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1205 आइटम्स पर GST तय: रोजमर्रा से जुड़ी चीजों पर कितना होगा असर?

Bhaskar news | May 19, 2017, 17:43 IST

  • श्रीनगर/नई दिल्ली. गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) से जुड़ा सबसे बड़ा एलान गुरुवार को हो गया। श्रीनगर में चल रही जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में आइटम्स के टैक्स रेट तय कर दिए गए। 1205 आइटम्स की लिस्ट पर सरकार का दावा है कि ज्यादातर सामान या तो सस्ते होंगे या उनकी कीमत जस की तस बनी रहेगी। हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट सस्ते हो जाएंगे। कोयला सस्ता होने से बिजली दरें घट सकती हैं। Q&A में समझिए पूरा मामला...
    क्या है GST, कब से लागू होगा?
    - GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स है। आसान शब्‍दों में कहें ताे GST पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक जैसा बाजार बनाएगा।
    - संसद इसका बिल पास कर चुकी है। 10 राज्य स्टेट GST पास कर चुके हैं। 1 जुलाई से GST देशभर में लागू होना है।
    इसे क्यों लाया गया?
    - 17 साल की कवायद के बाद GST इसलिए लाया गया कि अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। GST लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। GST को केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जा रहा है।
    - इससे एक्‍साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), स्टेट के सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैंप ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या सेल्स और गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।
    इससे फायदा किसे होने वाला है?
    कंज्यूमर:
    टैक्स पर टैक्स के हालात खत्म होने से कंज्यूमर को फायदा होगा। अभी सामान पर कुल मिलाकर 31% तक टैक्स लगता है। यह कम हुआ तो इम्प्लॉयमेंट बढ़ेगी।
    ट्रेडर: सिर्फ एक टैक्स से बिजनेस आसान होगा। टैक्स प्रॉसेस भी ट्रांसपैरेंट होगी। देश एक मार्केट बन जाएगा। कारोबारियों को पहले चुकाए टैक्स का इनपुट क्रेडिट मिलेगा।
    सरकार: टैक्स बेस बढ़ने से केंद्र और राज्यों का रेवेन्यू बढ़ेगा। सरकार के लिए इस पर नजर रखना भी आसान होगा। साथ ही, टैक्स की चोरी भी कम होगी।
    इकोनॉमी: दाम कम होने से भारत में बने प्रोडक्ट दूसरे देशों में कॉम्पीटिटिव होंगे। इसका फायदा एक्सपोर्ट में मिलेगा। इन्वेस्टमेंट का माहौल बेहतर होने से एफडीआई आएगा। सरकार का अनुमान है कि जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी ग्रोथ रेट 1.5 से 2% तक बढ़ जाएगी।
    गुरुवार​ को क्या हुआ?
    - GST काउंसिल की श्रीनगर में मीटिंग हुई। GST काउंसिल यानी वह ग्रुप जिसमें सभी राज्यों के फाइनेंस मिनिस्टर्स शामिल हैं। इस काउंसिल ने GST से जुड़े टैक्स रेट तय कर दिए। 1205 आइटम्स की रेट लिस्ट तय हुई।
    सबसे पहले जानें आपकी रोजमर्रा से जुड़ी चीजों पर क्या असर होगा?
    a) अनाज:
    गेहूं-चावल जैसी चीजें 1 जुलाई से GST लागू होने के बाद सस्ती हो जाएंगी। अभी कुछ राज्य गेहूं और चावल पर वैट लगाते हैं।
    b) दूध: दूध-दही पहले की तरह टैक्स के दायरे से बाहर रहेंगे। लेकिन मिठाई पर 5% टैक्स लगेगा।
    c) हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट: ये भी सस्ते होंगे। इन पर सिर्फ 18% टैक्स लगेगा। यह अब तक एक्साइज और वैट मिलाकर इन पर 22% से 24% टैक्स लगता था। यानी ये चीजें 4 से 6% तक सस्ती हो सकती हैं।
    d) लाइफ सेविंग मेडिसिन, चीनी, चाय, कॉफी (इंस्टेंट नहीं) और एडिबल ऑयल: इन पर 5% टैक्स रेट लागू होगा। इन पर मौजूदा रेट भी इसी के आसपास है।
    e) पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस: इन्हें GST से बाहर रखा गया है। बदलाव इन पर लागू नहीं होंगे।
    कार खरीदने की प्लानिंग पर कितना असर पड़ेगा?
