाबा चिलम के नशे को नशे की श्रेणी में नहीं लेते। उनका कहना है कि नशा वह करता है, जिसके पास कोई आशा नहीं रहती, जो हताश होता है, लेकिन बाबा कभी हताश नहीं होता।

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Web Title: story of saints taking Sage pipe in Maha kumbh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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