Home »Uttar Pradesh »Rajya Vishesh» Saints Declared One Third Reservation For Sadhvis In Mahakumbh 2013

जो संसद न कर पाई, साधुओं ने कर दि‍खाया

अनुराग सिंह | Dec 07, 2012, 11:45 IST

  • इलाहाबाद.वोट बैंक की राजनीति में लम्बे समय से फंसे पड़े महिला आरक्षण विधेयक पर साधू और सन्यासियों ने दिखा दी है देश के राजनेताओं को राह। बरसों की कवायद के बावजूद देश की संसद भले ही महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने का फैसला अभी तक न ले सकी हो, लेकिन इलाहाबाद के महाकुम्भ शुरू होने से पहले ही साधु- संतों के अखाड़ों ने साध्वियों को करीब एक तिहाई आरक्षण व तमाम अधिकार देकर राजनेताओं को आइना दिखाने का काम किया है।
    देश के सबसे बड़े अखाड़े जूना अखाड़ा ने न सिर्फ साध्वियों को तमाम अधिकार दिए जाने का एलान किया है बल्कि उन्हें अपनी एक तिहाई ज़मीन व दूसरी सुविधाएं देकर एक अनूठी मिसाल भी पेश की है। जूना अखाड़े ने महिला साध्वियों को अपने बगल माईबाड़ा के नाम से अलग जगह मुहैया कराई है जिसके बाद किसी भी अखाड़े की महिला सन्यासिनों ने किसी कुम्भ मेले में पहली बार अपनी अलग धर्मध्वजा फहराई है। इस धर्मध्वजा के नीचे माईबाड़े की महंत साध्वी बनने वाली महिलाओं को खुद दीक्षा देंगी। कुम्भ के इतिहास में यह पहली बार है जब अखाड़ों की ज़मीन पर तेरह अखाड़ों के अलावा अलग से कोई धर्म ध्वजा स्थापित की गई है।
  • 18 दिसंबर को जूना अखाड़े की पेशवाई में महिला साध्वी सबसे आगे चलते हुए शाही अंदाज़ में पहली बार मेले में ख़ास अंदाज़ में प्रवेश करेंगी। इतना ही नहीं जूना अखाड़े ने इलाहाबाद के महाकुम्भ में पहली बार महिला महामंडलेश्वर बनाए जाने का फैसला करते हुए इलाहाबाद के मेले में बीस से ज्यादा महिलाओं को महामंडलेश्वर बनाने का भी एलान किया है। जूना के बाद अब दूसरे अखाड़े भी अपने यहाँ की साध्वियों को आरक्षण व अधिकार देने की कवायद में जुट गए हैं। अखाड़ों का मानना है कि उनका यह फैसला महिलाओं को उनका हक़ व समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने की कोशिशों में मील का पत्थर साबित होगा।
    साध्वियों के माईबाड़े की इस धर्मध्वजा में इक्यावन शक्तिपीठों और शक्ति की देवी माँ दुर्गा के प्रतीक के तौर पर बावन जगहों पर धागों की गांठ लगाई गई जबकि शुभता के लिए इसमें सबसे ऊपर मोर के पंख लगाए गए थे। माईबाड़े की यह धर्मध्वजा इक्यावन शक्तिपीठों और देवी दुर्गा के प्रतीक के तौर पर कुल बावन हाथ यानी लगभग बावन फिट ऊंची तैयार की गई थी। माईबाड़े में धर्म ध्वजा स्थापित होने के मौके पर तमाम अखाड़ों के एक हज़ार से ज्यादा संत शामिल थे। इन संतों ने महिला महंतों व साध्वियों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिए तो साथ ही महिला साध्वियों को उनका अधिकार दिए जाने में काफी देरी होने पर अफ़सोस जताया।
  • भगवान शिव के उपासक जूना के पदाधिकारियों ने इस मौके पर कहा कि अगर शक्ति स्वरूप माँ पार्वती के बिना भगवान शिव का कोई अस्तित्व नहीं है तो माँ सामान साध्वियों की तमाम बन्धनों से आज़ादी के बिना उनके संत होने का कोई मतलब नहीं था। जूना के पदाधिकारियों के मुताबिक़ इस कुम्भ में साध्वी बन्ने वाली महिलाओं को माईबाड़े की महंत ही दीक्षा देंगी और वही नई साध्वियों की भर्ती भी करेंगी। इलाहाबाद के कुम्भ मेले में जूना अखाड़ा पहली बार महिला मंडलेश्वर की नियुक्ति करेगा वह एक दो नहीं बल्कि बीस से ज़्यादा।

  • सन्यासियों के दो अखाड़ों में पहले से ही महिला महामंडलेश्वर बनाने का नियम है, लेकिन जूना द्वारा महिला साध्वियों को पूरे अधिकार दिए जाने के बाद अब दूसरे अखाड़ों ने भी इस बारे में सोचना शुरू कर दिया है। जूना के सहयोगी आवाहन और अग्नि अखाड़े ने भी अपने यहाँ की महिला साध्वियों को बराबर का अधिकार और ज़मीन व दूसरी सुविधाओं में आबादी के हिसाब से आरक्षण दिए जाने की बात कही है।

  • अखाड़ों से मिले इस सम्मान से जूना की महिला साध्वियां भी बेहद खुश है। उनका कहना है कि माँ स्वरुप होने के बावजूद अखाड़ों में उन पर तमाम पाबंदी रहती थी और उन्हें हमेशा पुरुषों के फैसले पर ही निर्भर रहना होता था लेकिन अब बराबरी का दर्जा मिलने पर ऐसा नहीं होगा और वह अपने फैसले खुद लेंगी। महिला साध्वियों का तो यहाँ तक कहना है कि जिस तरह गृहस्थ आश्रम में महिलाओं के बिना घर का चलना मुमकिन नहीं उसी तरह अखाड़ों में महिला साध्वियों के सम्मान व अधिकार के बिना उनकी प्रगति संभव नहीं है।

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Web Title: saints declared one third reservation for sadhvis in mahakumbh 2013
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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