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BYE BYE 2012: मुलायम सिंह के लि‍ए परि‍वार पहले, प्रदेश बाद में

Ajayendra Rajan | Dec 30, 2012, 13:02 PM IST

लखनऊ. साल 2012 पक्‍के समाजवादी मुलायम सिंह यादव के लिए कहीं ज्‍यादा खुशियां लेकर आया। एक तरफ बेटे अखिलेश ने सीएम की गद्दी संभाली तो बहू डिम्‍पल यादव कन्‍नौज से निर्विरोध चुनकर संसद तक पहुंचीं। जाहिर है मुलायम का हौसला बुलंद हुआ और विधानसभा चुनाव में मिली अपार सफलता को उन्‍होंने 2014 में संसदीय चुनाव में दोहराने की कसम खा ली। पार्टी के नेताओं को फरमान सुना दिया कि आराम से न बैठें, अभी संसद पर जीत हासिल करनी है।
वैसे प्रधानमंत्री बनने की कोशिश के साथ ही मुलायम परिवारवाद के मोर्चे पर भी लगातार यादव परिवार को मजबूत करते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में उन्‍होंने डिम्‍पल को सांसद बनाने के साथ ही भाई और सपा महा‍सचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को फि‍रोजाबाद से टिकट दे दिया है। वही फि‍रोजाबाद, जहां से 2009 में डिम्‍पल कांग्रेस के राजबब्‍बर से हार गईं थीं। वही फि‍रोजाबाद, जहां से अखिलेश यादव को खूब प्‍यार मिला और अब यादव परिवार वहां दोबारा फतह हासिल करने की कोशिश में है।
अगर पूरे भारत पर नजर डालें तो गांधी परिवार के साथ ही जम्मू कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस में अब्दुल्ला परिवार और पीडीपी में मुफ्ती परिवार, रालोद में अजित सिंह का परिवार, पंजाब के अकाली दल में बादल परिवार, हरियाणा के इनेलो में चौटाला परिवार, बिहार के राजद में लालू यादव परिवार, उड़ीसा के बीजद में पटनायक परिवार, महाराष्ट्र की शिव सेना में ठाकरे परिवार और एनसीपी में पवार परिवार, तमिलनाडु में करुणानिधि परिवार, ग्वालियर का सिंधिया परिवार राजनीति में ऊंचाईयों पर है।
आइए मिलतें हैं यूपी की राजनीति के सबसे कद्दावर यादव परिवार से...

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Web Title: family comes first for mulayam singh yadav in politics
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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