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दलि‍त अफसरों के नीचे काम नहीं करेंगे यूपी के सवर्ण

अजयेंद्र राजन | Dec 19, 2012, 15:14 PM IST

दलि‍त अफसरों के नीचे काम नहीं करेंगे यूपी के सवर्ण
लखनऊ. यूपी में सात दिन से हड़ताल पर चल रहे लाखों कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सांसद जो चाहे कर लें अब वे अपने से जूनियर कर्मचारियों के नीचे काम नहीं करेंगे। सर्वजन हिताय समिति ने सविनय अवज्ञा आन्‍दोलन चलाने का फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि सामान्‍य और ओबीसी वर्ग के वरिष्‍ठ कर्मचारी किसी भी सूरत में अपने से जूनियर एससी, एसटी कर्मचारियों के नीचे काम नहीं करेंगे।
समिति ने आन्दोलन को और व्यापक करने का फैसला लेते हुए कहा है कि बिल के पक्ष में मतदान करने वाले सांसदों से इस्तीफा मागा जाएगा और उन्हें अपने चुनाव क्षेत्र में या यूपी में किसी भी जगह सार्वजनिक कार्यक्रम नही करने दिए जाएगे। राजनीतिक दलों खास कर कांग्रेस और भाजपा को चेतावनी दी गई है कि आरक्षण बिल के पक्ष में मतदान करने का खामियाजा भुगतने के लिए ये दल तैयार रहे। समिति के आह्वान पर आज सातवें दिन भी प्रदेष के लगभग 18 लाख कर्मचारियों ने अभूतपूर्व हड़ताल जारी रखी और राजधानी लखनऊ समेत जिला मुख्यालयों जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। कर्मचारियों ने सोनिया गाँधी, लाल कृष्ण आडवाणी, मनमोहन सिंह, सुषमा स्वराज, राहुल गाँधी, अरूण जेटली और नरेन्द्र मोदी को खास कर जिम्मेदार ठहराते हुए दोनों पार्टियों को आगामी चुनावों में पूरी तरह सफाया करने का संकल्प लिया।
आज राजधानी लखनऊ में सभी प्रमुख विभागों के कार्यालयों पर हजारों की तादात में कर्मचारी एकत्रित हुए और जुलूस बनाकर नारे लगाते हुए विधान सभा की ओर कूच किया। आक्रोशित कर्मचारियों ने भाजपा एवं काँग्रेस मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के सामने एक विशाल विरोध सभा की। विरोध सभा को समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे व अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने सम्बोधित किया।
समिति के पदाधिकारियों ने इस संविधान संषोधन बिल को कार्मिकों के कैरियर के लिए खतरनाक बताते हुये कहा कि यदि संविधान संषोधन बिल जून 1995 से लागू किया जायेगा, जिससे 17 साल पहले से कार्मिकों की वरिष्ठता सूचियाँ बदलकर एससी, एसटी के 15-20 साल जूनियर कर्मचारियों को और प्रमोशन देते हुए अपने से वरिष्ठ कार्मिकों का बॉस बना दिया जायेगा और इसी तरह सामान्य एवं अन्य पिछड़ी जाति के 2 लाख से अधिक कार्मिकों को पदावनत कर दिया जायेगा, जिससे विभागों की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जायेगी। इस प्रकार सामान्य, पिछड़ी जाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कार्मिकों के पदोन्नतियों के अवसर लगभग समाप्त हो जायेंगे एवं उच्च पदो पर एससी, एसटी का शतप्रतिशत आरक्षण हो जायेगा।
समिति ने राजनीतिक दलों से सवाल किया कि आखिर वोट की राजनीति में कितनी बार सप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटा जायेगा और कितनी बार संविधान संशोधन किये जायेंगें। सामान्य एवं पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के भविष्य को अंधकारमय बनाने वाले इस संविधान संषोधन बिल को तत्काल वापस लिया जाय।
(फोटो-कर्मचारि‍यों ने मंगलवार को कि‍या प्रदेश भाजपा कार्यालय पर हमला)
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Web Title: upper caste government workers will not work under lower caste officers in uttar pradesh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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