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PICS: पाक से जंग लड़ रहा है यूपी का छोरा, परिवार मांग रहा दुआएं

दिलनवाज पाशा | Jan 06, 2013, 16:20 IST

  • अमरोहा. फिरोजशाह कोटला के ऐतिहासिक मैदान पर पाकिस्तान के साथ हो रहे एक दिवसीय मैच में उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सहसपुर गांव के रहने वाले खिलाड़ी शमी अहमद खेल रहे हैं। उनका परिवार अपने लाल की सफलता के लिए दुआएं मांग रहा है। परिवार की चाहता है कि उनका लाडला इस खेल में दुश्मन को धुल चटा देश का सर गर्व से ऊंचा कर दे।
    तस्वीरों में देखिए शमी के परिवार की इबादत, जानिए कौन है....
  • भारतीय क्रिकेट टीम में उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सहसपुर गांव के रहने वाले खिलाड़ी शमी अहमद के सलेक्शन की खबर मिलते ही मेरे जहन में अमरोहा की स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंटों में छाया रहने वाला उनका खौफ सबसे पहले आया। बचपन से ही सिम्मी (पूरा अमरोहा उन्हें इसी नाम से जानता है) ने अपनी तूफानी गेंदबाजी से एक विशेष पहचान बना ली थी। चाहे बंजर जमीन पर बनी पिच हो, चाहे गेंहू की फसल कटने के बाद खाली खेत में परात चलाकर बनाई पिच है, या फिर घास के मैदान में बनी चिकनी मिट्टी की पिच, सिम्मी की गेंदें हर पिच पर आग उगलती थी। सिम्मी की गेंदों को रक्षात्मक खेलना विपक्षी टीमों की मुख्य रणनीति होती।

  • अमरोहा क्षेत्र में स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंटों अहम आयोजन होती हैं। टूर्नामेंटों के दौरान पूरी टीम से ज्यादा चर्चा उन्हीं की रहती थी। अक्सर स्थानीय टूर्नामेंटों में मैं कमेंट्री करता। कई बार बल्लेबाजों को उनकी गेंद का मुकाबला करते हुए पिच पर गिरते देखा है। सिम्मी को गेंदबाजी करते हुए देखकर लगता था कि उसका स्थान कहीं ओर है।

  • सिम्मी के अब्बा तौसीफ अहमद को भी यह बात समझ आ गई थी कि उनके बेटे को अगर दिशा मिले तो वह बहुत आगे जा सकता है। शायद यही वजह थी कि इलाके के अन्य बाप जहां अपने बच्चों को मैदान से लौटने पर गालियां देते वहीं सिम्मी के अब्बा कई बार उसका मैच देखने मैदान तक पहुंचते।

  • सिम्मी के बड़े भाई हसीब अहमद भी स्थानी टूर्नामेंटों में उनके साथ खेलते थे। हसीब याद करते हैं, 'सिम्मी की स्पीड ही उसका सबसे बड़ा हथियार थी। कई टूर्नामेंटों में वो सिर्फ अपनी गेंदबाजी की बदौलत अकेला मैच जिता देता। गेहूं के कटे खेतों में क्रिकेट खेलने वाला हमारे सिम्मी की गेंदबाजी का तूफान अब टीम इंडिया के लिए दिखेगा, इससे बड़ी बात हमारे और अमरोहा के लिए और कोई नहीं हो सकती।'

  • वहीं सिम्मी के अब्बा तौसीफ अहमद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम का शुक्रिया अदा करते हैं।

  • तौसीफ अहमद कहते हैं, 'सिम्मी की तेज गेंदबाजी से हम सब वाकिफ थे। लेकिन उन्हें सही दिशा बंगाल जाने के बाद ही मिली। 2007 तक वो उत्तर प्रदेश में अपनी किस्मत आजमाता रहा लेकिन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बावजूद उसे मौका नहीं मिल पाया। हर बार वह रह जाता, वो इंडिया के लिए क्रिकेट खेलना चाहता था। 2007 में वह कोलकाता चला गया और वहां प्रेक्टिस करने लगा। इस दौरान वह रणजी में खेला, आईपीएल में भी चुना गया लेकिन जितनी खुशी हमें आज हो रही है उतनी पहले कभी नहीं हुई। हमें विश्वास है कि उसकी गेंदों का तूफान भारत को जीत दिलाएगा।'

  • तौसीफ अहमद 1 जनवरी को कोलकाता गए थे ताकि अपने बेटे को खेलता देख सकें। जाने से पहले उनका कहना था, 'हमने सिम्मी को गांव की पिचों पर खेलते देखा है, उसमें धार थी जिसे वसीम अकरम और सौरव गांगुली ने और तेज कर दिया है। इसमें कोई शक नहीं है कि वो जहां आज है वहां पहुंचने में वसीम अकरम और सौरव गांगुली का अहम योगदान है। उसमें टेलेंट था सब जानते हैं, लेकिन इस टेलेंट को पहचान कोलकाता पहुंचने के बाद ही मिली है।'

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: UP cricketer Shami Ahmed fight with pakistan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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