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न्यूक्लियर मेडिसन में रिसर्च कर रही प्रिया ने ब्रेस्ट कैंसर के लिए डेवलप की थैरेपी

bhaskar news | Mar 21, 2017, 06:31 IST

न्यूक्लियर मेडिसन में रिसर्च कर रही प्रिया ने ब्रेस्ट कैंसर के लिए डेवलप की थैरेपी
चंडीगढ़।महिलाओं में ब्रेस्ट से शुरू होते हुए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने वाले ब्रेस्ट कैंसर (हर 2) के लिए दवा के साथ रेडियोइम्यूनोथैरेपी डवलप की है एक यंग रिसर्चर प्रिया भुसारी ने। न्यूक्लियर मेडिसन की इस रिसर्च को इंटरनेशनल जरनल ऑफ कैंसर ने नई खोज होने की वजह से अपने पहले पन्ने पर जगह दी है।

इसमें दुनिया भर में कैंसर प्रिवेंशन और ट्रीटमेंट संबंधित नई रिसर्च को शामिल किया जाता है। इस ट्रीटमेंट में ये काम उन्होंने पीजीआईएमईआर और पंजाब यूनिवर्सिटी में किया है। करीब 28 साल की प्रिया का मकसद फैलने वाले कैंसर का इलाज ढूंढना है जिसके लिए वह इंस्पायर फैलोशिप के तहत काम कर रही हैं। रेडियोइम्यूनोथैरेपी को ‘लिम्फोमा’ कुछेक कैंसर में ट्राई किया गया है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर पर उपयोग नहीं किया गया। इस तकनीक में दवा का काफी कम डोज चाहिए जिससे साइड इफेक्ट्स काफी कम हो जाते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के लिए सर्जरी, रेडियो-थेरेपी, कीमोथेरेपी व टारगेटेड थैरेपी हैं। ये ऐसे ब्रेस्ट कैंसर में तो कामयाब हैं जो एक ही जगह होता है और खत्म हो जाता है लेकिन फैलने वाले ब्रेस्ट कैंसर में ये सिर्फ शुरुआती दौर में ही फायदा देता है। एडवांस्ड स्टेज पर तो मेडिकल साइंस के मौजूदा ट्रीटमेंट कई बार फेल ही हो जाते हैं। अपने एमएससी में कैंसर पर छोटा सा काम कर चुकी प्रिया ने पीएचडी में ब्रेस्ट कैंसर को चुना।
अब लीवर में नुकसान को रोकने में जुटी हैं प्रिया
अब प्रिया पीजीआई में रहते हुए इस दवा की डोज को कैंसर के हिसाब से डिसाइड करने और लीवर में इसके नुकसान को रोकने में जुटी हैं। पीयू से डॉ. देविंदर के धवन और पीआई एमईआर से डॉ जया शुक्ला ने उनकी इस रिसर्च में गाइडेंस दी है। प्रिया कहती हैं कि औरत हूं और जब कुछ करने लायक हूं तो सबसे पहले औरतों की प्रॉब्लम को सॉल्व करने के बारे में ही सोचा। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर पर काम शुरू किया।
यह तरीका अपनाया थैरेपी के लिए
हर-2 (ह्यूमन एपिडरमल ग्रोथ फैक्टर ) ही फैलने वाले कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। मोनो क्लोनल एंटी बॉडीज को रेडियोएक्टिव मॉलीक्यूल के साथ उन्होंने मरीजों पर परखा। इसमें उन्होंने 30 से 62 साल की महिलाओं को चुना जिनको ब्रेस्ट कैंसर था। उनको बाकी थैरेपीज में ही इस्तेमाल होने वाली कैंसर की दवा दी गई। अन्य तरीकों से जहां 400 मिलीग्राम तक दवा दी जाती है जो स्व्स्थ सेल को भी मार देती है, वहीं प्रिया ने इस तकनीक में अधिकतम सिर्फ 30 मिलीग्राम दवा का इस्तेमाल किया। रेडियोइम्यूनोथेरेपी तकनीक में दवा का प्रयोग काफी कम होता है। ट्रीटमेंट देने के बाद पांच व सात दिन के अंतर पर सभी महिलाओं के टेस्ट कराए गए तो कैंसर सेल कम हुए।
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Web Title: Develop Therapy for Breast Cancer
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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