    - कारों पर 28% टैक्स रेट लागू होगा। इसके अलावा सेस भी लगेगा। अभी छोटी कारों पर 12.5% एक्साइज टैक्स और 14.5% तक वैट लगता है। इस तरह टोटल टैक्स 27% हो जाता है। GST लागू होने के बाद छोटी कारों पर 28% टैक्स और उसके ऊपर 1 से 3% का सेस लगेगा। इससे छोटी कारों पर कुल टैक्स 29% से लेकर 31% के बीच हो जाएगा। यानी ये महंगी हो सकती हैं।
    - अभी 1500CC से ज्यादा कैपिसिटी के इंजन वाली कारों पर 41.5% से 44.5% टैक्स लगता है। GST लागू होने के बाद इन कारों पर (28% टैक्स + 15% सेस) 43% के करीब टैक्स लगेगा। ये कारें सस्ती हो सकती हैं।
    - एसी, फ्रिज भी 28% टैक्स दायरे में रखे गए हैं।
    सेहत को नुकसान वाली चीजों पर क्या ज्यादा टैक्स है?
    - बिल्कुल। पान मसाला, गुटखा, सिगरेट और तंबाकू पर पड़ेगा। इसके तहत पाना मसाला पर 60% सेस तो तंबाकू पर 71-204% तक लेवी लगेगी।
    - खैनी, जर्दा पर 160% तक सेस लगाने का प्रपोजल है। प्रति हजार सिगार पर 21% या 4,170 में से जो ज्यादा हो, उतना लेवी लिया जाएगा।
    क्या बिजली सस्ती होगी?
    - कोयले पर टैक्स रेट 11.69% से घटाकर 5% किया गया है। इससे कोयले से बिजली बनाना सस्ता होगा। लोगों के लिए भी रेट घट सकते हैं।
    - जीएसटी कानून में कहा गया है कि कंपनियों को कॉस्ट में बचत का फायदा कस्टमर्स को देना होगा। हालांकि, बिजली कितनी सस्ती होगी, यह कहना अभी मुश्किल है, क्योंकि कोयले और बिजली पर कई जगह टैक्स लगते हैं।
    - स्टील इंडस्ट्री में भी कोयले का इस्तेमाल होता है। उसका खर्च भी कम होगा। इससे स्टील प्रोडक्ट भी सस्ते होने की उम्मीद है।
    किन देशों में GST लागू हुआ तो GDP गिरी?
    - ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, मलेशिया और सिंगापुर ने 1991 से 2000 के बीच जीएसटी लागू किया। 1994 में जब सिंगापुर ने जीएसटी लागू किया तो उस साल जीडीपी में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। आईएमएफ के मुताबिक जीएसटी लागू होने से पहले सिंगापुर की जीडीपी 5.5% थी, जबकि जीएसटी लागू करने के बाद यह नेगेटिव में चली गई और -3% तक लुढ़क गई।
    आगे की स्लाइड में पढ़ें : सबसे ज्यादा असर मेकअप के सामानों पर; 11% तक बढ़ेगा टैक्स
  • अनाज और उसके प्रोडक्ट पर कितना टैक्स?
    - 00% गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी, खोई, ब्रेड (कुछ राज्य कुछ प्रोडक्ट पर वैट लगाते हैं। वहां सस्ते होंगे)
    - 05% रस्क, पिज्जा ब्रेड (इन पर अभी करीब 6% टैक्स है, ये 1% टैक्स कम होगा।)
    - 12% नमकीन भुजिया, मिक्सचर (एक्साइज 12.5%, वैट 5%, टैक्स 6% घटेगा।)
    - 18% पास्ता, नूडल्स, पेस्ट्री, केक, (एक्साइज 12.5%, वैट 5%, टैक्स 0.1% घटेगा।)
    डेयरी प्रोडक्ट्स पर कितना टैक्स?
    - 00% दूध, दही, लस्सी, पनीर (इन पर अब भी टैक्स नहीं लगता।)
    - 05% बच्चों के मिल्क फूड
    - 12% घी, चीज, बटर ऑयल (अभी 5% टैक्स है, 7% बढ़ जाएगा।)
    - 18% कंडेंस्ड मिल्क (अभी एक्साइज 12.5%, वैट 5%, टैक्स 0.1% घटेगा।)
    फल-सब्जियों पर कितना टैक्स?
