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आखि‍र कि‍सने कि‍या था गंगा तीरे ब्‍लास्‍ट?

अनुराग सिंह | Dec 07, 2012, 10:03 IST

  • वाराणसी. उस शाम भी हर रोज़ की तरह घंटे घड़ियाल की ध्वनि के साथ मोक्षदायिनी गंगा की आरती चल ही रही थी कि‍ अचानक एक धमाके ने सब कुछ बदल दिया। मोक्ष भूमि वाराणसी के विश्व प्रसिद्द शीतला घाट पर सात दिसंबर 2010 को गंगा आरती के दौरान हुए बम धमाके ने नन्ही परी स्वास्तिका को उसके पहले जन्मदिन से 11 दिन पहले ही हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया।
    उसमें घायल हुई मध्य प्रदेश की एक अधेड़ महिला (जो वाराणसी में संस्कृत शिक्षा अर्जित कर रहे अपने बेटे के पास आयी थी) ने भी तीन दिन बाद बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में अपना दम तोड़ दिया। अयोध्या विध्वंस की 18वीं बरसी से मात्र 24 घंटे बाद हुए इस ब्लास्ट में छ विदेशी पर्यटक समेत 20 लोग घायल हुए। आज घटना की दूसरी बरसी है, गंगा आरती अब भी निर्बाध रूप से रोज़ शाम होती है, पर दो साल बाद भी आज तक यह नहीं पता चल पाया की आखिर इस ब्लास्ट को किया किसने था।
    इस किलर ब्लास्ट की दूसरी बरसी पर ऐसा ही लगता है की बम खुद गंगा किनारे चल कर आया, एक कंटेनर में छिप कर बैठ गया और फिर अचानक फट गया। ऐसा इसलिए की दो साल की गहन जांच के बावजूद आज तक इस निर्मम हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी हैं अज्ञात। इस घटना के सम्बन्ध वाराणसी पुलिस द्वारा विश्व की प्राचीनतम नगरी के दशाश्वमेध थाने में आई पी सी की विभिन्न धाराओं और 3/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमा संख्या 159/19 आज भी अज्ञात लोगों के खिलाफ ही दर्ज है।
    यही नहीं अगर विश्वस्त सूत्रों की माने तो आज तक यह भी नहीं पता चल पाया इस ब्लास्ट में इस्तमाल हुआ विस्फोटक क्या था। तब से अब तक बहुत सी अटकलें लगी, RDX से अमोनियम नाईट्रेट तक और प्लास्टिक एक्सप्लोसिव से मेहंदी के महक वाला बम, लेकिन पक्का कुछ भी आज तक नहीं हो पाया। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी से लेकर गुजरात के फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट एम एस दहिया तक ने ब्लास्ट स्थल से सैंपल इकट्ठा किये और वापस चले गए पर शायद ही आज तक कुछ सार्थक परिणाम सामने आये।
    आज शाम शीतला घाट पर सालों से आरती करवाने वाले किशोरी रमण दुबे 'बाबू महाराज' के नेतृत्व में मारे गए दोनों लोगों की याद में श्रद्धांजली आरती की जायेगी, पर इन सब के बीच इसका जवाब कौन देगा की यूपी पुलिस की एटीएस या केन्द्रीय जांच एजेंसियां आज तक ये क्यों नहीं पता लगा सकी की आखिर इस ब्लास्ट को अंजाम देने वाले कौन थे। शायद बस इतना ही मालूम है की घटना के बाद पाकिस्तान की जमीन से संचालित हो रहे इन्डियन मुजाहिदीन ने इ-मेल के ज़रिये ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेते है कहा था की वो 30 सितम्बर 2010 को अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का इन्तेकाम है। यह मेल नवी मुम्बई में एक WiFi इन्टरनेट कनेक्शन के जरिये भेजा गया था।
  • जहां वाराणसी के एसएसपी बीडी पौल्सन का यह कहना है की मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है वहीं वाराणसी जोन के आईजी जी एल मीना के मुताबिक़ इस मामले की जांच एटीएस कर रही है। वहीं लखनऊ में हाल ही में प्रदेश पुलिस के एडीजी-लॉ एंड आर्डर बने अरुण कुमार से जब इस बाबत फ़ोन पर पूछा गया तो उन्होंने कहा की मामले के बारे में चेक करवाना होगा।
    वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा प्रदेश और केंद्र सरकार को कटघरे में खडा करने वाली भाजपा के वाराणसी उत्तरी से विधायक रविन्द्र जयसवाल जिनका होटल शीतला घाट के पास ही स्थित है के अनुसार घटना के दो साल बाद भी आरोपियों का अज्ञात रहना शर्म की बात है और दिखाती है की यूपी की पूर्व बसपा सरकार और वर्तमान सपा सरकार आतंकवाद से लड़ने के लिए कितनी सीरियस है।
  • उनका ये वादा है की वो विधानसभा के अगले सत्र (जो जनवरी में होगा) में इस मुद्दे को उठाएंगे, पर इसका जवाब उनके पास नहीं है की बुधवार को संपन्न सत्र में वो या फिर वाराणसी दक्षिणी (जिस छेत्र में ब्लास्ट हुआ था) से सात बार जीतने वाले पार्टी विधायक श्यामदेव राय चौधरी ने इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया। वाराणसी के पिंडरा से कांग्रेस विधायक अजय राय भी कहते हैं की दो साल बाद भी आज तक आरोपियों का पता ना लग पाना जांच कितनी सीरियस है इसका खुलासा करता है।

  • शीतला घाट ब्लास्ट में मारी गयी स्वास्तिका के पिता संतोष आज तक ब्लास्ट के आरोपियों के अज्ञात होने से गुस्से में हैं और कहतें है की क्या पुलिस और जांच एजेंसिया बनारस में अगले ब्लास्ट का इंतज़ार करना पडेगा अज्ञात आरोपियों को ज्ञात करने के लिए, यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है, पर किसी को क्या चिंता स्वास्तिका तो मेरी गयी किसी और की नहीं।

  • वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार और गंगा आरती से जुडे अमिताभ भट्टाचार्य का कहना है की ऐसा लगता है की जब किसी धमाके में कम जाने जाती हैं तो उसकी जांच भी उतनी ही धीमे चलती है। बता दे की सात साल में वाराणसी में चार बम ब्लास्ट हो चुके है, जिनमे 23 फरवरी 2005 को नए दशाश्वमेध घाट पर पांच लोगों की जाने गयीं थी, वहीं सात मार्च 2007 को संकटमोचन मंदिर-कैंट रेलवे स्टेशन पर 18 लोग मारे गए थे, जबकि 23 नवम्बर 2007 को कचहरी में है दो बम धमाकों ने नौ लोगों को मौत की नींद सुला दिया था।
    जहां संकटमोचन-रेलवे स्टेशन ब्लास्ट के छ में से एक आरोपी को यूपी एसटीऍफ़ ने मार गिराया था और एक अन्य आरोपी मुहम्मद वलीउल्लाह को गिरफ्तार कर लिया था वहीं कचहरी ब्लास्ट में पकडे गए दो आरोपियों खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की गिरफ्तारी पर अब सवालिया निशाँ लगाए जा रहे हैं।
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Web Title: who planted the bomb at ganga ghat in varanasi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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