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डेंगू से इस खिलाड़ी की मौत, कभी मजबूरी में खेला था लड़कों के साथ

bhaskar news | Oct 19, 2016, 13:04 PM IST

पूनम चौहान

वाराणसी.एक्स इंटरनेशनल महिला फुटबॉल प्लेयर पूनम चौहान कि डेंगू से मौत हो गई। पूनम पिछले 7 दिनों से बीमार थीं। सोमवार को उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। बता दें कि सामान्य घर से आने वाली इस लड़की को इंटरनेशनल लेवल तक खेलने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। dainikbahskar.com को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कभी प्रैक्टिस के लिए मजबूरी में लड़कों के साथ खेलना पड़ता था। फुटबॉल ही था पूनम का जुुनून, कोच ने बताई बातें...
- पूनम इंडियन फुटबाल टीम और यूपी की बेस्ट स्ट्राइकर थीं। यूपी की पहली सीनियर महिला खिलाड़ी का दर्जां भी उनके नाम था।
- उनके कोच ने dainikbhaskar.com को बताया कि पूनम का जुनून फुटबॉल ही था। उन्होंने बीएचयू से बीपीएड और एमपीएड की पढ़ाई की थी।
- सरकार और फेडरेशन की अनदेखी की वजह से वे पिछले कई दिनों से पिता मुन्ना लाल चौहान के साथ स्टेशनरी की दुकान चलाती थीं।
- दुकान में वे किताबों के बाइंडिंग का काम करने लगी थीं। सिगरा स्टेडियम में फूटबॉल मैच होने वाला है।
- पिछले कई दिनों से कैम्पस की सफाई में पूनम अपनी सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।
सफाई के दौरान आई डेंगू की चपेट में
- ऐसा कहा जा रहा है स्टेडियम की सफाई के दौरान पूनम को किसी डेंगू मच्छर ने काट लिया ।
- डेंगू के चपेट में आकर वह बीमार हुई और उनकी मौत हो गई।
कभी लोग ताना मारते थे
- शिवपुर स्टेडियम में पूनम को मज़बूरी में लड़कों के साथ खेलना पड़ता था।
- वे बिना झिझक के लड़कों के बीच खेलीं। लोग ताना मारते थे कि लड़की होकर लड़का बन गई।
- dainikbhaskar.com से पूनम ने कहा था कि इंटरनेशनल लेवल पर खेलने के बावजूद खेल मंत्रालय ने उन्हें कहा कि हम तुम्हें इंटरनेशनल प्लेयर नहीं मानते।
- सीएम से मिलने के लिए तीन दिन उनके ऑफिस के बाहर सुबह से शाम तक बैठी रही, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई।
- पीएम नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा लेकिन वहां से भी कोई जबाब नहीं मिला।
ऐसा था पूनम का खेल सफर-
- पूनम पांच साल की उम्र से ग्राउंड में पिता मुन्नालाल चौहान की उंगली पकड़ कर जाती थी। उनकी मां सुभावती देवी ने उन्हें खूब सपोर्ट किया।
- 2001 में पहला सीनियर नेशनल 13 साल की उम्र में लुधियाना में खेला, इसमें उन्होंने 4 गोल दागे।
- वे यूपी टीम की 5 बार कैप्टन रहीं। 2003 में जूनियर के तौर पर और 2004, 2005, 2008, 2010 में सीनियर के तौर पर रहीं।
-15 जून 2015 से जनवरी 2016 तक भदोही में एडहॉक पर फूटबॉल कोच के तौर पर काम किया।
- 2006 में दो बार इंडियन टीम की ओर से दिल्ली और मलेशिया में खेली ।
- 2010 में सीनियर इंडियन टीम की ओर से साऊथ एशियन गेम में गोल्ड मैडल मिला।
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Web Title: डेंगू से हुई इस प्लेयर की मौत, मजबूरी में खेलना पड़ता था लड़कों के साथ
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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