    - 00% कच्ची सब्जियां और फल (अब भी टैक्स नहीं लगता।)
    - 5% प्रोसेस्ड फल-सब्जियां (एक्साइज और वैट मिलाकर 11%, टैक्स 6.5% घटेगा।)
    - 12% फ्रूट-वेजिटेबल जूस, जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, (एक्साइज+वैट=11.5%, टैक्स 0.5% घटेगा।)
    - 18% जैम, जेली (एक्साइज और वैट मिलाकर 11.5%, टैक्स 6.5% बढ़ेगा।)
    - 05% चाय-कॉफी (अभी एक्साइज और वैट मिलाकर 18.1%, टैक्स 13.1% कम।)
    चीनी-कन्फेक्शनरी पर कितना टैक्स?
    - 05% चीनी, खांडसारी (अभी चीनी पर 18.1%- खांडसारी पर 6% टैक्स, दोनों सस्ते।)
    - 18% फ्लेवर्ड चीनी (अभी एक्साइज और वैट मिलाकर 18.1%, टैक्स 0.1% घटेगा।)
    - 28% च्यूइंग गम (अभी एक्साइज और वैट मिलाकर 17%, टैक्स 11% बढ़ेगा।)
    कॉस्मेटिक्स पर कितना टैक्स?
    - 00% कुमकुम, बिंदी, सिंदूर (इन पर अब भी टैक्स नहीं लगता।)
    - 12% अगरबत्ती (12.5% एक्साइज लगता है, यह सस्ता होगा।)
    - 18% हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट (अभी एक्साइज+वैट 17%, टैक्स 1% बढ़ेगा।)
    - 28% मेकअप के सामान, सनस्क्रीन लोशन, शैम्पू, हेयर क्रीम, हेयर कलर/डाइ, शेविंग क्रीम, डिओड्रेंट (अभी एक्साइज और वैट मिलाकर 17%, टैक्स 11% बढ़ जाएगा।)
    प्लास्टिक की चीजों पर कितना टैक्स?
    - 18% किचन के सामान, केन, पाइप, शीट (अभी एक्साइज और वैट मिलाकर 18.1% है, टैक्स 0.1% कम होगा।)
    - 28% फ्लोर कवरिंग, बाथरूम के सामान (अभी 12.5% एक्साइज और 5% वैट, कुल 18.1%, टैक्स 9.9% बढ़ेगा।)
    (नोट : वैट, एक्साइज लगने के बाद जोड़ा जाता है।)
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, कस्टम ड्यूटी और लोकल बॉडी के टैक्स पहले जैसे ही बने रहेंगे...
  • सवाल-जवाब: कस्टम ड्यूटी और लोकल बॉडी के टैक्स पहले जैसे ही बने रहेंगे
    पहला सवाल कि जीएसटी लागू कैसे होगा?
    - अब तक प्रोडक्शन पर एक्साइज ड्यूटी लगती थी। जबकि जीएसटी कंजम्प्शन यानी खपत से तय होने वाला टैक्स है। यानी जहां गुड्स या सर्विस की सेलिंग होगी, वहां टैक्स लगेगा। किसी सामान को बनाने से लेकर उसकी सेलिंग तक, हर स्टेप में सिर्फ वैल्यू एडिशन पर टैक्स जुड़ेगा। पिछली स्टेप में चुकाए गए टैक्स का इनपुट क्रेडिट मिलेगा। जीएसटी रेट में केंद्र और राज्य का आधा-आधा हिस्सा होगा। यानी किसी वस्तु पर अगर 18% टैक्स है तो इसमें 9% हिस्सा केंद्र (सीजीएसटी) का और 9% राज्य (एसजीएसटी) का होगा।
    जीएसटी में कौन-कौन से टैक्स शामिल होंगे?
    - केंद्र सरकार के टैक्स– सेंट्रल एक्साइज, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल कस्टम ड्यूटी (एसएडी), सर्विस टैक्स, सेस (जैसे कृषि कल्याण सेस)।
    - राज्यों के टैक्स– वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स, लक्जरी टैक्स, एंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, परचेज टैक्स, लॉटरी पर टैक्स, सरचार्ज और सेस खत्म हो जाएंगे। लेकिन कस्टम ड्यूटी बनी रहेगी। लोकल बॉडीज के टैक्स बने रहेंगे।

    क्या सभी कारोबारी इसके दायरे में आएंगे?
