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जो संसद न कर पाई, साधुओं ने कर दि‍खाया

अनुराग सिंह | Dec 07, 2012, 11:45 AM IST

इलाहाबाद.वोट बैंक की राजनीति में लम्बे समय से फंसे पड़े महिला आरक्षण विधेयक पर साधू और सन्यासियों ने दिखा दी है देश के राजनेताओं को राह। बरसों की कवायद के बावजूद देश की संसद भले ही महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने का फैसला अभी तक न ले सकी हो, लेकिन इलाहाबाद के महाकुम्भ शुरू होने से पहले ही साधु- संतों के अखाड़ों ने साध्वियों को करीब एक तिहाई आरक्षण व तमाम अधिकार देकर राजनेताओं को आइना दिखाने का काम किया है।
देश के सबसे बड़े अखाड़े जूना अखाड़ा ने न सिर्फ साध्वियों को तमाम अधिकार दिए जाने का एलान किया है बल्कि उन्हें अपनी एक तिहाई ज़मीन व दूसरी सुविधाएं देकर एक अनूठी मिसाल भी पेश की है। जूना अखाड़े ने महिला साध्वियों को अपने बगल माईबाड़ा के नाम से अलग जगह मुहैया कराई है जिसके बाद किसी भी अखाड़े की महिला सन्यासिनों ने किसी कुम्भ मेले में पहली बार अपनी अलग धर्मध्वजा फहराई है। इस धर्मध्वजा के नीचे माईबाड़े की महंत साध्वी बनने वाली महिलाओं को खुद दीक्षा देंगी। कुम्भ के इतिहास में यह पहली बार है जब अखाड़ों की ज़मीन पर तेरह अखाड़ों के अलावा अलग से कोई धर्म ध्वजा स्थापित की गई है।
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Web Title: saints declared one third reservation for sadhvis in mahakumbh 2013
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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