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PICS: चंबल के बीहड़ के 5 गांव, जहां डकैतों की बोलती है तूती!

Sanmay Prakash | Dec 11, 2012, 00:10 IST

  • आगरा. चंबल का बीहड़ डकैतों के लिए जाना जाता है। वक्‍त बीतने के साथ-साथ अब यहां डकैतों का दबदबा कम हुआ और उनकी जगह ले रहे हैं किडनैपर। डकैत और किडनैपर्स ने चंबल के बीहड़ के पांच गांवों को सबसे बड़ा ठिकाना बनाया हुआ है। हाल के दो वर्ष के भीतर यहां से ऐसे लोग बरामद हुए जो किडनैप किए जा चुके थे। कुछ गांवों में छापेमारी के बाद कई ग्रामीण गिरफ्तार हुए, जिन्‍होंने कबूला कि किडनैपर्स ने उनके घर पर अपहृत लोगों को रखा था।
    स्लाइड के जरिए जानिए गांवों के बारे में...
  • डकैत और किडनैपरों के लिए सबसे प्रिय गांव है जैतपुर ब्‍लॉक का सिमराई गांव, बटेश्‍वर के पास का बुरैरा गांव, पिनाहट के बरैंडा, मनौना और बिजौली। वैसे तो पूरा बीहड़ डकैतों के लिए जाना जाता है लेकिन इन गांवों का नाम काफी प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस के वरिष्‍ठ अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों की अर्थव्‍यवस्‍था किडनैपिंग पर टिकी रही है। अपहृत को रखने वालों को यहां कैरियर कहते हैं। बिजौरी गांव में अमन को किडनैप कर रखा गया था। ऐसा करने वाले चार कैरियर (लोग) अभी भी जेल में हैं।

  • डाकू निर्भय गुर्जर के समय से ही कैरियर की शुरुआत हुई थी। उसके मरने के बाद दूसरे डाकू और किडनैपर ने कैरियर का इस्‍तेमाल किया। सेवानिवृत्‍त पुलिस अधिकारी उमेश श्रीवास्‍तव कहते हैं कि मनौना में छह महीने पहले ही एक पकड़ (अपहृत) बरामद की गई है।

  • पुलिस सूत्र बताते हैं कि किडनैपर व डकैतों ने राजस्‍थान और यूपी में बीहड़ के पास के जिलों से किडनैप कर बच्‍चों व बड़ों को इन गांवों में रखा है। एक-दो महीने बाद फिरौती मिलने पर वे उन्‍हें छोड़ देते हैं। इन गांवों के बंद कमरों में वे अपहृत को रखा जाता है। कुछ अपहृत को तो खुले में भी रखा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि बाहरी लोगों को बीहड़ के रास्‍तों का अंदाजा बिलकुल नहीं होता है। बीहड़ के टीलों पर चढ़कर देखने पर हर तरफ एक सा ही नजरा दिखता है। ऐसे में लोग भाग नहीं पाते। उन्‍हें जीने के लिए वापस गांव में ही आना पड़ता है। उनकी जिंदगी का एक ही रास्‍ता होता है डकैतों व किडनपर के साथ घर वापसी।

  • 12 सितम्‍बर को फतेहाबाद के गांव गढ़ी उदयराज निवासी समृद्ध किसान संतोष शर्मा के बेटे अभिषेक का अपहरण हो गया था। उसे 22 नवम्‍बर को विशाल गुर्जर गैंग ने रिहा किया है। ग्रामीणों का कहना है कि ढ़ाई महीने तक अभिषेक को इन्‍हीं में से किसी गांव में रखा गया था। आगरा के एसएसपी एससी बाजपेई कहते हैं कि पुलिस सख्‍ती की वजह से बीहड़ में पकड़ रखने के मामले अब सामने नहीं आ रहे हैं। पुलिस मुस्‍तैद है और मुखबिरों की मदद से यहां बदमाशों में कमी आई है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Gunman villages of Chambal rugged
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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