    - यह उन सभी कारोबारियों पर लागू होगा, जिनका सालाना बिजनेस 20 लाख रुपए से ज्यादा है। नॉर्थ-ईस्ट और विशेष दर्जे वाले राज्यों के लिए यह लिमिट 10 लाख रुपए है। इससे कम बिजनेस वालों को रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं।
    - सालाना 20 से 50 लाख तक टर्नओवर वालों के लिए कंपोजिशन स्कीम का ऑप्शन है। इसमें पूरे टर्नओवर पर टैक्स लगेगा। इसका फायदा वही कारोबारी उठा सकते हैं, जिनका बिजनेस किसी एक राज्य में है।
    इम्पोर्ट पर यह किस तरह लागू होगा?
    - इम्पोर्ट को दो राज्यों के बीच सप्लाई की तरह माना जाएगा। उस पर आईजीएसटी लागू होगा। बेसिक कस्टम ड्यूटी भी लगेगी। इससे चीजें थोड़ी महंगी होंगी। सामान की खपत जहां होगी, उसी राज्य को एसजीएसटी का पेमेंट होगा।
    एक्सपोर्ट होने वाले सामानों का क्या होगा?
    - एक्सपोर्ट को जीरो-रेटेड सप्लाई माना जाएगा। यानी इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, इसमें भी इनपुट टैक्स क्रेडिट का नियम लागू होगा और एक्सपोर्टर को रिफंड लेना पड़ेगा। एसईजेड यूनिट को सप्लाई भी जीरो-रेटेड होगी।
    शेयर/म्यूचुअल फंड पर भी जीएसटी लागू होगा?
    - नहीं। सिक्युरिटीज को गुड्स एंड सर्विस की डेफिनेशन से बाहर रखा गया है। ये जीएसटी के दायरे से बाहर होंगे।

    कंपनियों को अकाउंटिंग के तरीके बदलने पड़ेंगे?
    - तरीके तो नहीं बदलेंगे, लेकिन कंपनियां चाहें तो अकाउंटिंग के अलग सॉफ्टवेयर पैकेज ले सकती हैं। जीएसटी में रिकॉर्ड रखने के लिए भी कोई खास फॉर्मेट नहीं बताया गया है। यानी इस मामले में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: तीन महीने में सरकार को टैक्स जमा नहीं करने पर सजा
  • तीन महीने में सरकार को टैक्स जमा नहीं करने पर सजा
    - बिना इनवॉयस के सप्लाई करना, गलत इनवॉयस जारी करना, बिना सप्लाई के इनवॉयस जारी करना। टैक्स इकट्‌ठा किया, लेकिन 3 महीने में सरकार के पास जमा नहीं किया, टैक्स की रकम कम काटी या नहीं काटी। गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट या रिफंड लेना, खातों में हेरा-फेरी या उन्हें नष्ट करना, टर्नओवर कम बताना। इन पर कम से कम 10,000 रु. जुर्माना लगेगा। ऐसे लोगों की मदद करने वालों पर 25,000 रु. तक जुर्माना।
    रिटर्न की जानकारी न देने पर भी जुर्माना
    - रिटर्न की जानकारी तय वक्त में नहीं देने पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। जानबूझ कर गलत जानकारी देने पर 25,000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
    - रूल्स का वॉयलेशन कर सामान की सप्लाई करने पर उसे जब्त किया जा सकता है। जिस गाड़ी में सामान की ढुलाई की गई होगी, उसे भी जब्त किया जाएगा।
    - टैक्स चोरी, गलत टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड की रकम 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है तो 5 साल तक जेल और जुर्माना। यह रकम 2 से 5 करोड़ के बीच है तो तीन साल तक जेल और जुर्माने का प्राेविजन है। यह रकम 1 से 2 करोड़ के बीच है तो एक साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। तीनों मामलों में कम से कम छह महीने की जेल होगी।
    - दूसरी या ज्यादा बार गलती पकड़े जाने पर 5 साल तक जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर गलती शख्स के बजाय कंपनी की है तो कंपनी के साथ उसके हेड को भी दोषी माना जाएगा और सजा होगी। इनमें कंपनी के डायरेक्टर भी शामिल होंगे। ट्रस्ट के मामलों में मैनेजिंग ट्रस्टी और एलएलपी के पार्टनर जिम्मेदार होंगे।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Bhaskar Special Report On GST: Finalises Rates For 1205 Items; No Taxes On Milk, Tea-Coffee
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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